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देश

यूपी में किसकी बनेगी सरकार?

उत्तर प्रदेश चुनाव में सारी पार्टी अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करेगी

प्रधानमंत्री मोदी के साथ योगी आदित्यनाथ (Wikimedia Commons)

जैसे जैसे उत्तर प्रदेश चुनाव की तारीख़ करीब आ रही है वैसे ही प्रदेश सियासत गर्माती जा रही है। 2017 में हुए चुनाव में बीजेपी ने सभी विपक्षी दलों का पत्ता कट कर दिया था। 300 से ऊपर सीट जीतने के बाद बीजेपी ने सभी विरोधियों के मुँह पर टाला लगा दिया था। सभी दलों के लिए 2022 का चुनाव खासा अहम होने वाला है। लेकिन सत्ता परिवर्तन के लिए एक मजबूत विपक्ष का होना बहुत महत्वपूर्ण होता है, जो कि अभी तक नज़र नहीं आ रहा है। जिसकी वजह से बीजेपी अभी तक चैन की सांस ले रही है।


इस बार वोट का सिक्का बीजेपी के पक्ष में भी जा सकता है और विपक्ष के पक्ष में भी। राम मंदिर का निर्माण उस समय शुरू हुआ जब सत्ता में बीजेपी की सरकार मौजूद थी। इस फैसले से उत्तर प्रदेश में एक समुदाय खुश था तो कुछ न खुश। ''लव जिहाद'' के ऊपर बनाया गया कानून भी कुछ इसी प्रकार का नतीजा दे सकता है। धर्म परिवर्तन का मुद्दा हर एक चुनाव में उठाया जाता है, जिसके कारण इसकी अहम भूमिका है।



हाल ही में पारित हुआ ओबीसी विधेयक भी उत्तर प्रदेश चुनाव में अपना योगदान दे सकता है। यह इनता प्रभावशाली विधेयक है कि इसके विरोध में कोई दल खड़ा नहीं होना चाहेगा। लगभग सभी ने ही इसका समर्थन किया है। इसकी वजह से भी मतदाताओं का झुकाव बीजेपी की तरफ हो सकता है। इसके अलावा विपक्षी दलों के पास हाथरस कांड के सिवाय कोई ऐसा मुद्दा नहीं दिख रहा है जिसके बलबूते वह उत्तर प्रदेश सरकार को घेर सके। 2017 के चुनाव में नरेंद्र मोदी की वजह से बीजेपी की झोली में वोट आए थे। लेकिन इस बार शायद हमें वैसा होते न दिखें। क्योंकि किसान आंदोलन, पेट्रोल की बढ़ती कीमतें और पेगासस मुद्दे की वजह से प्रदेश में बीजेपी की छवि को हानि पहुंची है।

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नेतृत्व की कमी- पिछले कुछ समय के जैसे ही इस बार भी विपक्ष में नेतृत्व की कमी साफ झलक रही है। शायद वही पुराने चेहरे विपक्ष के लिए चुनाव में बाधा बन सकते हैं। और एक बार फिर बीजेपी को सरकार बनाने का मौका मिल सकता है। पश्चिम बंगाल में हार का सामना करने के बाद बीजेपी उत्तर प्रदेश में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहेगी। सूत्रों से ऐसी खबर है कि इस चुनाव में बीजेपी बड़े चेहरों के साथ उतरेगी। कांग्रेस भी उत्तर प्रदेश सरकार को घेरने में लगी हुई है। लेकिन ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है कि इन चुनावों में वह कोई छाप छोड़ सकेगी।

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ओप्पो कथित तौर पर जल्द ही अपना पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन लॉन्च करने की योजना बना रहा है। [Wikimedia Commons]

ओप्पो (Oppo) कथित तौर पर जल्द ही अपना पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन लॉन्च करने की योजना बना रहा है। अब एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हैंडसेट को फाइन्ड एन 5जी कहा जा सकता है। टिपस्टर डिजिटल चैट स्टेशन के अनुसार, आगामी फोल्डेबल स्मार्टफोन का नाम फाइन्ड एन 5जी होगा। इसमें एक रोटेटिंग कैमरा मॉड्यूल भी हो सकता है जो उपयोगकर्ताओं को मुख्य सेंसर का उपयोग करके उच्च-गुणवत्ता वाली सेल्फी क्लिक करने की अनुमति देगा।

ऐसा कहा जा रहा है कि यह फोन 7.8 से 8.0 इंच की ओएलईडी स्क्रीन 2के रिजॉल्यूशन और 120हट्र्ज की रेफ्रेश रेट के साथ है। डिवाइस में साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट रीडर होने की संभावना है। हुड के तहत, यह स्नैपड्रैगन 888 मोबाइल प्लेटफॉर्म द्वारा संचालित होगा।

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विपक्ष के 12 सांसदों को राज्यसभा से निलंबित।(Wikimedia Commons)

संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन विपक्ष के 12 सांसदों को राज्यसभा(Rajya Sabha) से निलंबित(Suspended) किया गया है। अब ये 12 सांसद संपूर्ण सत्र के दौरान सदन नहीं आ पाएंगे। निलंबित सांसद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, भाकपा, माकपा और शिवसेना से हैं। अब आप लोग सोच रहे होंगे संसद का आज पहला दिन और इन सांसदो को पहले दिन ही क्यों निष्कासित कर दिया गया?

इस मामले की शुरुआत शीतकालीन सत्र से नहीं बल्कि मानसून सत्र से होती है। दरअसल, राज्यसभा(Rajya Sabha) ने 11 अगस्त को संसद के मानसून सत्र के दौरान सदन में हंगामा करने वाले 12 सांसदों को सोमवार को संसद के पूरे शीतकालीन सत्र के लिए निलंबित कर दिया। ये वही सांसद हैं, जिन्होंने पिछले सत्र में किसान आंदोलन(Farmer Protest) अन्य कई मुद्दों को लेकर संसद के उच्च सदन(Rajya Sabha) में खूब हंगामा किया था। इन सांसदों पर कार्रवाई की मांग की गई थी जिस पर राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू को फैसला लेना था।

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मस्क ने कर्मचारियों से टेस्ला वाहनों की डिलीवरी की लागत में कटौती करने को कहा। [Wikimedia Commons]

टेस्ला के सीईओ एलन मस्क (Elon Musk) ने कर्मचारियों से आग्रह किया है कि वे चल रहे त्योहारी तिमाही में वाहनों की डिलीवरी में जल्दबाजी न करें, लेकिन लागत को कम करने पर ध्यान दें, क्योंकि वह नहीं चाहते हैं कि कंपनी 'शीघ्र शुल्क, ओवरटाइम और अस्थायी ठेकेदारों पर भारी खर्च करे ताकि कार चौथी तिमाही में पहुंचें।' टेस्ला आम तौर पर प्रत्येक तिमाही के अंत में ग्राहकों को कारों की डिलीवरी में तेजी लाई है।

सीएनबीसी द्वारा देखे गए कर्मचारियों के लिए एक ज्ञापन में, टेस्ला के सीईओ (Elon Musk) ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से जो हुआ है वह यह है कि 'हम डिलीवरी को अधिकतम करने के लिए तिमाही के अंत में पागलों की तरह दौड़ते हैं, लेकिन फिर डिलीवरी अगली तिमाही के पहले कुछ हफ्तों में बड़े पैमाने पर गिर जाती है।'

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