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देश

एक हजार से ज्यादा धर्मांतरण कराने के आरोप में दो गिरफ्तार, बड़े स्तर पर चल रहा था धंधा

उमर गौतम और जहांगीर नाम के इन दोनों आरोपियों ने लगभग 1000 हिन्दुओं को इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए मजबूर किया था।

(NewsGram Hindi, साभार- आईएएनएस)

उत्तर प्रदेश एटीएस ने 1000 से ज्यादा हिन्दुओं को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने के आरोप में दिल्ली से दो लोगों को गिरफ्तार किया है। उमर गौतम और जहांगीर नाम के इन दोनों आरोपियों ने लगभग 1000 हिन्दुओं को इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए मजबूर किया था। एक आरोपी ने खुलासा किया कि वह जामिया नगर के बटाला हाउस का रहने वाला है और उसने खुद धर्म परिवर्तन किया है। यूपी के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने सोमवार को यहां प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि राज्य में एक रैकेट चल रहा है, जो हिन्दुओं को इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर कर रहा है। कुमार ने इसकी पुष्टि की है कि अब तक लगभग 1000 लोगों ने अपना धर्म परिवर्तित कर लिया है।

एडीजी ने आगे कहा कि ये दोनों लोग गरीब परिवारों, बेरोजगार युवाओं और विकलांगों को निशाना बनाते थे, खासकर जो सुनने और बोलने में अक्षम थे, उनको अपना धर्म बदलने के लिए मजबूर करते थे। पुलिस के मुताबिक पैसे और आर्थिक स्थिरता के लिए लोगों को धर्म परिवर्तन का लालच दिया गया। उत्तर प्रदेश एडीजी ने यह भी कहा कि यह धर्म परिवर्तन के लिए आईएसआई से फंडिंग का मामला हो सकता है।


प्रशांत कुमार ने यह भी कहा कि कई हिन्दू महिलाओं को भी अपना धर्म बदलने के लिए मजबूर किया गया और उनकी शादी कर दी गई। उन्होंने कहा कि यह रैकेट नोएडा, कानपुर और मथुरा में चल रहा था। आरोपी ‘इस्लामिक दावा सेंटर’ नाम से एक सेंटर चलाते थे, जिसे दुनिया भर से फंडिंग मिलती थी। पुलिस उन लोगों को भी ट्रैक कर रही है जो इस रैकेट में फंस गए थे और यह समझने के लिए आगे की जांच कर रही है कि उन्होंने लोगों को कैसे प्रभावित किया।

यह भी पढ़ें: ‘इस्लाम संविधान को नहीं मानता है!

अब सवाल यह है कि क्या यह एक शहर का मामला है? तो उत्तर है नहीं! ऐसे गोरख-धंधे कई शहरों में चल रहे हैं। इससे पहले वड़ोदरा, गुजरात में परिवार के 6 सदस्यों पर जबरन धर्मांतरण मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी जिनमें दो महिलाऐं भी शामिल है। इससे भी पहले बांग्लादेश के मौलवी यहाँ तक बोल चुके हैं कि डासना शिव शक्ति पीठ के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के कारण ही भारत में कोरोना महामारी फैला है, और धर्मांतरण ही इससे बचने का एक मात्र उपाय है।

धर्मान्तरण के काले धंधे में मौलानाओं के साथ-साथ विदेशी ताकतों का भी हाथ भारत में इस अपराध को आगे बढ़ा रहा है। केवल इस गिरोह ने लगभग 1000 लोगों का धर्मपरिवर्तन कराया, तो सोचिए ऐसे और कितने होंगे। साथ ही इस मामले के तार आईएसआई जुड़ना कई और षड्यंत्रों की तरफ भी इशारा करता है।(SHM)

स्रोत-आईएएनएस

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कार्बन कैप्चर पर पहली कार्यशाला में अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा, "पीएम ने हम सभी को 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन राष्ट्र बनने को कहा है।" उन्होंने सीसीयूएस के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के नेतृत्व वाले आरडी एंड डी की दिशा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की हालिया पहलों के बारे में भी जानकारी दी।

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वेल्लोर के इस 10 वर्षीय छात्र ने अपनी लगन से वकीलों के लिए ई-अटॉर्नी नामक एक ऐप बना डाला ( Pixabay)

कोरोना के इस दौर में ऐप टेक्नॉलॉजी (App Technology) की पढ़ाई कई समस्याओं का समाधान कर रही है। ऐसा ही एक समाधान 10 वर्षीय छात्र कनिष्कर आर ने कर दिखाया है। कनिष्कर ने पेशे से वकील अपने पिता की मदद एक ऐप (App) बनाकर की। दस्तावेज संभालने में मददगार यह ऐप वकीलों और अधिवक्ताओं को अपने क्लाईंट एवं काम से संबंधित दस्तावेज संभालने में मदद करता है। 10 वर्षीय कनिष्कर का यह ऐप अब उसके पिता ही नहीं बल्कि देश के कई अन्य वकील भी इस्तेमाल कर रहे हैं और यह एक उद्यम की शक्ल ले रहा है।

कनिष्कर अपने पिता को फाईलें संभालते देखता था, जो दिन पर दिन बढ़ती चली जा रही थीं। जल्द ही वह समझ गया कि उसके पिता की तरह ही अन्य वकील भी थे, जो इसी समस्या से पीड़ित थे। इसलिए जब कनिष्कर को पाठ्यक्रम अपने कोडिंग के प्रोजेक्ट के लिए विषय चुनने का समय आया, तो उसने कुछ ऐसा बनाने का निर्णय लिया, जो उसके पिता की मदद कर सके। वेल्लोर (Vellore) के इस 10 वर्षीय छात्र ने अपनी लगन से वकीलों के लिए ई-अटॉर्नी नामक एक ऐप बना डाला। इस ऐप का मुख्य उद्देश्य वकीलों और अधिवक्ताओं को अपने क्लाईंट के एवं काम से संबंधित दस्तावेज संभालने में मदद करना है। इस ऐप द्वारा यूजर्स साईन इन करके अपने काम को नियोजित कर सकते हैं और क्लाईंट से संबंधित दस्तावेज एवं केस की अन्य जानकारी स्टोर करके रख सकते हैं। इस ऐप के माध्यम से यूजर्स सीधे क्लाईंट्स से संपर्क भी कर सकते हैं। जिन क्लाईंट्स को उनके वकील द्वारा इस ऐप की एक्सेस दी जाती है, वो भी ऐप में स्टोर किए गए अपने केस के दस्तावेज देख सकते हैं।

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