Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
मनोरंजन

जब अजय और इमरान ने लिया था पे कट

मंदी की दशा और बिगड़ गई और मुझे अजय व इमरान दोनों से अनुरोध करना पड़ा कि वे बैक एंड प्रॉफिट शेयर के बदले अपनी फीस में कुछ कटौती कर लें- मिलन

अजय देवगन, बॉलीवुड अभिनेता (Facebook)

निर्देशक मिलन लुथरिया ने कहा है कि साल 2010 में आई हिट फिल्म ‘वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई’ में अभिनेता अजय देवगन और इमरान हाशमी कम पारिश्रमिक पर काम करने को तैयार हो गए थे, क्योंकि उस वक्त आर्थिक मंदी चल रही थी। उन्होंने पुरानी बातों को याद करते हुए कहा, “उस साल अप्रैल में अप्रत्याशित रूप से मुझे एक स्टोरी आइडिया मिली। कहानी अधूरी, लेकिन काफी दिलचस्प थी और मैंने तुरंत बाद फिल्म को साइन कर लिया। मंदी जारी रही और इस मल्टी-स्टारर फिल्म पर काम शुरू करने से पहले इसके बजट पर कई बार समीक्षा की गई।”

यह भी पढ़ें: मैं नकारात्मक किरदार बुद्धिमानी से चुनता हूं: पंकज त्रिपाठी


लुथरिया फिल्म में अजय और इमरान को चाहते थे और अपने इस दृष्टिकोण को वास्तविकता में बदलने के लिए उन्होंने उचित कदम उठाएं।

वह कहते हैं, “मंदी की दशा और बिगड़ गई और मुझे अजय व इमरान दोनों से अनुरोध करना पड़ा कि वे बैक एंड प्रॉफिट शेयर के बदले अपनी फीस में कुछ कटौती कर लें।”

इमरान हाशमी, बॉलीवुड अभिनेता (Facebook)

उन्होंने आगे कहा, “मैं केवल एक शर्त पर इस सोच के साथ आगे बढ़ने पर सहमत हुआ कि मेरी फीस भी आनुपातिक रूप से काटी जाएगी, अन्यथा मेरे लिए एक्टर्स से इस बारे में बात करना अनैतिक होगा।”

इस गैंगस्टर ड्रामा फिल्म में अजय, इमरान, कंगना रनौत, रणदीप हुड्डा और प्राची देसाई जैसे कलाकार मुख्य किरदारों में थे। यह फिल्म 30 जुलाई, 2010 को रिलीज हुई थी।(आईएएनएस)

Popular

इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) [IANS]

दुनिया की अग्रणी हॉस्पिटैलिटी और पाक कला शिक्षा दिग्गजों में से एक, सॉमेट एजुकेशन (Sommet Education) ने हाल ही में देश के प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी संस्थान, इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) के साथ हाथ मिलाया है। इसके साथ सॉमेट एजुकेशन की अब आईएसएच (ISH) में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो पूर्व के विशाल वैश्विक नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण एडिशन है। रणनीतिक साझेदारी सॉमेट एजुकेशन को भारत में अपने दो प्रतिष्ठित संस्थानों को स्थापित करने की अनुमति देती है। इनमें इकोले डुकासे शामिल है, जो पाक और पेस्ट्री कला में एक विश्वव्यापी शिक्षा संदर्भ के साथ है। दूसरा लेस रोचेस है, जो दुनिया के अग्रणी हॉस्पिटैलिटी बिजनेस स्कूलों में से एक है।

इस अकादमिक गठबंधन के साथ, इकोले डुकासे का अब भारत में अपना पहला परिसर आईएसएच (ISH) में होगा, और लेस रोचेस देश में अपने स्नातक और स्नातकोत्तर आतिथ्य प्रबंधन कार्यक्रम शुरू करेगा।

Keep Reading Show less
Credit- Wikimedia Commons

भारतीय रेलवे (Wikimedia Commons)

पूर्व मध्य रेल ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बाद इसके अनुपालन में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। इको स्मार्ट स्टेशन के रूप में विकसित करने के लिए पूर्व मध्य रेल के 52 चिन्हित स्टेशनों पर रेलवे बोर्ड द्वारा सुझाए गए 24 इंडिकेटर (पैरामीटर) लागू किए हैं। सभी 52 स्टेशनों ने पर्यावरण प्रबंधन के लिए एक प्रमाणन आईएसओ-14001:2015 प्राप्त किया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित पूर्व मध्य रेल के 52 नामांकित स्टेशनों में से 45 का संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें के लिए सहमति-से-स्थापित (सीटीई) प्रस्तावों की ऑनलाइन प्रस्तुतियां सुनिश्चित कीं।

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेष कुमार ने बताया कि पूर्व मध्य रेल के सभी 45 स्टेशनों के लिए स्थापना की सहमति के लिए एनओसी प्राप्त कर ली गई है और 32 स्टेशनों को कंसेंट-टू-ऑपरेट (सीटीओ) दी गई है। उन्होंने बताया कि इस प्रमाणीकरण ने पूर्व मध्य रेलवे को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें द्वारा निर्धारित पानी, वायु प्रदूषण नियंत्रण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मानदंडों की आवश्यकता को सुव्यवस्थित करने में मदद की है।

Keep Reading Show less

वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच अब गोरखपुर में भी हो सकेगा। [IANS]

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस समेत अन्य वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच शुरू हो गई है। गोरखपुर (Gorakhpur) में यह इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)की क्षेत्रीय इकाई रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (RMRC) के जरिए संभव हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के प्रयास से शुरू इस आरएमआरसी में नौ अत्याधुनिक लैब्स बनकर तैयार हैं। बता दें कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) इसका उद्घाटन करेंगे।

राज्य सरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार आरएमआरसी (RMRC) की इन लैब्स के जरिये न केवल बीमारियों के वायरस की पहचान होगी बल्कि बीमारी के कारण, इलाज और रोकथाम को लेकर व्यापक स्तर पर वल्र्ड क्लास अनुसंधान भी हो सकेगा। सबसे खास बात यह भी है कि अब गोरखपुर (Gorakhpur) में ही आने वाले समय में कोरोनाकाल के वर्तमान दौर की सबसे चर्चित और सबसे डिमांडिंग जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) भी हो सकेगी। यह पता चल सकेगा कि कोरोना का कौन सा वेरिएंट (Covid variant) अधिक प्रभावित कर रहा है।

Narendra Modi , PM of India, ICMR मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस RMRC का उद्घाटन करेंगे। [Wikimedia Commons]

Keep reading... Show less