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ओपिनियन

आखिर कौन है हिन्दू?

सवाल यह नहीं है कि हिन्दू को बदनाम किया जाने वाला षड्यंत्र कब तक चलेगा, अब सवाल यह आवश्यक है कि कितने हिन्दू अपनी संस्कृति के खिलाफ बोलने वालों को जवाब देने में सक्षम हैं?

(NewsGram Hindi)

आज देश-भर में हिन्दू संगठन ‘हिन्दू साम्राज्य दिवस’ पर कई प्रकार के आयोजन कर रहे हैं। आज के ही दिन हिन्दू हृदय सम्राट एवं मराठा शेर छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक किया गया था और इसी प्रकार से हिन्दू सम्राज्य की रक्षा के लिए भारत को एक पिता स्वरूप राजा मिला था। जिन्होंने ने मुगलिया दौर में न केवल हिन्दू साम्राज्य का विस्तार किया साथ ही एक ऐसे अभेद दीवार की भांति मुगलों के सामने खड़े हुए कि आज भी उनके शौर्य और शासन को याद किया जाता है। किन्तु आज के दौर में जहाँ उदारवादी और एक विशेष धर्म को खुश करने की कोशिश चल रही है उसमें हिन्दू कहाँ है? साथ ही आज हिन्दू कौन है?

यह प्रश्न है तो विस्तृत किन्तु इसे आज के आधुनिक लिब्रलधारियों और कट्टरवादियों ने एक शब्द में समेट दिया है और वह शब्द है ‘संघी’। यदि एक विशेष धर्म का व्यक्ति अपने धर्म का गलत तरीके से भी प्रचार कर रहा है तो उसके लिए यही लिब्रलधारी वाह! वाह! करते हैं, किन्तु यदि कोई योगी लाखों जीवन को बचाने वाली आयुर्वेदिक पद्धतियों का प्रचार करता है और योग का प्रचार करता है तो उसे अजेंडे से जोड़ दिया जाता है। साथ ही उनके लिए एक ऐसा षड्यंत्र रचा जाता है जिससे देश के नव-युवकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो जाए और वह भी उस षड्यंत्र का हिस्सा बन जाए। आपको याद होगा कि कांग्रेस पार्टी के नेता अभिषेक सिंघवी ने योग पर एक विवादित ट्वीट किया था और योग को धर्म से जोड़ने का प्रयास किया था। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था कि “ॐ उच्चारण से न तो योग ज्यादा शक्तिशाली हो जाएगा और ना अल्लाह कहने से योग की शक्ति कम होगी।”


किन्तु अब, सवाल यह नहीं है कि हिन्दू को बदनाम किया जाने वाला षड्यंत्र कब तक चलेगा, अब सवाल यह आवश्यक है कि कितने हिन्दू अपनी संस्कृति के खिलाफ बोलने वालों को जवाब देने में सक्षम हैं? और,

आखिर हिन्दू है कौन?

हिन्दू धर्म सनातन एवं सद्भाव में विश्वास रखने वाली सभ्यता है। आप इतिहास का कोई भी पन्ना पलटकर देख लीजिए, किसी भी हिन्दू शासक या सेना ने पहले आक्रमण नहीं किया था और न ही आज किया जाता है। दंगों में सबसे पहला हाथ किस समुदाय का रहता है, वह भी जग-जाहिर है। हिन्दू वह सभ्यता है जिसने यह कहा है कि आप किसी भी रूप से भगवान का ध्यान कीजिए अंततः कल्याण आपका ही होगा। कई हिन्दू विद्वानों ने जिनमें अधिकांश संत या ऋषि हैं, विश्व को सद्मार्ग पर चलने का रास्ता दिखाया है। सद्गुरु आदि शंकराचार्य, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद सरस्वती ऐसे कई संत महात्मा थे और आज भी ऐसे कई महात्मा हैं जिनके विचार सनातन एवं हिंदुत्व को स्पष्ट रूप से समझने में मदद कर रहे हैं। आज के विकट समय में कई हिन्दू संगठन लोगों की मदद करने के लिए सामने आए हैं, अनेकों मंदिरों ने अपनी क्षमता से बढ़कर इस महामारी से लड़ने के लिए दान दिया है। सनातन धर्म ने दान को इतने सुंदर रूप से समझाया है कि आप भी दंग रह जाएंगे “बोधयन्ति न याचन्ते भिक्षाद्वारा गृहे गृहे ।दीयतां दीयतां नित्यं अदातु: फलमीदृशम् ॥” इस श्लोक का अर्थ है ‘भिक्षुक सबके घर पर केवल भिक्षा माँगने नहीं आते हैं, वह हमे ज्ञान देते हैं कि दे दो! दे दो! न देने का फल मेरे जैसा होगा। इस जन्म मे नहीं दिया तो अगले जन्म मे जरुर मेरी तरह भिक्षा माँगनी पड़ेगी।’

अधिकांश लिब्रलधारियों को इस श्लोक में नकारात्मकता दिखाई देगी किन्तु जो व्यक्ति बुद्धिमान होगा वह इसके गूढ़ अर्थ को समझ जाएगा। हिन्दू धर्म ही केवल धर्म है जो नदियों की, सूर्य की, वायु एवं अग्नि की पूजा करता है। क्योंकि यही वह तत्व हैं जिनसे जीवन अधिक सरलता से आगे बढ़ती है। हिन्दू संस्कार में महिलाओं को देवी का स्थान प्राप्त है। हमारी संस्कृति में हिमालय की चोटी पर विराजमान आदियोगी शिव को भी पूजा जाता है और क्षीर सागर में विराजे सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु को भी। हिन्दू धर्म ही एक धर्म है जहाँ आपको आस्था को भी चयन करने अवसर प्राप्त होता है। आप शिव में आस्था रखते हैं तो भी भक्त कहलाते हैं और श्री राम में आस्था रखते हैं तो भी भक्त कहलाते हैं, न तो कोई आपकी आस्था पर प्रश्न खड़ा करता है और न ही किसी और भगवान पर आस्था रखने के लिए आप पर हिंसक रूप से दबाव बनाया जाता है।

हिन्दू धर्म ही केवल धर्म है जो नदियों की, सूर्य की, वायु एवं अग्नि की पूजा करता है।(Pixabay)

यह भी पढ़ें: क्यों भगवान राम और कृष्ण को नीले रंग में वर्णित किया गया है?

क्या हिन्दू बदनाम करने वालों को जवाब देने में सक्षम हैं?

आज के समय में कई संगठन ऐसे हैं जिन्होंने जवाब देने का जिम्मा अपने सर उठाया है और वह बिना किसी लालच के यह काम भी कर रहे हैं। किन्तु समस्या तब उत्पन्न होती है जब बाहरी ताकत मिलकर उन्हें बदनाम करने की या सोशल मीडिया पर उन्हें छुपाने की साजिश रचती है। यह दोहरा चरित्र तब नहीं अपनाया जाता है जब देश विरोधी शरजील उस्मानी के पोस्ट धड़ल्ले से चलाया जाता है, किन्तु जो हिन्दुओं की बात करे उसके पोस्ट को डीएक्टिवेट कर दिया जाता। बहरहाल हिन्दू जवाब देने में सक्षम हैं या नहीं यह उनके ज्ञान पर निर्भर करता है और ज्ञान केवल पोथी पढ़ने से नहीं आएगा, ज्ञान समझने से और जड़ तक खुदको मजबूत करने से आएगा। साथ ही तथ्यविहीन बातों से फायदा नहीं नुकसान ही होगा। इसलिए कुछ ऐसे वक्ताओं को सुनिए जिनके तर्कों में तथ्य हैं और उन्हें सुनिए जो हिन्दू रक्षा पर तर्क सहित बात करते हैं।

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प्री-एक्लेमप्सिया गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद रक्तचाप में अचानक वृद्धि है। (Unsplash)

एक नए अध्ययन के अनुसार, जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान कोविड संकमित होती हैं, उनमें प्री-एक्लेमप्सिया विकसित होने का काफी अधिक जोखिम होता है। यह बीमारी दुनिया भर में मातृ और शिशु मृत्यु का प्रमुख कारण है। प्री-एक्लेमप्सिया गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद रक्तचाप में अचानक वृद्धि है। अमेरिकन जर्नल ऑफ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन से पता चला है कि गर्भावस्था के दौरान सॉर्स कोव2 संक्रमण वाली महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान संक्रमण के बिना प्रीक्लेम्पसिया विकसित होने की संभावना 62 प्रतिशत अधिक होती है।

वेन स्टेट यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में आणविक प्रसूति और आनुवंशिकी के प्रोफेसर रॉबटरे रोमेरो ने कहा कि यह जुड़ाव सभी पूर्वनिर्धारित उपसमूहों में उल्लेखनीय रूप से सुसंगत था। इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान सॉर्स कोव 2 संक्रमण गंभीर विशेषताओं, एक्लम्पसिया और एचईएलएलपी सिंड्रोम के साथ प्री-एक्लेमप्सिया की बाधाओं में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ जुड़ा है। एचईएलएलपी सिंड्रोम गंभीर प्री-एक्लेमप्सिया का एक रूप है जिसमें हेमोलिसिस (लाल रक्त कोशिकाओं का टूटना), ऊंचा लिवर एंजाइम और कम प्लेटलेट काउंट शामिल हैं। टीम ने पिछले 28 अध्ययनों की समीक्षा के बाद अपने निष्कर्ष प्रकाशित किए, जिसमें 790,954 गर्भवती महिलाएं शामिल थीं, जिनमें 15,524 कोविड -19 संक्रमण का निदान किया गया था।

गर्भावस्था के दौरान संक्रमण के बिना प्रीक्लेम्पसिया विकसित होने की संभावना 62 प्रतिशत अधिक होती है। (Unsplash)

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद।(PIB)

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने बुधवार को दोहराया कि भारत सामूहिक स्वास्थ्य और आर्थिक कल्याण सुनिश्चित करने के लिए Covid-19 महामारी के खिलाफ एक निर्णायक और समन्वित प्रतिक्रिया देने के वैश्विक प्रयासों में सबसे आगे रहा है। कोविंद ने यह भी कहा कि दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के तहत भारतीयों को अब तक 80 करोड़ से अधिक खुराक मिल चुकी है।

राष्ट्रपति भवन से एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को एक आभासी समारोह में आइसलैंड, गाम्बिया गणराज्य, स्पेन, ब्रुनेई दारुस्सलाम और श्रीलंका के लोकतांत्रिक गणराज्य के राजदूतों/उच्चायुक्तों से परिचय पत्र स्वीकार किए।

अपना परिचय पत्र प्रस्तुत करने वाले राजदूत निम्न हैं : महामहिम गुडनी ब्रैगसन, आइसलैंड के राजदूत, महामहिम मुस्तफा जवारा, गाम्बिया गणराज्य के उच्चायुक्त, महामहिम जोस मारिया रिडाओ डोमिंगुएज, स्पेन के राजदूत, महामहिम दातो अलैहुद्दीन मोहम्मद ताहा, ब्रुनेई दारुस्सलाम के उच्चायुक्त, महामहिम अशोक मिलिंडा मोरागोडा, श्रीलंका के लोकतांत्रिक समाजवादी गणराज्य के उच्चायुक्त।


इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने इन सभी राजदूतों को उनकी नियुक्ति पर बधाई दी और उन्हें भारत में एक सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत के इन सभी पांच देशों के साथ घनिष्ठ संबंध हैं और भारत इनके साथ शांति, समृद्धि का एक समन्वित दृष्टिकोण साझा करता है।

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देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटें। (IANS)

राम भक्तों द्वारा दी गई और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) (Vishwa Hindu Parishad) द्वारा तीन दशक लंबे मंदिर आंदोलन के दौरान देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटों का इस्तेमाल अब राम जन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण के लिए किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, "1989 के 'शिलान्यास' के दौरान कारसेवकों द्वारा राम जन्मभूमि पर एक लाख पत्थर रखे गए थे। कम से कम, 2 लाख पुरानी कार्यशाला में रह गए हैं, जिन्हें अब निर्माण स्थल पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ईंटों पर भगवान राम का नाम लिखा है और यह करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रमाण है।

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