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थोड़ा हट के

सांची स्तूप क्यों है इतना प्रसिद्ध

भारत में मध्य प्रदेश राज्य के रायसेन ज़िले में स्थित सांची स्तूप एक विश्वप्रसिद्ध बौद्ध स्मारक है। यहाँ देश विदेश से कई पर्यटक घुमने फिरने या इस स्तूप की वास्तुकला को देखने आते हैं।

भारत में मध्य प्रदेश राज्य के रायसेन ज़िले में स्थित सांची स्तूप एक विश्वप्रसिद्ध बौद्ध स्मारक है | (Wikimedia Commons)

भारत में मध्य प्रदेश राज्य के रायसेन ज़िले में स्थित सांची स्तूप एक विश्वप्रसिद्ध बौद्ध स्मारक है | यहाँ देश विदेश से कई पर्यटक घुमने फिरने या इस स्तूप की वास्तुकला को देखने आते हैं| अगर बात करे इसके निर्माण की तो यह स्तूप का निर्माण मोर्य वंश के महान शासक सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी ई.पू में कराया था | सांची के स्तूप में भगवान बुद्ध के अवशेष पाये जाते हैं | इसलिए यह जगह बहुत महान है | साथ ही सांची के स्तूप को बौद्ध अध्ययन एवं बौद्ध शिक्षा के प्रचार प्रसार के लिए केंद्र के रूप में इसका निर्माण किया गया था | साँची के स्तूप को युनेस्को द्वारा 'विश्व विरासत स्थल' का दर्जा प्राप्त है| वर्ष 1989 में इसे भारत की और से 'विश्व विरासत स्थल' सूचि में शामिल किया गया | आप को बता दे कि साँची का स्तूप भोपाल से 46 किमी. और विदिशा से लगभग 10 किमी. की दूरी पर स्थित है | सांची मध्य प्रदेश के रायसेन ज़िले में स्थित एक छोटा सा गाँव है। इस साँची स्तूप को प्रेम, शांति, विश्वास और साहस का प्रतीक भी माना जाता है। सांची स्तूप और उसके आस पास चारों तरफ बने बड़े द्वार और साथ ही उन पर की गई मूर्तिकारी नक्काशी भारत की प्राचीन वास्तुकला तथा मूर्तिकला में सर्वोत्तम स्थानों में एक है। बोद्ध धर्म में अभिलेख का प्रचलन है तथा सांची से मिलने वाले अभिलेखों में इस स्थान को 'काकनादबोट' नाम से बतया गया है।
बनावट में सांची स्तूप का व्यास 36.5 मीटर और इसकी ऊंचाई लगभग 21.64 मीटर है | वास्तव में यह सम्राट अशोक की विरासत है, सम्राट अशोक बौद्ध धर्म का पालन करने लगे थे और वो बोद्ध हो चुके थे, इसलिए सांची स्तूप को बौद्ध धर्म से जोड़कर देखा जाता है।

\u0905\u0936\u094b\u0915 \u0938\u094d\u0924\u0902\u092d साँची में स्थित अशोक स्तंभ (Wikimedia Commons)





सांची में ही क्यों स्थित है यह स्तूप :

इतिहासकारों के अनुसार इस स्तूप को सांची में इसलिए बनवाया गया क्योंकि सम्राट अशोक की पत्नी भले ही विदिशा के एक बड़े व्यापारी की बेटी थीं, लेकिन उनका संबंध सांची से था। इस प्रकार साँची से सम्राट अशोक का सीधा संबंध था ।


सबसे पुरानी शैल संरचना में एक हे साँची :

आप को बता दे कि सांची स्तूप खास इसलिए भी है क्योंकि इसे देश की सबसे पुरानी शैल संरचना माना जाता है। सांची में स्थित स्तूप संख्या-1 या 'महान स्तूप' भारत की सबसे पुरानी शैल संरचना है । स्तूप के चारों ओर बने सुंदर तोरण द्वार पर बनी खूबसूरत कलाकृतियों को भी भारत की प्राचीन और सर्वोत्तम उदाहरणों में से एक माना जाता है।

यह भी पढ़ें : विश्व का सबसे ऊंचा शिवलिंग भोजेश्वर मंदिर भोजपुर

पहुँच मार्ग :

साँची पहुँचने के लिए हवाईजहाज से भी जाया जा सकता है , नजदीकी हवाई अड्डा भोपाल एयरपोर्ट है | साथ ही रेल्वे लाइन से भी यहाँ आसानी से आना जाना किया जा सकता है भोपाल झाँसी रेल मार्ग पर साँची नाम का एक छोटा रेल्वे स्टेशन भी है । सड़क मार्ग से भी साँची देश के किसी भी कोने से पंहुचा जा सकता है ।

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मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित ने कहा कि हमने जेम्स नीशम की गेंदबाजी का आनंद लिया।(IANS)

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\u092e\u0941\u0902\u092c\u0908 \u0907\u0902\u0921\u093f\u092f\u0902\u0938  \u0915\u093e \u0939\u094b\u092e \u0917\u094d\u0930\u093e\u0909\u0902\u0921 मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा ने ईशान किशन की तारीफ (UNSPLASH)

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\u0928\u0930\u094d\u092e\u0926\u093e \u0928\u0926\u0940 ओंकारेश्वर मांधाता , नर्मदा नदी के मध्य द्वीप पर स्थित है। दक्षिणी तट के किनारे पर ममलेश्वर मंदिर स्थापित है । (wikimedia commons)

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