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थोड़ा हट के

जब बेटे ने अपने माँ-बाप को लिखा WhatsApp पत्र

भारत में 14 नवंबर को जवाहरलाल नेहरू की याद में और देश में बच्चों के सम्मान, उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए बाल दिवस मनाया जाता है। इसी ख़ास दिन पर एक बेटे ने अपने माँ बाप को एक पत्र लिखा।

(Pixabay)

महामारी की वजह से लगे लॉकडाउन ने रिश्तों में नज़दीकियाँ बढ़ाई या घटाई, यह तो मैं नहीं कह सकता पर हाँ…इसने रिश्तों को समझने का वक़्त ज़रूर दिया है। शायद उसी की बदौलत एक बेटे ने अपने माँ-बाप को WhatsApp पर यह लिखा –

good morning,


हमेशा की तरह फैमिली ग्रुप में पापा का फूलों वाला मैसेज देख कर अच्छा लगा। एडिटिंग थोड़ी और अच्छी हो सकती थी, खैर…आज बाल दिवस है और आप लोगों ने विश भी नहीं किया ? कोई बात नहीं, मैंने भी तो आप लोगों को कभी फादर्स डे या मदर्स डे पर विश नहीं किया और मुझे पापा का जन्मदिन भी तीन में से एक बार ही याद रहता है ! और आई नो, कि मैं अब बच्चा नहीं रहा ,21 साल का हो चुका हूँ। कॉलेज से निकल चुका हूँ, पैरों पर खड़ा भी होना है, पैसे कमाने हैं, शादी करनी है ; लड़की पसंद कर सकता हूँ पर हमारे कास्ट की होनी चाहिए, फलाना ढिमकाना !

पापा आप ही कहते हैं ना कि, “तुम्हारी उम्र में, मैं पैसे कमाने लगा था। अपना सारा काम खुद ही करता था। छोटी से छोटी चीज़ का हिसाब रखता था।” वैसे यह बात तो है , मैंने आपकी हिसाबों वाली डायरी देखी है ; 1 रुपए किलो भिंडी, ढाई रुपए किलो दूध ! पर पापा आप यह क्यों नहीं समझते कि हम दो शरीर हैं, दो अलग अलग परिस्थितियों में पले-बढ़े हैं, अलग-अलग फैसिलिटीज़ मिली हैं हमें, आप गांव से शहर आए, मैं दिल्ली जैसे शहर में ही बड़ा हुआ हूँ, हम दोनों की आदतें अलग हैं, सोच अलग है, सही गलत के पैमाने अलग हैं, सपने अलग हैं, दोस्त अलग हैं, फिर ‘मैं’, ‘आप’ कैसे बन सकता हूँ ?

मम्मी, आपका बात-बात पर मुझसे लड़ जाना, मेरे दोस्तों को कोसना, या आप दोनों का मेरे नाईट आउट के लिए मना कर देना ; यह सब कब तक ? सच है कि आपने यह दुनिया मुझसे ज़्यादा देखी है, पर मैं अपनी छोटी सी दुनिया में रह रहे दोस्तों , लोगों को अच्छे से जानता हूँ। उनके साथ रहने से कुछ बुरा नहीं होगा और हुआ भी तो उसका ज़िम्मेदार मैं खुद रहूँगा, अब मैं बड़ा हो चुका हूँ , है ना ?

(Unsplash)

यह सवाल इसलिए क्योंकि आप लोगों का मुझ पर यकीन ना होना कुछ और ही बताता है। आप लोग मुझे बड़ा कहते तो हैं, पर बड़े लोगों वाली आज़ादी नहीं देते, खुद के फैसले लेने के काबिल नहीं समझते। आपका तर्क रहता है कि मैं लापरवाह हूँ, सच भी है ! उतनी ही सच्चाई इस बात में भी है कि मुझे परवाह है ; अपनी और आप लोगों की भी।

मैं जानता हूँ कि मेरे कॉलेज फीस के लिए लिया गया लोन बहुत ज़्यादा है, जानता हूँ कि पिछले हफ्ते मम्मी की तबियत खराब थी फिर भी उन्होंने चार लोगों के लिए खाना बनाया, जानता हूँ कि भाई अब बड़ा हो चुका है और उसकी पढ़ाई-लिखाई का खर्च भी सर पर है, समझता हूँ कि पापा पिछले आठ सालों से वही पुराने जूते क्यों पहन रहे हैं, समझता हूँ कि मम्मी क्यों मुझसे सब्जियां कटवाती हैं, समझता हूँ कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब मैं आपके कमरे में जाऊंगा और वहां सिर्फ आपकी तस्वीर होगी…आप लोग नहीं !

समझता हूँ …

समझता हूँ कि आप लोगों ने कभी मेरा बुरा नहीं सोचा पर क्या आप यह दावे के साथ कह सकते हैं कि आपने हमेशा मेरे लिए सही सोचा ? आपने कभी मुझे मेरे सपनों के पीछे भागने से नहीं रोका पर क्या आप कुछ सालों बाद भी मुझे बेरोज़गार देख कर चुप बैठेंगे ? किसी को आगे जाने देना और उसके साथ चलने में फ़र्क़ होता है!

उसी दूरी को कम करने की कोशिश में रहता हूँ। बस हर बार कहने कुछ जाता हूँ, कह कुछ और आता हूँ और फिर हमारे बीच तू-तू मैं-मैं शुरू ! आपके त्याग का सम्मान करता हूँ, पर क्या मेरे सम्मान का ख्याल रखना आपका फ़र्ज़ नहीं ?

वैसे…मैसेज पढ़ लिया हो तो…मम्मी…! ज़रा चाय बना देना, आज मैं अपने कमरे में नहीं, आप लोगों के साथ बैठ कर ही चाय पिऊंगा! और हाँ…आज नेहरू अंकल का बर्थडे है, whatsApp स्टोरी डाल देना।

जवाहरलाल नेहरू को बच्चों से काफी स्नेह था। (Wikimedia Commons)

ताली दोनों हाथों से बजती है

व्हाट्सप्प पत्र में लड़के ने माँ बाप के मत को समझने की कोशिश ज़रूर की है, मगर अपने मतलबी ढांचे में रहते हुए। इस पत्र को पढ़ते हुए हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि बच्चा पैदा करना कोई उपलब्धि हो या ना हो, मगर बच्चे को अच्छे से पाल कर बड़ा करना, उपलब्धि भी है और संघर्ष भी। और मुमकिन है कि इसी भार के चलते माँ-बाप सख्त हो जाते हैं , अधिक सतर्क हो जाते हैं। यही अधिक सतर्कता मन-मुटाव को जन्म देती है।

यह भी पढ़ें – मेरा मानसिक स्वास्थ्य, हाय तौबा ज़िंदाबाद !

देखा जाए तो भारत में माँ बाप और बच्चों के बीच मोटे तौर पर इन दिक्कतों को देखा गया है –

1 . फैसले की डोर बच्चों के हाथों में नहीं होती

2 . बच्चों को उनकी प्राइवेसी नहीं मिलती

3 . माँ बाप से दोस्ती का रिश्ता नहीं होता

4 . समाज क्या कहेगा ?

(Unsplash)

समाज कुछ भी कहे। ना तो समाज हमें पालेगा और ना हम उसके बुढ़ापे की लाठी होंगे। जहाँ एक तरफ 20-21 साल में हमारे विचार इतने परिपक्व नहीं होते, वहीं दूसरी ओर उस दौरान हमारे माँ बाप के ख्याल इतने लचीले नहीं होते। यहां ताली दोनों हाथों से बजती है।

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स्मृति ईरानी, महिला एवं बाल विकास मंत्री (Wikimedia Commons)

कोविड-19 में अपने परिवार को खोने वाले अनाथ बच्चों के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (WCD) ने पोर्टल बनाया है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (WCD) के अनुसार जिन्होंने कोविड-19 महामारी के कारण माता-पिता या कानूनी अभिभावक या दत्तक माता-पिता दोनों को खो दिया है, उनके लिए यह योजना शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए सहायता प्रदान करती है और प्रत्येक बच्चे के 18 वर्ष की आयु तक पहुंचने पर उसके लिए 10 लाख रुपये का कोष बनाएगी।

हालांकि इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी (PM Narendra Modi) ने कोविड महामारी के कारण कानूनी अभिभावक या दत्तक माता-पिता दोनों को खो चुके बच्चों का समर्थन करने के लिए पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन (PM Cares For Children) योजना की घोषणा की थी। फिलहाल पोर्टल (Portal) के सम्बंध में महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने जानकारी दी है कि अब तक 5491 आवेदन आ चुके हैं, जिनमें से 3049 आवेदनों को उचित प्रक्रिया के बाद जिलाधिकारियों द्वारा अनुमोदित किया गया है और 483 आवेदन अनुमोदन के लिए लंबित हैं।

Donations For Orphanage, WCD, PM Cares For Children कोविड महामारी में अनाथ हुए बच्चे के लिए 10 लाख रुपये का कोष बनाएगी डब्ल्यूसीडी । [Wikimedia Commons]

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जी. किशन रेड्डी, केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री [Wikimedia Commons]

केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी (G.Kishan Reddy) ने शनिवार को कहा कि भले ही गोवा (Goa) में कोविड (Covid-19) की तीसरी लहर आए या ना आए, लोगों को पर्यटन स्थलों (Tourist places) की यात्रा करनी चाहिए और आवश्यक कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए बैठकों और समारोहों में भाग लेना चाहिए। यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए रेड्डी ने यह भी कहा कि कोविड के ओमिक्रॉन वैरिएंट का प्रसार, भारत में अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों की आवाजाही के लिए एक बाधा साबित हो सकता है।

रेड्डी ने मीडियाकर्मियों से कहा, "न केवल भारत में, बल्कि दुनिया भर में पर्यटन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। घरेलू पर्यटन अब बढ़ रहा है और लोग बड़ी संख्या में गंतव्यों की यात्रा कर रहे हैं। लेकिन आज, तीसरी लहर के बारे में बहस चल रही है।"

उन्होंने (G.Kishan Reddy) कहा, "लेकिन मैं लोगों से आग्रह करता हूं, चाहे तीसरी लहर आए या न आए, सभी को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए और पर्यटन स्थलों की यात्रा करनी चाहिए। राज्य सरकारों ने भी प्रोटोकॉल का पालन करने के संबंध में अपने निर्णय लिए हैं।"

गोवा के लिए चार्टर पर्यटन उड़ानों के तत्काल भविष्य पर टिप्पणी करते हुए, (जिसे हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अनुमति दी गई थी) रेड्डी ने कहा कि विश्व स्तर पर ओमिक्रॉन का बढ़ता प्रसार एक निराशाजनक साबित हो सकता है।

उन्होंने (G.Kishan Reddy) यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि अंतर्राष्ट्रीय क्रूज पर्यटन को एक मिशन मोड पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए और कहा कि उनका मंत्रालय प्रधानमंत्री के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय के साथ काम कर रहा है।

उन्होंने कहा, "क्रूज पर्यटन सागरमाला पहल का एक हिस्सा है। हमारा जहाजरानी मंत्रालय इसे प्रोत्साहित कर रहा है। आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के अनुसार क्रूज पर्यटन विकास को एक मिशन मोड पर लिया जाएगा।"

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ओमिक्रॉन को देखते हुए हुआ लॉकडाउन तो पड़ेगा महंगा! (Image: Pixabay)

कोविड-19(Covid 19) का नया सुपर म्यूटेंट ओमिक्रॉन वैरिएंट(Omicron Variants) काफी खतरनाक बताया जा रहा है, जिसमें स्पाइक प्रोटीन पर 30 से अधिक म्यूटेंट बताए जा रहे हैं, जो मानव कोशिकाओं को बुरी तरह से संक्रमित करने में सक्षम हैं। यह वैरिएंट सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था और इसके बाद यह तेजी से फैल रहा है और इसकी चपेट में भारत, श्रीलंका, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, नीदरलैंड और ब्रिटेन सहित 24 से अधिक देश आ चुके हैं।

निश्चित ही सभी देश इस वैरीअंट(Omicron Variants) को रोकने के लिए लॉकडाउन(Lockdown) जैसे बड़े फैसले पर विचार कर रहे हैं। लेकिन डब्ल्यूएचओ ने लॉकडाउन को सही फैसला नहीं बताया है, जबकि अंतिम उपाय के रुप मे लॉकडाउन(Lockdown) को बताया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, ओमिक्रॉन वैरिएंट के खतरे को कम करने के लिए लॉकडाउन लागू करना बहुत महंगा साबित हो सकता है और इसे अंतिम उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

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