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ओपिनियन

यथार्थ से अवगत कराने वालों को पाखंड ने पीछे ढकेल दिया

आज पर सवाल उठाने वाले कई हैं किन्तु जो सटीक जवाब दे-दे ऐसा कोई नही। क्यों पाखंड को नया धर्म बनाया जा रहा है? और वह कौन हैं जिनके इशारों पर आतंकियों को नायक बताया जा रहा है?

आधुनिकरण में लिप्त हो रही आज की युवा सोच को अपनी जड़ों को भी याद रखने की ज़रूरत है। (सांकेतिक चित्र, Pixabay)

शिक्षा प्राप्त करने वालों की न तो कोई आयु होती है और न ही कोई धर्म, किन्तु आज शिक्षा देने वाले का धर्म भी देखा जाता और साथ ही साथ उसके पाखंड को भी अपनाया जाता है। आज कुछ गिने-चुने शिक्षक ही स्वेछा और निःस्वार्थ भाव से शिक्षा को दूसरों तक पहुंचाते होंगे, अन्यथा आज की दौड़ केवल नोटों पर जाकर ही थमती है। कुछ महापुरुष ही होंगे जो अपने ज्ञान का प्रसार-प्रचार मुफ्त में और बिना किसी ढोंग करते होंगे।

आज की विडंबना यह है कि जिस बाबा का गला सोने के श्रृंगार से भरा हुआ है और जो सोने के सिंघासन पर बैठकर रटी-रटाई बातों को ज्ञान कह कर दूसरों में बाँट रहा है, उसे लोग महात्मा कहते हैं। और जो केवल दो जोड़ी वस्त्र में शास्त्रों का ज्ञान रखता है उन्हें हम जोगी कह कर दूर कर देते हैं। अब हाल यह है कि हाथ की सफाई को लोग भगवान की कृपा मानते हैं और तो और किसी के झूठे लड्डू को प्रसाद समझ ग्रहण भी करते हैं।


किसी की आस्था या श्रद्धा पर प्रश्न खड़ा करना सरासर गैर-क़ानूनी होगा, किन्तु अंधभक्ति और पाखंड को बढ़ावा देना यह कहाँ तक उचित है? हम एक ऐसे युग में हैं जहाँ आधुनिकरण और नवीकरण अपने चरम पर है, और हर कई इसका हिस्सा बनना चाहता है। किन्तु इन सब बातों में हम अपने अहम सिद्धांतों को ताक पर तो नहीं रख रहे? वामपंथी विचारों में ज़्यादा ओझल तो नहीं हो रहे?

यह भी पढ़ें: भाषा का ज्ञान होना ज़रूरी है, किसी संप्रदाय से जोड़ना नहीं…

यह सवाल इसलिए है कि आज की युवा पीढ़ी में विरोधाभास ज्यादा बढ़ चुका है, संत महात्मा ही नहीं शास्त्रों और ग्रंथों पर भी सवाल उठाया जा रहा है। राम को मिथ्या और अफ़ज़ल गुरु को नायक बता रहा है। देश के प्रख्यात विश्वविद्यालयों में नक्सली सोच का प्रसार-प्रचार हो रहा है। रूढ़िवादी इतिहासकारों द्वारा भारत के इतिहास को मिटाया जा रहा है और हमे उनका गुण-गान करने के लिए कह रहा है जिन्होंने सिर्फ और सिर्फ इस देश को लूटा है।

हम सबको इस सोच और विचारधारा से बचने की ज़रूरत है, हमे अपने आधार को पुनः मजबूत करने की आवश्यकता है और यह किताबों के ज्ञान से या आपस में बात-चीत से नहीं होगा। इस चेतना को हमें जन-जन तक पहुँचाना है। भावी-भविष्य को अपने धर्म और इतिहास से जुड़े तथ्यों पर से झूठ का आवरण उतार कर फेकना है। तभी सही सवाल उठेंगे और उसका जवाब देने वाले महापुरुष जन्मेंगे।

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एआईबीए विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भारत की जीत(PIXABAY)

एआईबीए विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप(AIBA World Boxing Championship) में भारत की जीत की लय को आगे बढ़ाते हुए दीपक भोरिया, सुमित और नरेंद्र ने सर्बिया के बेलग्रेड में चल रही चैंपियनशिप के दूसरे दिन शानदार जीत के साथ अपने अभियान को जारी रखा। खिताब के प्रबल दावेदारों में से एक, किर्गिस्तान के अजत उसेनालिव के खिलाफ, दीपक ने 51 किग्रा के शुरूआती दौर के मैच में एक शानदार प्रदर्शन किया। एशियाई चैंपियन उसेनलिव के कुछ प्रतिरोध के बावजूद, 24 वर्षीय दीपक अपनी जीत को सुनिश्चत करने में सफल रहे।

सुमित भी जमैका के मुक्केबाज(Boxing) ओनील डेमन के खिलाफ अपने 75 किग्रा के शुरूआती दौर के मैच के दौरान समान रूप से प्रभावी थे। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ 5-0 से आसान जीत दर्ज की थी। दूसरी ओर, नरेंद्र को अपने पोलिश प्रतिद्वंद्वी ऑस्कर सफरियन से प्लस 92 किग्रा मुकाबले में कुछ कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। हालांकि भारतीय खिलाड़ी ने 4-1 से अपनी जीत दर्ज की।

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एनपीपीए ने 12 डायबिटीज के इलाज के लिए जेनेरिक दवाओं की अधिकतम कीमतें तय करके एक सफल कदम उठाया है-एनपीपीए(Wikimedia commons)

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अभिनेता-राजनेता पवन कल्याण ने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश एक ड्रग हब बन गया है। (Wikimedia Commons )

बुधवार को अभिनेता-राजनेता पवन कल्याण(Pawan Kalyan) ने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश राज्य से देश के विभिन्न हिस्सों में 'गांजा'(मारिजुआना) की आपूर्ति के साथ देश का ड्रग हब बन गया है। जन सेना नेता ने ट्विटर पर दावा किया कि आंध्र प्रदेश एक ड्रग हब बन गया है और हर स्तर पर कई नशीले पदार्थों से भरा है।

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