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टेक्नोलॉजी

टिकटॉक के अब बाद इंस्टाग्राम रील्स, भारतीय युवाओं के बीच हो रहा है लोकप्रिय

भारत में टिकटॉक को प्रतिबंधित किए जाने के बाद, इंस्टाग्राम रील्स युवा भारतीयों के लिए सबसे लोकप्रिय ऐप बन गया है।

अब इंस्टाग्राम रिल्स हुआ लोकप्रिय।(Image- Pixabay)

भारत में टिकटॉक को प्रतिबंधित किए जाने के बाद इसकी अनुपस्थिति में इंस्टाग्राम रील्स युवा भारतीयों के लिए सबसे लोकप्रिय ऐप बन गया है । 10 में से 7 (18-29 आयु वर्ग) युवाओं ने कहा कि वे वीडियो साझा करने के लिए प्लेटफॉर्म के रूप में इंस्टाग्राम रील्स का इस्तेमाल करना पंसद करेंगे। मंगलवार को एक नए रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई।

एक इंटरनेट आधारित मार्केट रिसर्च और डेटा एनालिटिक्स फर्म यूजीओवी द्वारा उपलबध कराए गए आंकड़े के अनुसार, लगभग दो-तिहाई शहरी भारतीयों (65 प्रतिशत) ने चीनी शॉर्ट-वीडियो मेकिंग ऐप टिकटॉक की अनुपस्थिति में कहा कि वे विकल्प की ओर रुख कर सकते हैं या ऐसे वीडियो ऐप का इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं जो मूल रूप से भारतीय या गैर-चीनी हैं।


इंस्टाग्राम ऐप। (Image- Pixabay)

जेनजेड (54 प्रतिशत) की तुलना में, मिलेनियल्स (69 प्रतिशत) के टिकटॉक के वकिल्प की ओर रुख करने की ज्यादा संभावना है।

इसी तरह, महिलाओं की तुलना में पुरुषों (70 प्रतिशत बनाम 59 प्रतिशत) के यही नजरिया रखने के आसार अधिक हैं।

यूजीओवी इंडिया की जनरल मैनेजर दीपा भाटिया ने कहा, “चीनी ऐप्स के साथ टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फैसले ने घरेलू प्लेयर्स के लिए एक अवसर पेश किया है, जो इस स्थिति का लाभ उठाने के लिए तैयारी कर रहे हैं।”

टिकटॉक ऐप। (Image- Pixabay)

उन्होंने कहा, “इसलिए, लोगों की जरूरतों को पूरा करना और उनकी पसंद को समझना जरूरी है।”

लगभग 68 प्रतिशत कंटेंट क्रिएटर्स ने कहा कि वे वीडियो शेयरिंग ऐप के भारतीय या गैर-चीनी संस्करणों पर स्विच करने की संभावना रखते हैं।

विकल्पों की सूची के साथ प्रस्तुत किए जाने पर, इंस्टाग्राम रील्स भविष्य में लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ऐप्स की सूची में सबसे ऊपर है।

प्लेटफॉर्म, जो कि फेसबुक का टिकटॉक को जवाब है, का स्वागत 10 में 6 (62 प्रतिशत) से ज्यादा शहरी भारतीयों ने किया है जो दावा करते हैं कि उन्होंने इसका इस्तेमाल करने की कोशिश की है और इसका इस्तेमाल जारी रखने की संभावना है।(IANS)

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एप्पल वॉच,सांकेतिक चित्र (Pixabay)

एक नए अध्ययन से जानकारी समाने आया है कि एप्पल वॉच सीरीज 6 'नियंत्रित परिस्थितियों में फेफड़ों की बीमारियों के रोगियों में हृदय गति और ऑक्सीजन संतृप्ति (एसपीओ2) प्राप्त करने का एक विश्वसनीय तरीका है।'

जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट में प्रकाशित अध्ययन ने 9टू5मैक की रिपोर्ट 'एप्पल वॉच डिवाइस कमर्शियल ऑक्सीमीटर के बीच मजबूत सकारात्मक सहसंबंध' देखा गया है।

ऐप्पल वॉच या वाणिज्यिक ऑक्सीमीटर उपकरणों में त्वचा के रंग, कलाई की परिधि, कलाई के बालों की उपस्थिति और एसपीओ 2 के लिए तामचीनी कील और हृदय गति माप के मूल्यांकन में कोई सांख्यिकीय अंतर नहीं था।

साओ पाउलो विश्वविद्यालय की ओर से अध्ययन एक आउट पेशेंट न्यूमोलॉजी क्लिनिक से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और इंटरस्टिशियल लंग डिजीज के 100 रोगियों के साथ किया गया।

इसने ऐप्पल वॉच सीरीज 6 के साथ एसपीओ 2 और हृदय गति डेटा एकत्र किया और उनकी तुलना दो वाणिज्यिक पल्स ऑक्सीमीटर से की।

परीक्षण स्वस्थ व्यक्तियों, इंटरस्टीशियल लंग डिजीज और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज वाले लोगों के साथ किए गए थे।

oximeter, corona virus, covid 19 कोरोना काल में ऑक्सीमीटर का सबसे अधिक उपयोग किया गया है।(Pixabay)

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बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार। (Twitter, Nitish Kumar)

जातीय जनगणना को लेकर बिहार में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दो बडे दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (युनाइटेड) अब सीधे तौर पर आमने-सामने नजर आने लगे हैं। केंद्र की भाजपा नीत राजग सरकार जहां जाति आधारित जनगणना कराने से इंकार कर रही है वहीं जदयू के नेता नीतीश कुमार इस मामले को लेकर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ मुखर हैं। ऐसे में कयास लगाया जाने लगा है कि क्या फिर से बिहार की सियासी समीकण बदलेंगे। हालांकि इस मुद्दे को लेकर कोई भी नेता अब तक खुलकर बात नहीं कर रही है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली में रविवार को स्पष्ट कर चुके हैं कि जाति जनगणना देश के लिए जरूरी है। उन्होंने दिल्ली में कहा कि केंद्र सरकार को जातिगत जनगणना करानी चाहिए। इसके कई फायदे हैं।

उन्होंने कहा कि आजादी के पहले जनगणना हुई थी, आजादी के बाद नहीं हुई। जातीय जनगणना होगी तभी लोगों के बारे में सही जानकारी होगी। तब पता चलेगा कि जो पीछे है, उसे आगे कैसे किया जाए। जातीय के साथ उपजातीय जनगणना भी कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इसको लेकर एक बार फिर राज्य में सभी दलों के साथ बैठक कर आगे का निर्णय लेंगे। नीतीश के इस बयान के बाद तय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जातिगत जनगणना के मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इधर, भाजपा के नेता इसमें व्यवहारिक दिक्कत बता रहे हैं।

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुशील कुमार मोदी कहते हैं कि तकनीकी और व्यवहारिक तौर पर केंद्र सरकार के लिए जातीय जनगणना कराना संभव नहीं है। इस बाबत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार अगर चाहे तो वे जातीय जनगणना कराने के लिए स्वतंत्र है।


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अगरबत्ती उपयोग पर त्रिपुरा अपने खोए हुए गौरव को वापस पाने का संभव कोशिश कर रहा है। (Unsplash)

अगरबत्ती उपयोग पर त्रिपुरा अपने खोए हुए गौरव को वापस पाने का संभव कोशिश कर रहा है, जिसे पहले वियतनाम और चीन द्वारा नियंत्रण किया जा रहा था। त्रिपुरा इंडस्ट्रियल विकास निगम के अधिकारियों के अनुसार राज्य में बांस की छड़ियों का उत्पादन में भारी गिरावट आई है 2010 में 29,000 मीट्रिक टन से गिरकर 2017 में 1,241 मीट्रिक टन हो गया था, क्योंकि भारत कि प्रतिवर्ष 70,000 (96 प्रतिशत) मीट्रिक टन गोल बास की छड़ियां (46प्रतिशत) वियतनाम और (47 प्रतिशत) चीन द्वारापूरी की जा रही थी।

टीआईडीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि 2019 में, केंद्र सरकार ने सीमा शुल्क 25 प्रतिशत बढ़ा दिया और बांस के उत्पादों को प्रतिबंधित सूची में शामिल कर दिया गया, जिससे दूसरे देशों के लिए समस्या उत्पन्न हुई। वर्तमान में, पूर्वोत्तर राज्य 2,500 मीट्रिक टन बांस की छड़ें पैदा कर रहा है और आने वाले कुछ वर्षों में उत्पादन (12,000 मीट्रिक टन) पढ़कर हो जाएगा, क्योंकि आधुनिक मशीनों के साथ 14 और नई बांस की छड़ें निर्माण इकाइयां जल्द ही पूरे राज्य में आ जाएंगी।उन्होंने कहा, पहले त्रिपुरा के कारीगर हाथ से बांस की छड़ें बनाते थे ,परंतु कुछ साल पहले सरकार ने उनकी अनुकूल मशीन खरीदने में सहायता की।

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