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राजनीति

मुख्यमंत्री बोले, ‘देश विरोधी नारे लगाने वाले विपक्ष का चेहरा होगा बेनकाब’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश विरोधी नारे लगाने वाले विपक्ष का चेहरा बेनकाब करना होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी विपक्ष पर जम कर बरसे।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ । (WikiMedia Commons)

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश विरोधी नारे लगाने वाले विपक्ष का चेहरा बेनकाब करना होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी विपक्ष पर जम कर बरसे। उन्होंने कहा कि हमें देश विरोधी विपक्ष का चेहरा बेनकाब करना होगा। आतंकवादियों के शुभचिंतक विपक्ष की नकारात्मकता से लोगों को बचाना होगा। योगी ने कहा कि लव जेहाद के खिलाफ हमने कदम उठाया तो विपक्ष को परेशानी हो रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को विपक्ष के भ्रम और छल से सतर्क रहने की नसीहत दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को विपक्ष की नकरात्मकता से बचाना होगा। याद रखिये कोरोनाकाल में ये चेहरे कहीं नहीं दिखाई दिए। ये लोग अपने अपने स्तर पर सिर्फ भ्रम की स्थिति पैदा करके नकरात्मक स्थितियां पैदा कर रहे थे। विपक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कैसे बयानबाजी कर रहा है। इसे लोगों को बताना होगा। मतांतरण के मुद्दे पर मूकबधिर बच्चों को टूल बनाकर, उन्हें अपनी ही व्यवस्था के खिलाफ खड़ा करके भयानक स्थितियां पैदा करने की कुत्सित चेष्टा कर रहे थे।


उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। (Social media )

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर भाजपा का एजेंडा हमेशा देश सर्वोपरि रहा है। वहीं विपक्षी द्वारा देश की सुरक्षा को लेकर गलत बयानबाजी की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोग जिहादी एजेंडे के तहत मूक बधिर बच्चों को निशाना बना रहे थे और साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ रहे थे। ये मामूली घटना नहीं थी बहुत बड़ी साजिश रची जा रही थी। समाजवादी पार्टी राजनीति के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करने से नहीं चूक रही। कल आगरा में सपा कार्यकर्ताओं ने देश विरोधी नारेबाजी की। यही उनकी असलियत है। पहले भी आतंक में संलिप्त लोगों पर से समाजवादी पार्टी ने मुकदमे वापस लेने में अपनी सहमति जताई थी।

योगी ने कहा कि लव जिहाद के खिलाफ हमने कदम उठाया तो इनको परेशानी हो रही है। हमको लोगों को बताने की जरूरत है कि ये जो कह रहे हैं वो क्या है, हमें इनके चेहरे बेनकाब करने होंगे।

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योगी ने कहा कि 4 वर्ष पहले गांव गरीब किसान, नौजवान, महिलाएं सरकार के एजेंडे में नहीं होते थे। ये सिर्फ वोटबैंक तक सीमित होते थे। लेकिन इनके लिए जो योजनाएं बनीं उसका परिणाम सामने आ रहा है। आज एक क्लिक पर पैसा गरीब के खाते में जा रहा है। बैंक में भीड़ होती है। हमने किसी की जाति, मजहब नहीं देखा। सबको आवास, सबको समान विद्युत आपूर्ति हो रही है। (आईएएनएस-PS)

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आईपीएल में रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) का एक मैच (wikimedia commons)

भारत के क्रिकेट टीम के कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने एक के बाद टीम से अपनी कप्तानी छोड़ने का जैसे ऐलान किया वैसे हि , उनके चाहने वाले , प्रशंसकों और साथी खिलाडियों ने अपनीं प्रतिक्रिया देना शुरू कर दी । इसी बीच दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज डेल स्टेन का कहना है कि आईपीएल की टीम का नेतृत्व करने का दबाव और युवा परिवार का होना रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) के कप्तान विराट कोहली के इस आईपीएल के बाद टीम की कप्तानी छोड़ने के फैसले का कारण हो सकता है। आरसीबी की टीम की और से रविवार की देर रात यह घोषणा की गई , कि विराट कोहली आईपीएल 2021 सीजन के बाद टीम की कप्तानी छोड़ देंगे । इस के पहले कोहली ने कुछ दिन पहले ही टी20 विश्व कप के बाद भारतीय टीम के टी20 प्रारूप की कप्तानी छोड़ने का भी फैसला किया था।


डेल स्टेन ने आगे कहा कि, " विराट कोहली आरसीबी टीम के साथ शुरू से जुड़े हैं। मुझे नहीं पता, जैसे-जैसे जीवन आगे बढ़ता है आप चीजों को प्राथमिकता देने लगते हैं। कोहली का नया यूवा परिवार है । उन्हें अपनी पर्शनल लाइफ भी देखना है ।
डेल ने यह भी कहा कि , "हो सकता है, उस जिम्मेदारी (कप्तानी) से थोड़ा सा त्याग करना और सिर्फ अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होना उनके करियर के लिए इस समय एक अच्छा निर्णय है।"

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दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन (wikimedia commons)

दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी में शुमार अमेजन को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है । द मॉर्निग कॉन्टेक्स्ट की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन ने भारत में अपने कानूनी प्रतिनिधियों के आचरण की जांच शुरू कर दी है। एक व्हिसलब्लोअर शिकायत के आधार पर यह जांच हुई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि अमेजन द्वारा कानूनी शुल्क में भुगतान किए गए कुछ पैसे को उसके एक या अधिक कानूनी प्रतिनिधियों द्वारा घूस में बदल दिया गया है।

काम करने वाले दो लोगों ने जो कि अमेजन की इन-हाउस कानूनी टीम के साथ है , उन्होंने मिलकर पुष्टि की कि अमेजन के वरिष्ठ कॉर्पोरेट वकील राहुल सुंदरम को छुट्टी पर भेजा गया है। एक संदेश में उन्होंने कहा, "क्षमा करें, मैं प्रेस से बात नहीं कर सकता।" हम स्वतंत्र रूप से यह पता नहीं लगा सके कि आंतरिक जांच पूरी हो चुकी है या प्रगति पर है।

कई सवालों के एक विस्तृत सेट के जवाब में, अमेजन के प्रवक्ता ने कहा, "भ्रष्टाचार के लिए हमारे पास शून्य सहनशीलता है। हम अनुचित कार्यो के आरोपों को गंभीरता से लेते हैं, उनकी पूरी जांच करते हैं, और उचित कार्रवाई करते हैं। हम विशिष्ट आरोपों या किसी की स्थिति पर इस समय जांच या टिप्पणी नहीं कर रहे हैं इस समय जांच।"

\u0911\u0928\u0932\u093e\u0907\u0928 \u0930\u093f\u091f\u0947\u0932\u0930 \u0905\u092e\u0947\u091c\u0928 दुनिया की सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन कंपनी का लोगो (wikimedia commons)

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भारतीय जनता पार्टी भाजपा का चुनावी चिन्ह (wikimedia commons)

अभी-अभी भारत के पंजाब राज्य में एक बड़ी राजनेतिक घटना घटी जब वंहा का मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और सत्ता दल पार्टी ने राज्य ने नया मुख्यमंत्री बनाया । पंजाब में एक दलित को मुख्यमंत्री बना कर कांग्रेस ने एक बड़ी सियासी चाल खेल दी है। अब कांग्रेस इसका फायदा अगले साल होने जा रहे राज्यों के विधानसभा चुनाव में उठाने की रणनीति पर भी काम करने जा रही है । उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सियासी पारे को गरम कर दिया है कांग्रेस की इस मंशा ने।

कांग्रेस नेता हरीश रावत जो कि पंजाब में दलित सीएम के नाम का ऐलान करने वाले वो उत्तराखंड से ही आते हैं, अतीत में प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और आगे भविष्य में भी सीएम पद के दावेदार हैं, इसलिए बात पहले इस पहाड़ी राज्य के सियासी तापमान की करते हैं। साढ़े चार साल के कार्यकाल में भाजपा राज्य में अपने दो मुख्यमंत्री को हटा चुकी है और अब तीसरे मुख्यमंत्री के सहारे राज्य में चुनाव जीतकर दोबारा सरकार बनाना चाहती है। इसलिए भाजपा इस बात को बखूबी समझती है कि हरीश रावत उत्तराखंड में तो इस मुद्दें को भुनाएंगे ही।

बात करे उत्तराखंड राज्य कि तो यहा पर आमतौर पर ठाकुर और ब्राह्मण जाति ही सत्ता के केंद्र में रहती है, लेकिन अब समय बदल रहा है राजनीतिक दल भी दलितों को लुभाने का विशेष प्रयास कर रहे हैं। दरअसल, उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है , जिसमें 13 सीट अनुसूचित जाति और 2 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। मसला सिर्फ 13 आरक्षित सीट भर का ही नहीं है। उत्तराखंड राज्य के 17 प्रतिशत से अधिक दलित मतदाता 22 विधानसभा सीटों पर जीत-हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इसके साथ ही कुल 36 सीटों पर जीत हासिल करने वाली पार्टी राज्य में सरकार बना लेती है।

brahmin in uttrakhand उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है (wikimedia commons)

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