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दुनिया

शांति अभियानों के लिए अधिक सैनिकों की तैनाती के साथ क्या है चीन की मंशा ?

सूत्रों की मानें तो चीन शांति अभियानों के लिए भारत की तुलना में सैनिकों की संख्या को दोगुना करना चाहता है।

वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र मिशनों में तैनाती के मामले में चीन नौवें स्थान पर है। (Unsplash)

By – सुमित कुमार सिंह

संयुक्त राष्ट्र में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए, चीन ने शांति अभियानों के लिए जमीन पर अधिक सैनिकों को तैनात करने की योजना बनाई है। एक शीर्ष सरकारी सूत्र ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। सूत्र ने कहा कि ऐसे मिशनों में भारत की भूमिका को कम करना भी इसका उद्देश्य है।


संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के शांति बनाए रखने वाले अभियानों में वर्तमान में कुल 2,548 चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवान तैनात हैं। अब बीजिंग ने 8,000 अतिरिक्त सैनिकों को अंतर-सरकारी संगठन मिशनों के लिए भेजने की योजना बनाई है।

वे शांति अभियानों के लिए भारत की तुलना में सैनिकों की संख्या को दोगुना करना चाहते हैं।

भारतीय सेना हमेशा मांग में रही है और बहुपक्षीय शांति अभियानों में सेना की तैनाती में सबसे ज्यादा योगदान देती है। वर्तमान में, भारत ने संयुक्त राष्ट्र मिशन के लिए कुल 5,424 कर्मियों को तैनात किया है। अब तक भारत ने संयुक्त राष्ट्र के 71 मिशनों में से 52 में दो लाख सैनिक भेजे हैं।

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सूत्र ने कहा कि वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र मिशनों में तैनाती के मामले में चीन नौवें स्थान पर है और भारत पांचवें स्थान पर है। सैनिकों की तैनाती के मामले में बांग्लादेश का शीर्ष योगदान है। इसने शांति मिशन के लिए 6,726 लोगों को तैनात किया है, इसके बाद जमीन पर 6,725 सैनिकों के साथ इथियोपिया का नंबर आता है। रवांडा संयुक्त राष्ट्र मिशन में 6,363 सैनिकों के साथ तीसरे स्थान पर है और नेपाल 5,714 कर्मियों को भेजकर चौथे स्थान पर है।

एक शीर्ष सूत्र ने कहा, “पीएलए की तैनाती आने वाले वर्षो में कितनी प्रभावी होगी, यह देखने की जरूरत है। क्योंकि वे व्यावसायिकता के मामले में खराब प्रतिष्ठा रखते हैं।”

संयुक्त राष्ट्र मिशनों में तैनाती के मामले में भारत पांचवें स्थान पर है। (Wikimedia Commons)

सूत्रों ने यह भी कहा कि 2016 में चीनी सैनिकों ने प्रतिकूल स्थिति का सामना करने पर दक्षिण सूडान में अपनी पोस्ट का त्याग कर दिया था। दो राजनीतिक समूहों के बीच झड़पों के दौरान उनकी पोस्ट पर हमला किए जाने के बाद वे हजारों नागरिकों की मदद करने में विफल रहे थे।

हालांकि चीन ने आरोपों को खारिज कर दिया था।

इसके अलावा भारतीय सेना की लोकप्रियता पिछले एक दशक से बढ़ रही है और 2018 में पहली बार विदेशी सैनिकों ने लेबनान में एक भारतीय बटालियन के अधीन काम करना शुरू किया। भारतीय सेना के साथ 120 कजाख सेना की टुकड़ी एक ऑपरेशन का हिस्सा है।

सैनिकों का एक जत्था अब दक्षिण सूडान में सेवा देने की तैयारी कर रहा है और महीने के अंत तक मिशन के लिए रवाना हो जाएगा।

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स्टाफ ड्यूटीज में अतिरिक्त महानिदेशक मेजर जनरल एम. के. कटियार ने कहा कि भारत के पास अफ्रीका और मध्य पूर्व के आठ देशों में लगभग 5,500 सैनिक हैं।

उन्होंने कहा, “वे संघर्ष क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए अथक परिश्रम करते हैं।”

संयुक्त राष्ट्र के 13 अभियानों में से, भारतीय सेना का आठ में प्रतिनिधित्व है। भारतीय सेना संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों के लिए लेबनान, दक्षिण सूडान, कांगो और गोलन हाइट्स में अपनी सेना भेजती है। भारत ने महिला अधिकारियों को भी भेजा है। वर्तमान में 104 स्टाफ अधिकारियों में से लगभग 15 महिलाएं मिशन में सेवारत हैं।(आईएएनएस)

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इसके अलावा एक जगह पर तख्तियां लिए हुए, नारेबाजी करते हुए जमा हो गए और बाद में उन्होंने परिसर के अंदर मार्च निकाला। छात्र नेताओं ने मस्जिद(Babri Masjid) के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर भाषण भी दिया। जेएनयूएसयू(Janusu) के उपाध्यक्ष साकेत मून(Saket Moon) ने कहा कि बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण से न्याय मिलेगा। उपाध्यक्ष जी न्याय दिलवाने की बात करके मस्जिद के निर्माण की बात कर रहे हैं, लेकिन शायद वह भूल गए कि राम मंदिर(Ram Mandir) आज सुप्रीम कोर्ट (supreme Court) द्वारा किए गए न्याय पर मिल रहा है।

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