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थोड़ा हट के

जानें कब खेला गया था पहला पिंक बॉल टेस्ट मैच और गुलाबी गेंद का इतिहास

दुनिया का पहला पिंक बॉल टेस्ट मैच ऑस्ट्रेलिया बनाम न्यूजीलैंड के बीच 2015 में ऑस्ट्रेलिया खेला गया था और अब तक 14 पिंक बॉल टेस्ट मैच खेले जा चुके हैं । हर बार हमें विजेता ही देखने को मिला है ।

भारत ने अपना पहला पिंक बॉल टेस्ट मैच ईडन गार्डन्स में 2019 में खेला था । ( Wikimedia commons )

वैसे तो क्रिकेट सफेद या लाल बॉल से खेला जाता है लेकिन पिछले 5 वर्षों में एक नई गेंद आई है पिंक बॉल जिससे डे – नाइट टेस्ट मैच खेले जाते हैं । दुनिया का पहला पिंक बॉल टेस्ट मैच ऑस्ट्रेलिया बनाम न्यूजीलैंड के बीच 2015 में ऑस्ट्रेलिया खेला गया था और अब तक 14 पिंक बॉल टेस्ट मैच खेले जा चुके हैं । हर बार हमें विजेता ही देखने को मिला है ।

अबतक कितने पिंक बाल टेस्ट मैच हुए

कंगारुओं के पिंक टेस्ट मैचों के इतिहास को देखें तो उन्होंने लगभग 7 पिंक बॉल टेस्ट मैच खेले हैं और सभी में जीत प्राप्त करी है लेकिन उन्होंने सारे टेस्ट मैच अपने ही घर में ही खेले हैं । इसके अलावा भारत ने अपना पहला पिंक बॉल टेस्ट मैच बांग्लादेश के खिलाफ़ ईडन गार्डंस में खेला था जो भारत ने आसानी से जीत भी लिया था । अब तक साउथ अफ्रीका, जिंबाब्वे और बांग्लादेश ने सिर्फ एक ही पिंक बॉल टेस्ट मैच खेला है पाकिस्तान ने चार और न्यूजीलैंड , इंग्लैंड और श्रीलंका ने तीन और वेस्ट इंडीज़ ने दो डे एंड नाइट पिंक बॉल टेस्ट मैच खेले हैं ।


15वा पिंक बॉल टेस्ट मैच ऑस्ट्रेलिया बनाम भारत । ( Twitter )

गुलाबी गेंद और लाल गेंद का फर्क

गुलाबी गेंद वैसे तो 10 साल पहले ही ( कुकापूरा ) कंपनी के द्वारा ऑस्ट्रेलिया में बना दी गई थी लेकिन इसके परीक्षण में समय लग गया था । वैसे तो गुलाबी गेंद और लाल गेंद में कुछ खास फर्क नहीं है दोनों ही गेंद समानता के साथ बाउंस , स्पिन और स्विंग होती हैं । फर्क है तो सिर्फ उनके ऊपर होने वाली कोटिंग का और एक मुख्य अंतर है कि गुलाबी गेंद के ऊपर हरे रंग के धागे से बुनाई की जाती है ।

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पिंक बॉल । ( Wikimedia commons )

आखिर पिंक बॉल ही क्यों

जब पिंक बॉल का परीक्षण चल रहा था तो और दुसरे रंग की गेंदों का भी इस्तेमाल किया गया था लेकिन कैमरामैन को बॉल को दिखाने में कई तकलीफों का सामना करना पड़ रहा था और फिर बड़ी सोच विचार के साथ पिंक बॉल को ही अपनाया गया था , क्योंकि टेस्ट मैच में सफेद जर्सी के सामने पिंक बॉल का रंग ज्यादा अच्छे से उभर कर आ रहा था इसलिए पिंक बॉल का चयन डे -नाइट टेस्ट मैच के लिए किया गया और कैमरामैन को भी इससे कोई दिक्कत नहीं हुई ।

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कप्तान कोहली को कैसी लगी गुलाबी गेंद

भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने कहा है कि गुलाबी गेंद से टेस्ट मैच खेलना आम तौर पर लाल गेंद से खेले जाने वाले टेस्ट मैच से एकदम उल्टा है और गुलाबी गेंद से खेलने की तैयारी करना काफी मुश्किल है, क्योंकि इसके कई सारे पहलू होते हैं। कप्तान ने कहा कि उन्हें एडिलेड ओवल मैदान की स्थिति के हिसाब से ही खेलना होगा। “मुझे नहीं लगता कि आप टेस्ट क्रिकेट में चीजों को प्लान कर सकते हैं। टेस्ट क्रिकेट हमेशा से इसी तरह से होता कि आपको आपके सामने आई स्थिति के हिसाब से खेलना होता है और अपनी सर्वश्रेष्ठ काबिलियत का इस्तेमाल करना होता है। आपको समझना होता है कि आपको कब आक्रमण करना है, कब डिफेंड करना है, कब विकेट पर टिकना है। गुलाबी गेंद का टेस्ट मैच अपने साथ कई सारी चीजें लेकर आता है, जैसे कि शाम का समय, जब बल्लेबाजी करना काफी मुश्किल होता है। पहले सत्र में गेंदबाजी करना मुश्किल होता है और रात में फिर गेंदबाजों को मदद मिलती है।”

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आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में भारत की दिया कुमारी ने रखा भारत का पक्ष।(सांकेतिक चित्र, Pixabay)

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े मुद्दे पर भारतीय महिला संसदों के दल ने हिस्सा लिया। स्पेन के मैड्रिड में आईपीयू की 143वीं असेंबली के दौरान आयोजित महिला सांसद पूनम बेन मादाम और दीयाकुमारी के फोरम के 32वें सत्र को संबोधित किया।

इस दौरान सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि जहां सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) अवसरों के नए रास्ते खोलती है, वहीं वे बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार सहित चुनौतियों, खतरों और हिंसा के नए रूपों को भी जन्म देती हैं। भारत में ऑनलाइन बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से निपटने के लिए कड़े उपाय हैं।

सांसद दीया ने कहा कि भारत ने वर्ष 2000 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम बनाया था और समय-समय पर इसमें संशोधन किया है। यह अश्लील सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशित करने और प्रसारित करने पर रोक लगाता है और अधिनियम के विभिन्न वर्गों में उल्लंघन के लिए दंडात्मक प्रावधान भी निर्धारित करता है। उन्होंने आईटी इंटरमीडियरीज गाइडलाइंस रूल्स, 2011 के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट पर भी विचार व्यक्त किये। भारतीय दल ने कहा कि केवल कानूनी प्रावधान और उनका सख्ती से क्रियान्वयन ही काफी नहीं है, ऑनलाइन यौन शोषण से बच्चों को बचाने के लिए विशेष नीतियों की आवश्यकता है।

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली में भारत का दल।(IANS)

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भारत ने रूस और चीन से कहा कि अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।(IANS)

भारत ने रूस और चीन से कहा कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों द्वारा अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। RIC Meeting त्रिपक्षीय ढांचे की 18 वीं बैठक की अध्यक्षता के दौरान रखा, जो शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग पर हुई, जिसमें रूस और चीन के विदेश मंत्रियों सेर्गेई लावरोव और वांग यी ने भी भाग लिया।

जयशंकर ने अफगानिस्तान में समावेशी और प्रतिनिधि सरकार होने पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा, "RIC देशों के लिए आतंकवाद, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी आदि के खतरों पर संबंधित दृष्टिकोणों का समन्वय करना आवश्यक है।" मंत्री ने मास्को और बीजिंग के अपने दो समकक्षों को बताया कि, अफगान लोगों की भलाई के लिए भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप, नई दिल्ली ने देश में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए अफगानिस्तान को 50,000 मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति की पेशकश की थी।

हालांकि, मानवीय पहल में रुकावट आ गई थी, क्योंकि बुधवार तक पाकिस्तान इस खेप को अपने क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने के लिए प्रतिबद्ध नहीं था। जयशंकर ने आज कहा, "RIC देशों को यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है कि मानवीय सहायता बिना किसी रुकावट और राजनीतिकरण के अफगान लोगों तक पहुंचे। एक निकट पड़ोसी और अफगानिस्तान के लंबे समय से साथी के रूप में, भारत उस देश में हाल के घटनाक्रमों, विशेष रूप से अफगान लोगों की पीड़ा के बारे में चिंतित है।"

तीनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आरआईसी देशों के बीच सहयोग न केवल उनके अपने विकास में बल्कि वैश्विक शांति, सुरक्षा, स्थिरता में भी योगदान देगा। जयशंकर ने अपने संबोधन में, आरआईसी तंत्र के तहत यूरेशियन क्षेत्र के तीन सबसे बड़े देशों के बीच घनिष्ठ संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और राजनीति आदि क्षेत्रों में हमारा सहयोग वैश्विक विकास, शांति और स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।"

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वैज्ञानिको के अनुसार कोरोना का यह नया वैरिएंट डेल्टा वैरिएंट से भी ज़्यादा खतरनाक है। (Wikimedia Commons)

कोरोना(Corona) के कारण लगभग 18 से 20 महीने झूझने और घरों में बंद रहने के बाद दुनिया में अब ज़िन्दगी पटरी पर लौट रही है लेकिन अब दक्षिण अफ्रीका में पाए गए कोरोना के नए वैरिएंट ने अब दुनिया के कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। नए वैरिएंट का नाम बी.1.1.1.529 है। इस वैरिएंट के आने से वैज्ञानिको के बीच चिंता बढ़ गई है क्योंकि उनकी माने तो यह वैरिएंट डेल्टा प्लस वैरिएंट(Delta Plus Variant) से भी ज़्यादा खतरनाक है।

दक्षिण अफ्रीका(South Africa) में इस वैरिएंट के अब 100 मामले सामने आए हैं और अब यह धीरे-धीरे तेज़ी से फैलता जा रहा है।

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