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मनोरंजन

अभिनेताओं के पास अब कुछ ‘हटके’ करने का मौका: नीना गुप्ता

नीना गुप्ता ने अपने किरदार के लिए कहा "ऐसा इसलिए है क्योंकि समय बदल गया है और जिस तरह से लोग स्क्रिप्ट लिख रहे हैं - वह अलग तरह की स्क्रिप्ट है।"

बॉलीवुड अभिनेत्री नीना गुप्ता।(आईएएनएस)

दिग्गज अभिनेत्री नीना गुप्ता को आने वाली फिल्म ‘सरदार का ग्रैंडसन’ में एक उम्रदराज की भूमिका निभाने में कोई हिचक नहीं है। वह कहती हैं कि आजकल फिल्म निमार्ताओं की तरह, अभिनेताओं के पास भी ‘हटके’ चुनने का मौका है।

नीना ने सरदार की भूमिका निभाई है जो दिल से पीएफ गोल्ड वाली एक उग्र बूढ़ी दादी है, जो लाहौर में अपना घर देखना चाहती है। परफेक्ट लुक के लिए एक 61 साल की नीना ने 90 साल के एक व्यक्ति को प्रोस्थेटिक्स की मदद से जिंदा करने की कोशिश की हैं।


अभिनेताओं के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि लोग पुराने पात्रों को चित्रित करने से नहीं कतरा रहे हैं।

नीना ने आईएएनएस से कहा “ऐसा इसलिए है क्योंकि समय बदल गया है और जिस तरह से लोग स्क्रिप्ट लिख रहे हैं – वह अलग तरह की स्क्रिप्ट है। जिस तरह से अभिनेताओं को विभिन्न प्रकार की चीजें मिल रही हैं भूमिकाएं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दर्शक इसे स्वीकार कर रहे हैं, इससे भी मदद मिली है। यह बहुत उत्साहजनक बात है।”

बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन के साथ गुडबाय फिल्म में नीना गुप्ता भी काम करेंगी।(Wikimedia Commons)

उन्हें उम्मीद है कि दर्शकों को फिल्म में उनका रोल पसंद आएगा।

अगर लोग मुझे इस फिल्म में पसंद करते हैं, तो यह मेरे लिए बहुत अच्छी बात होगी और मुझे लगता है कि और भी बहुत से कलाकार होंगे जो ऐसा कुछ करने की हिम्मत रखते होंगे। पहली बात मैंने कहा थ ‘ऐसी बूढ़ी औरत का किरदार नहीं निभाना चाहती’, लेकिन जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी तो मैंने कहा ‘मुझे यह करना है’।”

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अभिनेत्री ने आगे कहा “आजकल, हम अभिनेताओं के पास थोड़ा हटके करने का मौका है। अभिनेता प्रयोग करने में बहुत खुश हैं- जैसे निर्माता, निर्देशक और लेखक प्रयोग कर रहे हैं। यह बहुत अच्छा समय है।”

‘सरदार का ग्रैंडसन’ 18 मई को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने के लिए बिल्कुल तैयार है।(आईएएनएस-SHM)

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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शोधकर्ताओं ने कोविड के खिलाफ लड़ने में कारगर हिमालयी पौधे की खोज। ( Pixabay )

कोविड के खिलाफ नियमित टीकाकरण के अलावा दुनिया भर में अन्य प्रकार की दवाईयों पर अनेक संस्थायें रिसर्च कर रही हैं जो मानव शरीर पर इस विषाणु के आक्रमण को रोक सकती है। इसी क्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं को एक बड़ी सफलता मिली है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक हिमालयी पौधे की पंखुड़ियों में फाइटोकेमिकल्स की खोज की है जो कोविड संक्रमण के इलाज में करगर साबित हो सकती है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के बायोएक्स सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्याम कुमार मसाकापल्ली के तर्ज पर एक वक्तव्य में कहा की, अलग अलग तरह के चिकित्सीय एजेंटों में पौधों से प्राप्त रसायनों फाइटोकेमिकल्स को उनकी क्रियात्मक गतिविधि और कम विषाक्तता के कारण विशेष रूप से आशाजनक माना जाता है। टीम ने हिमालयी बुरांश पौधे की पंखुड़ियों में इन रसायनों का पता लगया है। पौधे का वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम है जिसे वहाँ के स्थानीय लोग अलग अलग तरह की बीमारियों में इसका इस्तेमाल करते हैं।

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