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दुनिया

अमेरिका के ट्रंप समर्थक बाइडेन के चयन को एक बार फिर चुनौती देने को तैयार

By : अरुल लुइस अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थक जो बाइडेन के चुनाव को पलटने का एक आखिरी असफल प्रयास करने को तैयार कर रहें हैं ट्रंप, जब कांग्रेस बुधवार को नवंबर के चुनाव में उनकी जीत पर आखिरी मुहर लगाएगी। सीनेट और प्रतिनिधि सभा दोनों के सदस्य एक संयुक्त सत्र में

By : अरुल लुइस

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थक जो बाइडेन के चुनाव को पलटने का एक आखिरी असफल प्रयास करने को तैयार कर रहें हैं ट्रंप, जब कांग्रेस बुधवार को नवंबर के चुनाव में उनकी जीत पर आखिरी मुहर लगाएगी। सीनेट और प्रतिनिधि सभा दोनों के सदस्य एक संयुक्त सत्र में उपराष्ट्रपति माइक पेंस की अध्यक्षता में बैठक करेंगे और इस दौरान चुनावी कॉलेज के वोटों की गिनती की जाएगी और इसे प्रमाणित किया जाएगा। ट्रंप से उम्मीद की जा रही है कि वे इस दौरान अपने समर्थकों को संबोधित करेंगे।


यह दावा करते हुए कि चुनाव में व्यापक धोखाधड़ी हुई है, ट्रंप और उनके कट्टर समर्थकों ने 3 नवंबर के चुनाव के परिणाम और निर्वाचक मंडल के फैसले को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है जिसमें बाइडेन को राष्ट्रपति और कमला हैरिस को उपराष्ट्रपति के रूप में चयनित किया गया है। विभिन्न स्तरों पर अदालतों में ट्रंप और उनके समर्थकों ने 50 से अधिक कानूनी मुकदमे किए, लेकिन असफल रहे।

संवैधानिक रूप से आवश्यक संयुक्त सत्र ज्यादातर रूटीन मामले रहे हैं, लेकिन इस बार सीनेटर टेड क्रूज के नेतृत्व में रिपब्लिकन के एक छोटे समूह ने घोषणा की है कि वे संयुक्त सत्र के दौरान इलेक्टोरल कॉलेज के निर्णय को चुनौती देंगे। ट्रंप के कांग्रेसी समर्थकों के इस कदम से उनकी रिपब्लिकन पार्टी में फूट पड़ने की संभावना है, क्योंकि उनके अधिकांश नेता जैसे मिच मैककोनेल, जो सीनेट में पार्टी के प्रमुख हैं, वे इस बात के खिलाफ हैं और उनका मानना है कि आखिरकार प्रतीकात्मक प्रतिरोध से क्या हासिल होगा।

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मैककोनेल ने पिछले महीने ही बाइडेन के चुनाव को स्वीकार करते हुए कहा था, “हमारे देश में आधिकारिक तौर पर, एक राष्ट्रपति-चयनित और एक उप-राष्ट्रपति-चयनित हैं। मैं राष्ट्रपति-चयनित जो बाइडेन को बधाई देना चाहता हूं।” यहां तक कि पेंस ने कथित तौर पर बाइडेन के चुनाव और साथी कमला हैरिस के चयन को अस्वीकार करने के ट्रंप के सार्वजनिक अनुरोधों को ठुकरा दिया था।

ट्रंप ने मंगलवार को ट्वीट किया, “उपराष्ट्रपति के पास धोखाधड़ी से चुने गए निर्वाचकों को अस्वीकार करने की शक्ति है।” हालांकि वास्तव में वह ऐसा करने के लिए कानूनी रूप से सशक्त नहीं है। इससे पहले सोमवार को, उन्होंने जॉर्जिया राज्य में एक रैली में कहा था, “मुझे उम्मीद है कि हमारे महान उपराष्ट्रपति.. हमारे लिए आएंगे।”

एक चेतावनी की तरह उन्होंने कहा था, “अगर वह नहीं आते हैं, तो मैं उसे बहुत पसंद नहीं करूंगा।” पेंस ने मंगलवार को ट्रंप से मुलाकात की, लेकिन कई मीडिया रिपोटरें ने अनाम स्रोतों के हवाले से कहा कि वह संविधान का पालन करेंगे और चुनाव में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। बाइडेन ने 306 इलेक्टोरल कॉलेज वोट जीते, जबकि ट्रंप ने 232 इलेक्टोरल कॉलेज जीते हैं। (आईएएनएस)

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आईपीएल में रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) का एक मैच (wikimedia commons)

भारत के क्रिकेट टीम के कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने एक के बाद टीम से अपनी कप्तानी छोड़ने का जैसे ऐलान किया वैसे हि , उनके चाहने वाले , प्रशंसकों और साथी खिलाडियों ने अपनीं प्रतिक्रिया देना शुरू कर दी । इसी बीच दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज डेल स्टेन का कहना है कि आईपीएल की टीम का नेतृत्व करने का दबाव और युवा परिवार का होना रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) के कप्तान विराट कोहली के इस आईपीएल के बाद टीम की कप्तानी छोड़ने के फैसले का कारण हो सकता है। आरसीबी की टीम की और से रविवार की देर रात यह घोषणा की गई , कि विराट कोहली आईपीएल 2021 सीजन के बाद टीम की कप्तानी छोड़ देंगे । इस के पहले कोहली ने कुछ दिन पहले ही टी20 विश्व कप के बाद भारतीय टीम के टी20 प्रारूप की कप्तानी छोड़ने का भी फैसला किया था।


डेल स्टेन ने आगे कहा कि, " विराट कोहली आरसीबी टीम के साथ शुरू से जुड़े हैं। मुझे नहीं पता, जैसे-जैसे जीवन आगे बढ़ता है आप चीजों को प्राथमिकता देने लगते हैं। कोहली का नया यूवा परिवार है । उन्हें अपनी पर्शनल लाइफ भी देखना है ।
डेल ने यह भी कहा कि , "हो सकता है, उस जिम्मेदारी (कप्तानी) से थोड़ा सा त्याग करना और सिर्फ अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होना उनके करियर के लिए इस समय एक अच्छा निर्णय है।"

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दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन (wikimedia commons)

दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी में शुमार अमेजन को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है । द मॉर्निग कॉन्टेक्स्ट की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन ने भारत में अपने कानूनी प्रतिनिधियों के आचरण की जांच शुरू कर दी है। एक व्हिसलब्लोअर शिकायत के आधार पर यह जांच हुई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि अमेजन द्वारा कानूनी शुल्क में भुगतान किए गए कुछ पैसे को उसके एक या अधिक कानूनी प्रतिनिधियों द्वारा घूस में बदल दिया गया है।

काम करने वाले दो लोगों ने जो कि अमेजन की इन-हाउस कानूनी टीम के साथ है , उन्होंने मिलकर पुष्टि की कि अमेजन के वरिष्ठ कॉर्पोरेट वकील राहुल सुंदरम को छुट्टी पर भेजा गया है। एक संदेश में उन्होंने कहा, "क्षमा करें, मैं प्रेस से बात नहीं कर सकता।" हम स्वतंत्र रूप से यह पता नहीं लगा सके कि आंतरिक जांच पूरी हो चुकी है या प्रगति पर है।

कई सवालों के एक विस्तृत सेट के जवाब में, अमेजन के प्रवक्ता ने कहा, "भ्रष्टाचार के लिए हमारे पास शून्य सहनशीलता है। हम अनुचित कार्यो के आरोपों को गंभीरता से लेते हैं, उनकी पूरी जांच करते हैं, और उचित कार्रवाई करते हैं। हम विशिष्ट आरोपों या किसी की स्थिति पर इस समय जांच या टिप्पणी नहीं कर रहे हैं इस समय जांच।"

\u0911\u0928\u0932\u093e\u0907\u0928 \u0930\u093f\u091f\u0947\u0932\u0930 \u0905\u092e\u0947\u091c\u0928 दुनिया की सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन कंपनी का लोगो (wikimedia commons)

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भारतीय जनता पार्टी भाजपा का चुनावी चिन्ह (wikimedia commons)

अभी-अभी भारत के पंजाब राज्य में एक बड़ी राजनेतिक घटना घटी जब वंहा का मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और सत्ता दल पार्टी ने राज्य ने नया मुख्यमंत्री बनाया । पंजाब में एक दलित को मुख्यमंत्री बना कर कांग्रेस ने एक बड़ी सियासी चाल खेल दी है। अब कांग्रेस इसका फायदा अगले साल होने जा रहे राज्यों के विधानसभा चुनाव में उठाने की रणनीति पर भी काम करने जा रही है । उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सियासी पारे को गरम कर दिया है कांग्रेस की इस मंशा ने।

कांग्रेस नेता हरीश रावत जो कि पंजाब में दलित सीएम के नाम का ऐलान करने वाले वो उत्तराखंड से ही आते हैं, अतीत में प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और आगे भविष्य में भी सीएम पद के दावेदार हैं, इसलिए बात पहले इस पहाड़ी राज्य के सियासी तापमान की करते हैं। साढ़े चार साल के कार्यकाल में भाजपा राज्य में अपने दो मुख्यमंत्री को हटा चुकी है और अब तीसरे मुख्यमंत्री के सहारे राज्य में चुनाव जीतकर दोबारा सरकार बनाना चाहती है। इसलिए भाजपा इस बात को बखूबी समझती है कि हरीश रावत उत्तराखंड में तो इस मुद्दें को भुनाएंगे ही।

बात करे उत्तराखंड राज्य कि तो यहा पर आमतौर पर ठाकुर और ब्राह्मण जाति ही सत्ता के केंद्र में रहती है, लेकिन अब समय बदल रहा है राजनीतिक दल भी दलितों को लुभाने का विशेष प्रयास कर रहे हैं। दरअसल, उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है , जिसमें 13 सीट अनुसूचित जाति और 2 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। मसला सिर्फ 13 आरक्षित सीट भर का ही नहीं है। उत्तराखंड राज्य के 17 प्रतिशत से अधिक दलित मतदाता 22 विधानसभा सीटों पर जीत-हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इसके साथ ही कुल 36 सीटों पर जीत हासिल करने वाली पार्टी राज्य में सरकार बना लेती है।

brahmin in uttrakhand उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है (wikimedia commons)

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