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यूजीसी : अब 3 नहीं हर महीने मिलेगी फैलोशिप की राशि

यूजीसी यानी कि यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन ने छात्रों की आर्थिक सहायता हेतु उन्हें दी जाने वाली फैलोशिप और छात्रवृत्ति 3-3 महीने के बजाय प्रति माह के हिसाब से देने का निर्णय लिया है।

छात्रों को नवंबर माह की राशि भेजने की तैयारी की जा रही है। (Unsplash)

यूजीसी यानी कि यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन ने छात्रों की आर्थिक सहायता हेतु उन्हें दी जाने वाली फैलोशिप और छात्रवृत्ति 3-3 महीने के बजाय प्रति माह के हिसाब से देने का निर्णय लिया है। कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न हुए छात्रों के आर्थिक हालात को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। यूजीसी के सचिव रजनीश जैन ने शनिवार को आधिकारिक जानकारी देते हुए कहा, “छात्रों को पहले यह छात्रवृत्ति तीन-तीन महीने के अंतराल पर दी जाती थी, लेकिन अब यह प्रत्येक महीने छात्रों के खाते में भेजी जा रही है। अक्टूबर माह तक की छात्रवृत्ति एवं फैलोशिप की राशि सीधे छात्रों के खाते में ट्रांसफर की जा चुकी है। अब छात्रों को नवंबर माह की राशि भेजने की तैयारी की जा रही है।”

इससे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने शिक्षा मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रम पर एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक ली। इसमें शिक्षा सचिव अमित खरे, स्कूल शिक्षा सचिव अनिता करवाल और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।


यूजीसी की तैयारी

केंद्रीय मंत्री पोखरियाल ने यूजीसी को निर्देश दिया कि सभी छात्रवृत्ति सुनिश्चित की जाएं। फेलोशिप समय पर वितरित की जाए और इसके लिए एक हेल्पलाइन शुरू की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि छात्रों की सभी शिकायतों का तत्काल निवारण किया जाए।

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बीते दिनों इस प्रकार की कुछ शिकायतें सामने आईं, जिनमें कहा गया कि कोविड-19 महामारी के कारण छात्रवृत्ति में देरी हो रही है। छात्रवृत्ति से जुड़ी योजनाओं के तहत भुगतान में अधिक विलम्ब हो रहा है। इस कारण छात्रों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र सरकार ने इस प्रकार की खबरों को खारिज किया है।

इसपर सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने आधिकारिक जानकारी मुहैया कराते हुए कहा , “इन तथ्यों के बारे में स्थिति को स्पष्ट करने के लिए, यह सूचित किया जाता है कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़े वर्गो, अधिसूचित जनजातियों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो जैसे लक्षित समूहों के लिए राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सहयोग से विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं को प्रत्यक्ष रूप से लागू करता है।”

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने कहा, “विभाग ने कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत भुगतान के दिशा-निदेर्शो का कठोरता से पालन किया है, ताकि लाभार्थियों को विशेष रूप से कोविड-19 के इस संकट के दौरान किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े। (आईएएनएस)

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अब अयोध्या के संतो में जागने लगी चुनाव राजनीति में आने की जिज्ञासा। (Wikimedia Commons)

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हनुमान गढ़ी मंदिर के पुजारियों में से एक राजू दास और तपस्वी जी की छावनी के परमहंस दास उन प्रमुख संतों में शामिल हैं जो अयोध्या (सदर) विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। वीआईपी विधानसभा क्षेत्र माने जाने वाले अयोध्या सदर से बीजेपी के टिकट के दावेदारों में राजू दास भी शामिल हैं. इसी सीट से बीजेपी के मौजूदा विधायक वेद प्रकाश गुप्ता भी इसी सीट के दावेदार हैं.

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बेंगलुरु से हिंदू बनकर रह रही बांग्लादेशी महिला गिरफ्तार। (IANS)

कर्नाटक पुलिस(Karnataka Police) ने एक 27 वर्षीय बांग्लादेशी अप्रवासी महिला को गिरफ्तार किया है, जो बेंगलुरु(Bengaluru) के बाहरी इलाके में फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफ इंडिया (FRFO) के इनपुट के आधार पर भारत में 15 साल तक हिंदू के रूप में रही, पुलिस ने शुक्रवार को यह भी कहा।

गिरफ्तार बांग्लादेशी महिला की पहचान रोनी बेगम के रूप में हुई है। उसने अपना नाम पायल घोष के रूप में बदल लिया और मंगलुरु के एक डिलीवरी एक्जीक्यूटिव नितिन कुमार से शादी कर ली। पुलिस ने फरार नितिन की तलाश शुरू कर दी है।

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बीते दिनों 'ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल' ने 'करप्शन परेसेप्शन इंडेक्स'(Corruption Perception Index) जारी किया, जिसमें 180 देशों को शामिल किया गया था। आपको बता दें की इस रिपोर्ट के मुताबिक इन 180 देशों में भारत(India) देश का स्थान 85वें स्थान पर है। भारत(India) की स्थिति में पिछले वर्ष के मुकाबले न तो सुधार आया है और न ही स्थिति बिगड़ी है।

इसके साथ भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान(Pakistan) की हालत बद से बद्तर हो गई है। पाकिस्तान सीपीआई(Corruption Perception Index) की लिस्ट में 124 से गिरकर अब 140वें स्थान पर पहुंच गया है। पाकिस्तान के जैसी ही स्थिति म्यांमार की भी बनी हुई है। आपको बता दें कि पाकिस्तान से भी बुरी हालत बांग्लादेश की है। सबसे खराब श्रेणी की बात करें तो सबसे खराब हाल 180वें स्थान पर दक्षिणी सूडान का है, उससे पहले सीरिया, सोमालिया, वेनेजुएला और यमन का है।

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