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दुनिया

क्या काम करता है यूएनडीपी

यूएनडीपी के कार्यक्रमों में गरीबी कम करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

यूएनडीपी का चिन्ह (Wikimedia Commons)

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र का वैश्विक विकास नेटवर्क है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की स्थापना 22 नवंबर 1965 को हुई थी। यह राष्ट्रों के बीच तकनीकी और निवेश सहयोग को बढ़ावा देता है और देशों को ज्ञान, अनुभव और संसाधनों से जोड़ता है ताकि लोगों को अपने लिए बेहतर जीवन बनाने में मदद मिल सके। संयुक्त राष्ट्र की विकास एजेंसी के रूप में, यूएनडीपी सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में देशों की मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यूएनडीपी के कार्यक्रमों में गरीबी कम करने, विकासशील देशों में बीमारियों के प्रसार का इलाज और मुकाबला करने के लिए रणनीति विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम लोगों के जीवन की गुणवत्ता को मापने के लिए हर साल मानव विकास सूचकांक रिपोर्ट प्रकाशित करता है। पहला मानव विकास रिपोर्ट 1990 में पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब उल हक और भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन द्वारा लॉन्च किया गया था। तब से लेकर अब तक हर साल यह रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है। मानव विकास सूचकांक प्रमुख क्षेत्रों में देश के प्रदर्शन के आधार पर सभी देशों को रैंक देता है। इन प्रमुख क्षेत्रों में शैक्षिक स्तर, स्वास्थ्य की स्थिति और एक सभ्य जीवन स्तर शामिल हैं। मानव विकास सूचकांक में 0 से 1.0 के पैमाने पर देश को रैंक किया जाता है, जिसमें 1.0 उच्चतम मानव विकास है।


- मानव विकास सूचकांक के स्वास्थ्य पहलुओं को किसी देश में जीवन प्रत्याशा, शिशु मृत्यु दर से मापा जाता है। इसमें यह भी देखा जाता है कि क्या लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है या नहीं।
- शैक्षिक स्तर को बच्चों की स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्षों से मापा जाता है। इसमें यह भी देखा जाता है कि क्या उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है।
- तीसरे प्रमुख क्षेत्र में यह देखा जाता है कि किसी भी देश के लोगों की प्रति व्यक्ति आय कितनी है। क्या उस देश के लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिल रही हैं। इन तीनों मापदंडों की गणना के बाद रैंक दी जाती है।

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संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा तैयार किए गए मानव विकास सूचकांक 2020 में 189 देशों में से भारत 131वें स्थान पर है। इससे साफ जाहिर होता है कि भारत को कितनी प्रगति करने की आवश्यकता है। जिससे भारत में रहने वाले लोगों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सके और वे जीवन स्तर में भी सुधार ला सके। भारत, नॉर्वे जैसे देश से सीख ले सकता हैं जो मानव विकास सूचकांक 2020 में पहले स्थान पर आया था।

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