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देश

कोरोना की तीसरी लहर को लेकर डॉ. वी.के. पॉल कि देशवासियों से अपील- देश को इससे बचाने के लिए मिलाएं हाथ

दुनिया भर में अब तक तीसरी लहर के 3,90,000 कोविड मामलों का उल्लेख करने वाले डेटा का हवाला देते हुए, पॉल ने कहा कि इसे तभी रोका जा सकता है, जब लोग समन्वित तरीके से उपयुक्त प्रोटोकॉल का पालन करें।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉलl (file photo, Wikimedia Commons)

नीति आयोग(NITI Aayog) के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी.के. पॉल ने मंगलवार को भारत के लोगों से COVID19 की तीसरी लहर को रोकने के लिए एक साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। पॉल ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करने के लिए हाथ मिलाना होगा कि तीसरी लहर भारत से न टकराए। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगली लहर आने पर बहुत ज्यादा मामले सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि दुनिया में तीसरी वेव दिखाई दे रही है, हमारे देश में COVID19 तीसरी वेव ना आए इसके लिए हम सब को जुड़ना है।

दुनिया भर में अब तक तीसरी लहर के 3,90,000 कोविड मामलों का उल्लेख करने वाले डेटा का हवाला देते हुए, पॉल ने कहा कि इसे तभी रोका जा सकता है, जब लोग समन्वित तरीके से उपयुक्त प्रोटोकॉल का पालन करें।


भारत में तीसरी लहर से बचने के लिए, पॉल ने यहां एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए, देशवासियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक के दौरान दी गई सलाह का पालन करने के लिए भी कहा, जहां अधिकांश पर्यटकों को कोविड-19 मानदंडों का उल्लंघन करते देखा जा रहा है।

पॉल ने कहा, दुनिया एक तीसरी लहर (कोविड-19 की) देख रही है। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए हाथ मिलाना होगा कि तीसरी लहर भारत से न टकराए। पीएम ने आज स्पष्ट रूप से कहा कि हमें भारत में कब तीसरी लहर आएगी, इस पर चर्चा करने के बजाय हमें तीसरी लहर को दूर रखने पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि तीसरी लहर या अगली लहर खुद नहीं आएगी, यह हम पर निर्भर करता है कि हम इसे देश में फिर से फैलने से कैसे रोकते हैं।

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी.के. पॉल ने भारत के लोगों से कोविड की तीसरी लहर को रोकने के लिए एक साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया [Wikimedia Commons]

पॉल ने कहा कि पीएम मोदी ने दिन में पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की, जिसमें सावधानी बरतने के साथ ही कोविड-उपयुक्त व्यवहार पर प्रधानमंत्री द्वारा जोर दिया गया है। पॉल ने सुझाव दिया कि भारतीयों को इन प्रमुख बिंदुओं का पालन करते हुए तीसरी लहर से बचना होगा।

पॉल ने अगली लहर के प्रसार से बचने के लिए तीन प्रमुख कोविड प्रोटोकॉल के रूप में छह फीट की दूरी, मास्क पहनने और टीकाकरण पर भी जोर दिया।

यह भी पढ़े: कृति खरबंदा ने माना पोल डांस उनकी फिटनेस का हिस्सा ही नहीं, बल्कि मेडिटेशन भी है

उन्होंने आगे देशभर के राज्यों और अन्य अधिकारियों को प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित महामारी के प्रसार को रोकने के लिए नियंत्रण क्षेत्रों को चिह्न्ति करने और कोविड-19 मामलों पर नजर रखने की सलाह दी।

उन्होंने यह भी कहा कि देश में वैक्सीन का उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ रहा है। (आईएएनएस-PS)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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