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नए फीचर पर हो रहा है टेस्ट , ट्विटर यूजर के पोस्ट करने से पहले देगा चेतावनी

यूजर्स को गलत पोस्ट और गलत बातचीत करने से पहले चेतावनी देगा नया फीचर ।

ट्विटर यूजर्स को गलत पोस्ट और गलत बातचीत करने से पहले चेतावनी देगा नया फीचर (Pixabay)

यूजर्स को गलत पोस्ट और गलत बातचीत करने से पहले चेतावनी देगा नया फीचर क्योंकि माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर आईओएस और एंड्रॉइड पर नए फीचर पर टेस्ट कर रहा है । द वर्ज की रिपोर्ट के अनुसार, चल रही बातचीत में एक संकेत दिया गया है जो कहता है कि इस तरह की बातचीत तीव्र हो सकती है।
गहन बातचीत में से एक का उत्तर देने का उपयोगकर्ता प्रयास करते हैं, तो चलो एक दूसरे के लिए देखो और सहानुभूति और तथ्य-आधारित बातचीत को प्रोत्साहित करने के लिए तीन बुलेट बिंदु देगा।

" हम एंड्रॉइड और आईओएस पर संकेतों का परीक्षण कर रहे हैं जो आपको सूचित करते हैं कि आप जिस बातचीत में प्रवेश करने वाले हैं, वह गर्म या तीव्र हो सकता है।" माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट के सपोर्ट पेज पर यह लिखा है ।यह एक कार्य प्रगति पर है क्योंकि हम सीखते हैं कि स्वस्थ बातचीत का बेहतर समर्थन कैसे करें। यूजर्स को कुछ ऐसा ट्वीट करने से पहले चेतावनी देता है जो आपत्तिजनक हो सकता है।


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अगर उपयोगकर्ता किसी ऐसे लेख को रीट्वीट करने की कोशिश करते हैं, तो ट्विटर एक संकेत भी दिखा सकता है, जो गलत सूचना के प्रसार को कम करने में मदद करता है। यह सब रिपोर्ट में कहा गया है । हालांकि वे कुछ खराब ट्वीट्स को साझा करने से रोकने में मदद कर सकते हैं।(आईएएनएस-PS)

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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8 जनवरी को चुनाव आयोग(Election Commission of India) द्वारा जारी के गए 5 राज्यों के विधान सभा चुनावों(Vidhan Sabha Election 2022) के तारिखों के ऐलान से चुनावी गहमा-गहमी चरम पर है। आपको बता दें कि वर्ष 2022 में 5 अहम राज्यों में विधान सभा चुनाव आयोजित होने जा रहे हैं। यह राज्य हैं उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखण्ड, गोवा एवं मणिपुर। साथ ही उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) में होने जा रहे चुनाव को 7 चरणों में बांटा गया है, मणिपुर 2 चरणों में और गोवा, उत्तराखण्ड, पंजाब(Punjab) में चुनाव 1 चरण में आयोजित किया जाएगा। चुनाव तारीखों के घोषित होने बाद सभी राजनीतिक दल एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं और हर वह हथकंडा अपना रहे हैं जिससे मतदाता आकर्षित हों। साथ ही अब यह भी संभावना अधिक है कि इस बीच चुनावी जमाखोरी बढ़ जाएगी।

पिछले चुनाव में पार्टियों ने कितना खर्च किया था?

आपको जानकारी के लिए बता दें कि 2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में करीब 5,500 करोड़ रूपये बड़ी पार्टियों द्वारा चुनाव अभियान में खर्च किए गए थे। साथ ही एक मीडिया रेपोर्ट के अनुसार 1000 करोड़ से अधिक पैसा मतदाताओं को पैसे से या शराब से लुभाने में खर्च किए गए थे। आपको यह भी बता दें कि 2017 में ही हुए 5 राज्यों में विधान सभा चुनाव में 1.89 अरब रूपये खर्च किए गए थे, जिसमें बाहरी खर्च कितना था इसका कोई हिसाब-किताब नहीं है।

इसके साथ विधानसभा में चुनाव आयोग ने निर्धारित की खर्च सीमा प्रति उम्मीदवार 30 लाख तय किया है, किन्तु यह सभी जानते हैं कि इसका पालन नहीं होता है। बल्कि बाहरी खर्च और वोट के लिए नोट का इस्तेमाल कर बेहिसाब पैसा बहाया जाता है। सभी पार्टियां, पार्टी चंदे को भी चुनाव में होने वाले खर्च के लिए इस्तेमाल करती हैं। साथ ही टिकट बिक्री को भी चुनावी जमाखोरी में गिना जा सकता है। हालही में आम आदमी पार्टी के खुदके विधायक ने अरविन्द केजरीवाल पर करोड़ों रुपयों के बदले टिकट बेचने का आरोप लगाया है।
जैसा की आपको पता है कि इस साल होने वाले 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव सभी पार्टियों की नाक की बात बन गई है, जिस वजह से हर कोई अपने-अपने तरीके से लोगों को जुटाने में और चीजों को भुनाने में जुटा हुआ है। चाहे वह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा हो या 'मैं लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ', किन्तु आज भी हम यह कह सकते हैं कि किसी भी प्रदेश ने महिलाओं की सुरक्षा का ठोस आश्वासन नहीं दिया है। इसी तरह भ्रष्टाचार और पैसों की जमाखोरी पर किसी भी सरकार को निर्दोष करार दे देना समझदारी का काम नहीं होगा। आपको बता दें कि एक समय ऐसा भी था जब समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने यह स्वीकारा था कि समाजवादी पार्टी के सरकार में भ्रष्टाचार होता था।

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राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

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rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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