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देश

पन्ना की एनएमडीसी खदान बंद होने का दोषी कौन?

By: संदीप पौराणिक मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की देश और दुनिया में पहचान हीरा के कारण है, लेकिन यहां की एनएमडीसी खदान पर एक बार फिर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं, क्योंकि वन्य प्राणी बोर्ड की अनुमति समय पर न मिलने के कारण यह खदान 31 दिसंबर 2020 से बंद चल रही हैं।

By: संदीप पौराणिक

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की देश और दुनिया में पहचान हीरा के कारण है, लेकिन यहां की एनएमडीसी खदान पर एक बार फिर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं, क्योंकि वन्य प्राणी बोर्ड की अनुमति समय पर न मिलने के कारण यह खदान 31 दिसंबर 2020 से बंद चल रही हैं। राज्य सरकार इन्हे चालू कराने के दावे कर रही है, मगर सवाल उठ रहा है कि आखिर खदान बंद होने के लिए दोषी है कौन।


पन्ना की एनएमडीसी खदान को वन्य प्राणी बोर्ड ने 31 दिसंबर 2020 तक संचालन की अनुमति दी थी, इस तारीख के करीब आने से कई माह पहले से ही एनएमडीसी प्रबंधन राज्य सरकार से बोर्ड की बैठक कर अनुमति बढ़ाए जाने की मांग करता आ रहा था, मगर बोर्ड की अनुमति नहीं मिली तो पन्ना टाईगर रिजर्व ने इस खदान को एक जनवरी 2021 को बंद करने के निर्देष दिए। उसके बाद से यह खदान बंद चल रही हैं।

इस खदान के बंद होने की बात सामने आने पर क्षेत्रीय सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने खनिज मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से इस खदान को चालू करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने का अनुरोध किया था, जिस पर चौहान ने खदान को चालू करने का भरोसा दिलाया था।

हीरा खदान से जुड़े समर बहादुर सिंह का कहना है कि, “खदान को जारी रखने की वन्य प्राणी बोर्ड की अनुमति 31 दिसंबर तक थी, उसे बढ़ाए जाने के लिए लगातार एनएमडीसी प्रबंधन द्वारा प्रयास किए जा रहे थे, मगर सरकार ने वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक ही नहीं बुलाई। परिणाम स्वरुप अनुमति की तारीख निकल गई और खदान को बंद करना पड़ा।”

वन्य प्राणी बोर्ड से अनुमति न मिलने से बंद है एनएमडीसी खदान। (सांकेतिक चित्र, Pixabay)

सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ, बोर्ड की बैठक क्यों नहीं हुई, इस बोर्ड के अध्यक्ष खुद मुख्यमंत्री हैं। एनएमडीसी प्रबंधन की तरफ से लगातार अनुमति के लिए प्रयास किए जाते रहे, मगर किसी ने गौर नहीं किया। क्या सरकार ऐसे लोगों पर कार्रवाई करेगी, जो खदान के बंद होने के लिए परोक्ष या अपरोक्ष रुप से जिम्मेदार हैं।

सूत्रों का कहना है कि एनएमडीसी से राज्य सरकार को लगभग एक हजार करोड़ रुपये का राजस्व हर साल प्राप्त होता है। उसके बावजूद इसे किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। यही कारण रहा कि कई माह की जद्दोजहद के बाद वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक ही नहीं हो पाई और अनुमति नहीं दी गई। मुख्यमंत्री चौहान की अध्यक्षता में बोर्ड की गुरुवार को बैठक हुई। जिसमें खदान को चालू रखने पर सहमति बनी। इसके बाद केंद्र के पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी मिलेगी और उसके बाद ही खदान चालू हो पाएगी।

इस खदान पर संकट मंडराने का एक और कारण भी है, क्योंकि पन्ना टाईगर रिजर्व को यूनेस्को ने नेटवर्क ऑफ बायोस्फीयर रिजर्व सूची में शामिल किया है। अगर एनएमडीसी खदान का हिस्सा भी इस हिस्से में आ जाता है, तो फिर खदान को चालू रखने की मंजूरी और भी कठिन हो जाएगी।

हीरा पन्ना की पहचान है। (Pixabay)

सामाजिक कार्यकर्ता राजीव खरे का कहना है कि, “हीरा पन्ना की पहचान है, एनएमडीसी की खदान बंद हुई तो पन्ना का अस्तित्व कहीं खत्म हो जाएगा, वहीं अवैध खनन जोर पकड़ लेगा। इससे जहां लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ेगा, वहीं राज्य सरकार को राजस्व की हानि होगी। सवाल उठता है कि जब केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए बैठक बुलाई जा सकती है, तो इस गंभीर मसले पर हीलाहवाली क्यों की गई।

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गौरतलब है कि एशिया की इकलौती मैकेनाइज्ड एनएमडीसी खदान में साल 1968 से लेकर अब तक लगभग 13 लाख कैरेट हीरों का उत्पादन किया जा चुका है। अभी यहां से साढ़े आठ लाख कैरेट हीरों का उत्पादन होना शेष है। ऐसे में अगर संचालन की अनुमति नहीं मिली तो अरबों रुपये के हीरे जमीन के अंदर ही रह जाएंगे। यह खदान बंद होने का यह दूसरा मामला है, इससे पहले खदान वर्ष 2005 में बंद हुई थी और सर्वोच्च न्यायालय के दखल के बाद वर्ष 2009 में फिर चालू हो पाई थी, कुल मिलाकर चार साल खदान बंद रही थी।

पन्ना जिले के गंगऊ अभ्यारण्य में एनएमडीसी 275 हेक्टेयर में हीरा खनन करता है। इस खदान से लगभग डेढ़ हजार परिवारों का जीवन चलता है, वहीं राज्य सरकार को भी इससे राजस्व की प्राप्ति हेाती है। कुल मिलाकर यह खदान यहां की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के साथ रोजगार का भी बड़ा जरिया है।(आईएएनएस)

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आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में भारत की दिया कुमारी ने रखा भारत का पक्ष।(सांकेतिक चित्र, Pixabay)

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े मुद्दे पर भारतीय महिला संसदों के दल ने हिस्सा लिया। स्पेन के मैड्रिड में आईपीयू की 143वीं असेंबली के दौरान आयोजित महिला सांसद पूनम बेन मादाम और दीयाकुमारी के फोरम के 32वें सत्र को संबोधित किया।

इस दौरान सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि जहां सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) अवसरों के नए रास्ते खोलती है, वहीं वे बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार सहित चुनौतियों, खतरों और हिंसा के नए रूपों को भी जन्म देती हैं। भारत में ऑनलाइन बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से निपटने के लिए कड़े उपाय हैं।

सांसद दीया ने कहा कि भारत ने वर्ष 2000 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम बनाया था और समय-समय पर इसमें संशोधन किया है। यह अश्लील सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशित करने और प्रसारित करने पर रोक लगाता है और अधिनियम के विभिन्न वर्गों में उल्लंघन के लिए दंडात्मक प्रावधान भी निर्धारित करता है। उन्होंने आईटी इंटरमीडियरीज गाइडलाइंस रूल्स, 2011 के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट पर भी विचार व्यक्त किये। भारतीय दल ने कहा कि केवल कानूनी प्रावधान और उनका सख्ती से क्रियान्वयन ही काफी नहीं है, ऑनलाइन यौन शोषण से बच्चों को बचाने के लिए विशेष नीतियों की आवश्यकता है।

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली में भारत का दल।(IANS)

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भारत ने रूस और चीन से कहा कि अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।(IANS)

भारत ने रूस और चीन से कहा कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों द्वारा अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। RIC Meeting त्रिपक्षीय ढांचे की 18 वीं बैठक की अध्यक्षता के दौरान रखा, जो शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग पर हुई, जिसमें रूस और चीन के विदेश मंत्रियों सेर्गेई लावरोव और वांग यी ने भी भाग लिया।

जयशंकर ने अफगानिस्तान में समावेशी और प्रतिनिधि सरकार होने पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा, "RIC देशों के लिए आतंकवाद, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी आदि के खतरों पर संबंधित दृष्टिकोणों का समन्वय करना आवश्यक है।" मंत्री ने मास्को और बीजिंग के अपने दो समकक्षों को बताया कि, अफगान लोगों की भलाई के लिए भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप, नई दिल्ली ने देश में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए अफगानिस्तान को 50,000 मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति की पेशकश की थी।

हालांकि, मानवीय पहल में रुकावट आ गई थी, क्योंकि बुधवार तक पाकिस्तान इस खेप को अपने क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने के लिए प्रतिबद्ध नहीं था। जयशंकर ने आज कहा, "RIC देशों को यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है कि मानवीय सहायता बिना किसी रुकावट और राजनीतिकरण के अफगान लोगों तक पहुंचे। एक निकट पड़ोसी और अफगानिस्तान के लंबे समय से साथी के रूप में, भारत उस देश में हाल के घटनाक्रमों, विशेष रूप से अफगान लोगों की पीड़ा के बारे में चिंतित है।"

तीनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आरआईसी देशों के बीच सहयोग न केवल उनके अपने विकास में बल्कि वैश्विक शांति, सुरक्षा, स्थिरता में भी योगदान देगा। जयशंकर ने अपने संबोधन में, आरआईसी तंत्र के तहत यूरेशियन क्षेत्र के तीन सबसे बड़े देशों के बीच घनिष्ठ संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और राजनीति आदि क्षेत्रों में हमारा सहयोग वैश्विक विकास, शांति और स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।"

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वैज्ञानिको के अनुसार कोरोना का यह नया वैरिएंट डेल्टा वैरिएंट से भी ज़्यादा खतरनाक है। (Wikimedia Commons)

कोरोना(Corona) के कारण लगभग 18 से 20 महीने झूझने और घरों में बंद रहने के बाद दुनिया में अब ज़िन्दगी पटरी पर लौट रही है लेकिन अब दक्षिण अफ्रीका में पाए गए कोरोना के नए वैरिएंट ने अब दुनिया के कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। नए वैरिएंट का नाम बी.1.1.1.529 है। इस वैरिएंट के आने से वैज्ञानिको के बीच चिंता बढ़ गई है क्योंकि उनकी माने तो यह वैरिएंट डेल्टा प्लस वैरिएंट(Delta Plus Variant) से भी ज़्यादा खतरनाक है।

दक्षिण अफ्रीका(South Africa) में इस वैरिएंट के अब 100 मामले सामने आए हैं और अब यह धीरे-धीरे तेज़ी से फैलता जा रहा है।

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