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मनोरंजन

विद्या बालन: मैंने बॉलीवुड की रूढ़ियों को चुनौती दी

विद्या बालन ने अपनी भूमिकाओं से बॉलीवुड की रूढ़ियों को बार-बार चुनौती दी है, अपने किरदारों को दमदार अभिनय के साथ जिया है.

42 वर्षीय अभिनेत्री का कहना है कि किसी किरदार से प्रभावित नहीं होना मुश्किल है। [Vidya Balan, Instagram]

विद्या बालन ने अपनी भूमिकाओं से बॉलीवुड की रूढ़ियों को बार-बार चुनौती दी है, अपने किरदारों को दमदार अभिनय के साथ जिया है। अभिनेत्री का कहना है कि यह ऐसा कुछ नहीं था जो उन्होंने होशपूर्वक किया।

जब से उन्होंने 2005 में ‘परिणीता’ के साथ बॉलीवुड में अपनी शुरूआत की, विद्या ने ‘भूल भुलैया’, ‘नो वन किल्ड जेसिका’, ‘द डर्टी पिक्च र’, ‘पा’, जैसी फिल्मों में अपने काम से हिंदी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘कहानी’, ‘इश्किया’, ‘मिशन मंगल’, ‘तुम्हारी सुलु’ और ‘शकुंतला देवी’। वह अगली बार ‘न्यूटन’ निर्माता अमित मसुरकर की ‘शेरनी’ में दिखाई देंगी, जो उन्हें एक वन अधिकारी के रूप में पेश करेगी।


राष्ट्रीय पुरस्कार और पद्मश्री से नवाजी गई विद्या ने कहा, “मैं रूढ़िवादिता को तोड़ने के लिए तैयार नहीं थी, लेकिन मुझे लगता है कि जीवन में अपने अनुभवों के माध्यम से, विशेष रूप से एक अभिनेता के रूप में, मैंने महसूस किया है कि मैं अपने रास्ते में कुछ भी आने नहीं दूंगी।”

42 वर्षीय अभिनेत्री ने आगे कहा, “तो अगर आप मुझे बताते हैं कि मैं एक अभिनेता होने के लिए बहुत छोटी हूं और बहुत मोटी हूं। मैं बहुत बोल्ड हूं, बहुत बेशर्म या बहुत बुद्धिमान हूं या जो भी हूं , मैं सिर्फ रेन्डम बातें कह रही हूं, मैं नहीं बदल सकती कि मैं कौन हूं लेकिन मैं अभी भी अपना रास्ता खोज सकती हूं।”

उन्होंने कहा, “मैं जो करती हूं उसके लिए मैंने खुद में जुनून देखा है क्योंकि मैं वास्तव में अपने बारे में कुछ भी नहीं बदल सकती, इसलिए मैंने रूढ़ियों को तोड़ने के लिए खुद को तैयार नहीं किया। मैंने सिर्फ इतना कहा कि अगर यह काम नहीं करता है, तो बहुत बुरा है इसे काम करना होगा, क्योंकि मैं इसके लिए काम करने जा रही हूं। इसे काम करना है क्योंकि मैं एक अभिनेता बनना चाहती हूं।”

16 साल की उम्र में सिटकॉम ‘हम पांच’ में अभिनय किया और सिटकॉम में राधिका की भूमिका निभाई. (Vidya Balan, Instagram)

अभिनेत्री, जिसने 16 साल की उम्र में सिटकॉम ‘हम पांच’ में अभिनय किया और सिटकॉम में राधिका की भूमिका निभाई, ‘एक सचेत दिमाग के साथ स्टीरियोटाइप को चुनौती नहीं दी।’

उन्होंने कहा “तो, मुझे लगता है कि उन रूढ़ियों को जानबूझकर नहीं बल्कि शायद अनजाने में चुनौती दी गई थी।”

वर्तमान में, वह ‘शेरनी’ की रिलीज का इंतजार कर रही है, जहां वह पितृसत्तात्मकसमाज द्वारा निर्धारित सामाजिक बाधाओं और अपने विभाग के भीतर कमजोर रवैये से जूझ रही एक ईमानदार वन अधिकारी की भूमिका निभाती है।

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‘हम में से हर एक शेरनी है, लेकिन यह कहलाना बहुत अच्छा लगता है!’ वह मुस्कुराई, और आगे कहा, “वे सभी महिलाएं हैं जो अपने काम से अपनी पहचान बनाती हैं। वे अपने काम के प्रति बहुत भावुक हैं, क्योंकि मुझे लगता है कि मैं भी वह महिला हूं। इसलिए, मैं इन पात्रों की ओर बढ़ रही हूं। मुझे उद्देश्य वाली महिलाएं पसंद हैं और इसलिए मैं उन्हें चुनती हूं।”

विद्या ने आगे कहा, “जितना अधिक मैं अपने चारों ओर देखती हूं, हम में से ज्यादा से ज्यादा उस उद्देश्य को ढूंढ रहे हैं, अपने सपनों को जी रहे हैं। मुझे लगता है कि यह हमारे आसपास की दुनिया में क्या हो रहा है इसका भी प्रतिबिंब है क्योंकि सिनेमा वास्तविकता का प्रतिबिंब है। “

‘शेरनी’ 18 जून को अमेजन प्राइम वीडियो पर डिजिटल रिलीज के लिए तैयार है।[आईएएनएस:PKN]

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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