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देश

बिहार में इथेनॉल उत्पादन के लिए क्या हो रहे हैं प्रयास? पढ़िए यह रिपोर्ट

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को राज्य में इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना को प्राथमिकता में रखते हुए कार्य करने का निर्देश अधिकारियों को दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में इथेनॉल उत्पादन की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इथेनॉल उत्पादन भी बिहार का ही आइडिया है। मुख्यमंत्री कुमार ने उद्योग विभाग

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को राज्य में इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना को प्राथमिकता में रखते हुए कार्य करने का निर्देश अधिकारियों को दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में इथेनॉल उत्पादन की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इथेनॉल उत्पादन भी बिहार का ही आइडिया है। मुख्यमंत्री कुमार ने उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि राज्य में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग की काफी संभावनाएं हैं।

उन्होंने कहा, “राज्य में इथेनल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अपने पहले ही कार्यकाल में हमलोगों ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था लेकिन उस समय यह स्वीकार नहीं किया गया।” उन्होंने इस पर किए जा रहे कार्य पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि राज्य में इथेनल उत्पादन की काफी संभावनाएं हैं। इथेनल उत्पादन बिहार का ही आइडिया है। उन्होंने अधिाकरियों को इथेनल उत्पादन के लिए गन्ना को प्राथमिकता में रखते हुए कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि इससे गन्ना उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।


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नीतीश ने मक्का से भी इथेनल के उत्पादन के लिए काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कृषि अवशेष से भी इथेनल उत्पादन के लिए आकलन कर उस पर कार्य करने के सुझाव दिए। उन्होंने कहा, “कुशल श्रमिकों के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही पोशाक योजना के तहत बच्चों के लिए पोशाक बनाना, पेवर ब्लॉक के निर्माण को बढ़ावा देने जैसे कई अन्य कार्य को बढ़ावा देने से रोजगार तो बढ़ेगा ही साथ-साथ उनकी आमदनी भी बढ़ेगी।”

उन्होंने अधिकारियों से युवाओं को उच्च प्रशिक्षण की व्यवस्था करने के निर्देश देते हुए कहा कि इससे युवा नया उद्योग अथवा व्यवसाय कर सकेंगे। राज्य में नए उद्योग लगाने वालों को सरकार हरसंभव मदद उपलब्ध कराएगी।बैठक में उप-मुख्यमंत्री रेणु देवी, मुख्य सचिव दीपक कुमार, उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा सहित उद्योग विभाग के अन्य वरीय पदाधिकारी उपस्थित थे। (आईएएनएस)

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बांके बिहारी मंदिर में होली

कहा जाता है कि अगर किसी इंसान को सुकून चाहिए होता है तो उसे वृंदावन या मथुरा की गलियों में जाना चाहिए, क्योंकि इन्ही गलियों में खेलते हुए कृष्ण जी का बचपन बीता हैं। वृंदावन हो या मथुरा यहां हर दूसरा व्यक्ति कृष्ण भक्ति में लीन नज़र आता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की वह हिंदुस्तानी है या कहीं और से आया है। हर कोई कृष्ण की महिमा में डूबा हुआ होता है। वैसे तो वृंदावन में कई मंदिर है जहां हर रोज हज़ारों की संख्या में भक्त आते हैं और अपनी हाजिरी लगवाते हैं, लेकिन बांके बिहारी मंदिर की बात अलग है। यहां भी भक्तों का मेला लगा रहता है, पर हर किसी को कुछ बातें मालूम नहीं है। ऐसे ही कुछ तथ्यों के बारे में इस आर्टिकल में बताया गया है।

1) बांके बिहारी मंदिर की स्थापना स्वामी श्री हरिदास जी ने की थी। वह श्री कृष्ण के भक्त थे और महान गायक तानसेन के गुरु थे। वह अपने गीत से श्री कृष्ण को प्रसन्न करने की कोशिश किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि श्री हरिदास जी की भक्ति से प्रसन्न हो श्री कृष्ण ने दर्शन दिए थे।

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(instagram , virat kohali)

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और अनुष्का

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और उनके फाउंडेशन ने यहां मड, मलाड में आवारा पशुओं के लिए एक ट्रॉमा और रिहेब सेंटर का उद्घाटन किया है। इसके पहले इस साल की शुरूआत में, भारतीय कप्तान कोहली ने कहा था कि वह मुंबई में दो पशु देखभाल सुविधाएं स्थापित कर रहे हैं।
कोहली ने अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा को शहर में आवारा जानवरों के सामने आने वाली कठिनाइयों को देखने का श्रेय दिया।

अभिनेत्री अनुष्का ने कई मौकों पर जानवरों के कल्याण और उनके अधिकारों के प्रति अपना समर्थन दिया है। अनुष्का के जानवरों के प्रति दीवानगी से प्रेरित होकर कोहली अपने फाउंडेशन के जरिए आवारा जानवरों की मदद करने के मौके तलाश रहे हैं।

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भीड़ में चलते लोग।

मौजूदा समय में विश्व की जनसंख्या 7 अरब से भी ज्यादा है। इस जनसंख्या को यहां तक पहुंचने में कई सदियां लग गई है। समस्त विश्व को 1 अरब से 2 अरब तक की आबादी होने में 100 सालों का समय लगा था। लेकिन 2 अरब से 3 अरब होने में मात्र 30 साल लगे, वहीं 3 से 4 अरब होने में 15 साल लगे थे। उसके बाद से यह अंतर और कम हो गया। औद्योगिक क्रांति के बाद अठारहवीं शताब्दी में विश्व जनसंख्या में विस्फोट हुआ था। तकनिकी प्रगति की वजह से मृत्यु दर में गिरावट आई जो कि जनसंख्या विस्फोट का एक बहुत बड़ा कारण बना। भारत में भी जनसंख्या विस्फोट देखा गया था।

1951 में भारत की जनसंख्या मात्र 36.1 करोड़ थी जो 2011 की जनगणना में 121.02 करोड़ हो गई। और अब यह लगभग 135 करोड़ के ऊपर है। अगर किसी क्षेत्र की जनसंख्या बढ़ती है तो उसका मतलब है कि वहाँ का मृत्यु दर कम है और जन्म दर ज्यादा। यह दर्शाता है कि उस जगह पर चिकित्सकीय सुविधाएं अच्छी है। लेकिन बढ़ती जनसंख्या देश के लिए मुसीबत का सबब भी बन सकती है, क्योंकि जनसंख्या में वृद्धि हुई है किन्तु साधनों में नहीं। भारत के साथ भी यही समस्या है। लगातार जनसंख्या बढ़ने से कई जगहों पर साधनों की कमी महसूस होने लगी है।

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