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थोड़ा हट के

एक ऐसी बर्फीली बस्ती जहाँ रहने के लिए आपको पहले सर्जरी करानी होगी

अंटार्कटिका की गोद में स्थित 'विलास लास एस्ट्रेलास' नाम से एक जगह है, जहाँ रहने के लिए आपको पहले अपने अपेंडिक्स को निकलवाना पड़ेगा।

विलास लास एस्ट्रेलास। (Wikimedia Commons)

सोचिए कि अगर आपको किसी इलाके में गुज़र बसर के लिए, पहले अपने अपेंडिक्स को निकलवाना पड़े ! तो क्या आप वहां रहना पसंद करेंगे ?

संभवतः इस सवाल ने आपको हैरत में डाल दिया होगा। पर आप यह जान कर और भी हैरान हो जाएंगे कि अंटार्कटिका की गोद में स्थित ‘विलास लास एस्ट्रेलास‘ नाम की ऐसी जगह सच में मौजूद है।


लगभग 100 लोगों की आबादी

आम तौर पर वहां वैज्ञानिकों और सैनिकों का आना जाना लगा रहता है। मगर वहां कुछ वैज्ञानिकों की टुकड़ी, चिली की वायु सेना और थल सेना के लोग अपने परिवार जनों के साथ लम्बे समय से रह रहे हैं। चारों ओर बर्फ से घिरी इस बस्ती की आबादी लगभग 100 लोगों की है।

यह भी पढ़ें – शब्दों के हवाले से संस्कृत की संस्कृति को एक नई दिशा

न्यूनतम सुविधाओं के बीच जीवन

विलास लास में कोई खास सुविधा के प्रबंध नहीं हैं। न्यूनतम सुविधाओं के अंतर्गत एक स्कूल, चर्च, अस्पताल और कुछ अन्य सहूलियत वाली सेवाएं उपलब्ध हैं। स्कूल में बुनियादी शिक्षा दी जाती है , और अस्पताल में केवल गिने-चुने डॉक्टर्स हैं। अस्पताल में कोई बड़ी बिमारी का इलाज या सर्जरी को अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सकता। इसी वजह से वहां रहने से पूर्व, अपेंडिक्स को निकलवाने की सलाह दी जाती है।

‘विलास लास एस्ट्रेलास’ का औसत तापमान , आम तौर पर -2.3 डिग्री रहता है। सर्दियों में यही तापमान -47 डिग्री तक गिर जाता है।

विलास लास बस्ती के समीप एक रूसी चर्च मौजूद है। (Wikimedia Commons)

एकांत में बसे होने की वजह से ज़रूरत का कोई भी सामान सेना के हवाई जहाज की सहायता से यहाँ लैंड करवाया जाता है। बाहरी दुनिया से संपर्क साधने के लिए काफी सीमित कनेक्शंस हैं।

बर्फीली पहाड़ियों और सर्द हवाओं के बीच किसी माँ को अपने बच्चे को जन्म देने का सुख अत्यंत निराशाजनक हो सकता है।

अंग्रेज़ी में खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें – Lachit Divas: Untold Story Of Hero Lachit Borphukan

कुछ और रोचक बातें

अकसर वहां पेंगुइनस को खुले में घूमते देखा जा सकता है।

सैनिक परिवार एक दूसरे के साथ हैलोवीन जैसे त्योहारों को बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं।

घरों में उन लोगों की तस्वीरें देखी जा सकती हैं, जो कभी उस जगह पर आए थे। इस सन्दर्भ में आपको वहां स्टीफन हॉकिंग की भी एक तस्वीर देखने को मिल जाएगी।

बर्फ से ढकी ज़मीन पर इधर से उधर जाने के लिए भारी वाहनों को इस्तेमाल में लाना पड़ता है।

रात में ‘विलास लास एस्ट्रेलास’ कुछ इस तरह का दिखता है। (Wikimedia Commons)

इन सब चुनौतियों से गुज़रते हुए वहां रह रहे लोगों ने खुद को वहां की जटिल परिस्थितियों का आदी बना लिया है। अब वहां की आबादी, हालातों के साथ बहती हुई, हर पल को चैन से जी रही है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता ( wikimedia Commons )

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अल्लू अर्जुन की नई फिल्म 'अला वैकुंठपुरमुलु' हिंदी में जल्द होगी रिलीज ( wikimedia commons )


हाल ही में रिलीज़ हुई अल्लू अर्जुन की फ़िल्म 'पुष्पा: द राइज़' को दर्शकों ने काफ़ी पसंद किया इस फ़िल्म के आने के बाद से तमिल फिल्म के अभिनेता अल्लू अर्जुन के प्रशंसकों की संख्या में काफ़ी इज़ाफ़ा हुआ है। लोग उनकी फिल्म को खूब पसंद कर रहे हैं । अब दर्शकों को अल्लू अर्जुन की नई फिल्म 'अला वैकुंठपुरमुलु' को हिंदी में रिलीज होने का इंतजार है। यह फ़िल्म भगवान विष्णु की पौराणिक कहानी से प्रेरित है।
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दिग्गज अभिनेता मनोज बाजपेयी(Manoj Bajpai) के लिए ये साल काफी व्यस्त रहने वाला है क्योंकि वह इस साल कई प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके पास जो प्रतिबद्धताएं हैं वह 2023 के अंत तक ऐसे ही रहने वाली हैं।

साल 2022 राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मनोज बाजपेयी(Manoj Bajpai) के लिए बहुत व्यस्त रहने वाला है क्योंकि वह इस साल राम रेड्डी की बिना शीर्षक वाली फिल्म, कानू भेल की 'डिस्पैच', अभिषेक चौबे की फिल्म और राहुल चितेला की फिल्म जैसे नए प्रोजेक्ट के लिए बैक-टू-बैक शूटिंग करेंगे।


मनोज बाजपेयी ने हाल ही में दो प्रोजेक्ट को खत्म किया है, एक रेड्डी की अभी तक बिना शीर्षक वाली फिल्म के साथ, जिसमें दीपिक डोबरियाल भी हैं। फिल्म की शूटिंग उत्तराखंड की खूबसूरत जगहों पर हुई फिर, उन्होंने कानू बहल द्वारा निर्देशित आरएसवीपी के 'डिस्पैच' को समाप्त किया, जो अपराध पत्रकारिता की दुनिया में स्थापित एक खोजी थ्रिलर है।

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