Monday, January 25, 2021
Home व्यक्ति विशेष कौन हैं नाइश हसन, जिनके दादा थे जंग-ए-आजादी का हिस्सा

कौन हैं नाइश हसन, जिनके दादा थे जंग-ए-आजादी का हिस्सा

लखनऊ की रहने वालीं नाइश हसन, आज मुस्लिम महिलाओं की आवाज बन चुकी हैं। देश की वह पहली महिला हैं, जिन्होंने हलाला जैसी बुराई की शिकार महिलाओं पर पीएचडी की है।

By – नवनीत मिश्र

देश की जंग-ए-आजादी में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाले स्वतंत्रता सेनानियों में से एक रहे उत्तर प्रदेश के नाजिम अली की विरासत को उनकी पौत्री नाइश हसन आगे बढ़ा रहीं हैं।

नाइश हसन मुस्लिम महिलाओं की आवाज हैं

लखनऊ की रहने वालीं नाइश हसन, आज मुस्लिम महिलाओं की आवाज बन चुकी हैं। पिछले दो दशक से वह महिलाओं के हक की लड़ाई योजनाबद्ध तरीके से लड़ रहीं हैं। जिसमे मुसलमान औरत की मुकम्मल आजादी के सभी पक्ष शामिल हैं, देश की वह पहली महिला हैं, जिन्होंने हलाला जैसी बुराई की शिकार महिलाओं पर पीएचडी की है। यह नाइश हसन ही हैं, जिन्होंने हलाला, मुताह, मिसियार, बहुविवाह, व मौजूदा शरिया कानून 1937 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। महिलाओं को इन कुप्रथाओं से निजात दिलाने की अपनी याचिका के कारण वह सुर्खियों में रहीं हैं।

यह भी पढ़ें – यूपी ने कोरोना को बनाया व्यवसाय का साधन

नाइश हसन के बारे में

नाइश हसन मूलत: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के तेरी गांव की रहने वालीं हैं। उनके दादा नाजिम अली ने 1916 में 20 वर्ष की उम्र में देश की आजादी की जंग में खुद को समर्पित कर दिया और 1947 तक लड़ते रहे। आजादी के बाद वह जयसिंहपुर विधानसभा क्षेत्र से पहले विधायक चुने गए।

लखनऊ विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में एमफिल और फिर शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय से पीएचडी करने वालीं नाइश हसन ने आईएएनएस को बताया, “उनके दादा बेटियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करते थे तो उन्हें समाज का ताना सुनना पड़ता था। मगर, प्रगतिशील सोच के दादा हमेशा हवा के खिलाफ खड़े होकर अपनी ही नहीं समाज की सभी बेटियों को पढ़ाई-लिखाई के लिए प्रेरित करते रहे। देश के भले के लिए वह उन मुस्लिम नेताओं में शुमार रहे, जिन्होंने देशहित में मुस्लिम लीग का मुखर होकर विरोध किया।”

यह भी पढ़ें – तब से अब तक की जामिया की कहानी, 100 साल हुए पूरे

तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठाई

पढ़ाई के दौरान ही नाइश हसन के पास ऐसे तमाम मामले सामने आए, जहां छोटी-छोटी बात पर पतियों ने बीवियों को तीन-तलाक देकर उन्हें घर से निकाल दिया। ऐसी महिलाओं के दर्दनाक किस्से सुनकर नाइश हसन ने उनकी आवाज बनने का फैसला लिया। 2005 से उन्होंने तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठानी शुरू की। शाहबानो केस के बाद जो खामोशी रही उसे भरने में वह सबसे बड़ी आवाज बनीं। जिस पर उन्हें मुस्लिम समाज के अंदरखाने भारी विरोध सहना पड़ा। मगर, स्वतंत्रता सेनानी रहे दादा नाजिम अली की ही विरासत को आगे बढ़ाते हुए नाइश मिशन पर डटीं रहीं। उनके बार-बार तीन तलाक पर आवाज उठाने से देश में यह मुद्दा विमर्श का विषय बनना शुरू हुआ। अब तीन तलाक की शिकार हुईं महिलाएं भी सामने आने लगीं।

नाइश हसन Naish Hasan
नाइश हसन अन्य महिलाओं के साथ। (Naish Hasan , Facebook)

नाइश हसन ने आईएएनएस को बताया, “तीन तलाक, हलाला, मुताह, शरिया के बारे में अधिक से अधिक जानकारी के लिए उन्होंने रिसर्च करना शुरू किया। इसके लिए मुंबई से लेकर हैदराबाद तक के चक्कर उन्होंने लगाए। रिसर्च के कारण इतनी जानकारी हुई कि अब वह इन विषयों पर किसी बड़े वकील के टक्कर में बहस करने के काबिल हो चुकीं हैं। तर्क और तथ्यों के जरिए वह समाज के लोगों का धीरे-धीरे मन बदलने में सफल हो रहीं हैं।”

यह भी पढ़ें – कट्टरपंथी इस्लाम के खिलाफ फ्रांस का पुरजोर समर्थन कर रहा भारत

देश की पहली मुस्लिम महिला जिन्होंने हलाला पर पीएचडी की है

नाइश हसन Naish Hasan
नाइश हसन। (Naish Hasan , Facebook)

नाइश हसन संभवत: देश की पहली मुस्लिम महिला हैं, जिन्होंने मु्स्लिम समाज की हलाला जैसी बुराई पर पीएचडी की है। नाइश हसन ने आईएएनएस से कहा, “समाज में कई बातें फैलाईं गईं। जब मैने समाज में प्रचलित कुप्रथाओं की पड़ताल करनी शुरू की तो पता चला कि कुरान में इन सब का जिक्र नहीं है। यह सब कुछ मौलवी का कपोल-कल्पनाएं हैं। ऐसे में मैने इन कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज उठानी शुरू की। शाहबानो केस में 1986 में आए जजमेंट को दबाव में आने और फैसले के पलटने से इंसाफ की आस लगाए बैठीं महिलाओं का साहस टूट गया था। लंबे समय बाद जब फिर दूसरी महिला शायरा बानो ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तब जाकर हौसला बढ़ा। तीन तलाक के बाद अब हलाला, मुताह के खात्मे की आस जगी है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका पर जल्द न्याय की आस है।”

यह भी पढ़ें – भगत सिंह के बसंती चोले की वेदना को समझने की कोशिश

“हिंदुस्तान के मुसलमानों की देशभक्ति में कोई कमी नहीं है”

देश, धर्म आदि मसलों को लेकर हुए सवाल पर नाइश हसन का कहना है कि हिंदुस्तान के मुसलमानों की देशभक्ति में कोई कमी नहीं है। मलाल इस बात का है कि कुछ लोग कई बार मुसलमानों की देशभक्ति पर संदेह करते हैं या फिर उनकी धार्मिक पहचान पर ज्यादा जोर देते हैं।

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि एक इंसान की बहुत सी पहचानें होती है, उसे खाली उसकी धार्मिक पहचान से ही जोड़ कर देखना गलत है, मुसलमान होना तमाम पहचानो में से एक पहचान है, लेकिन उसे प्राथमिक पहचान कर दिया जाता है। हर समाज में अच्छे-बुरे दोनों तरह के लोग होते हैं।”

यह भी पढ़ें – जानिए कौन हैं बीजेपी की महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वानती श्रीनिवासन?

“बड़े शहरों में धार्मिक पहचान ज्यादा मायने रखती है”

क्या एक मुस्लिम के तौर पर भेदभाव महसूस हुआ? इस सवाल पर नाइश हसन का कहना है कि चौंकाने वाली बात है कि छोटे शहरों की तुलना में बड़े शहरों में धार्मिक पहचान ज्यादा मायने रखती है। कुछ मौकों पर उन्होंने भेदभाव महसूस किया है। खासतौर से किराए पर मकान ढूंढने के दौरान कई बार धार्मिक पहचान का नुकसान उठाना पड़ता है। (आईएएनएस)

POST AUTHOR

न्यूज़ग्राम डेस्क
संवाददाता, न्यूज़ग्राम हिन्दी

जुड़े रहें

6,018FansLike
0FollowersFollow
177FollowersFollow

सबसे लोकप्रिय

धर्म निरपेक्षता के नाम पर हिन्दुओ को सालों से बेवकूफ़ बनाया गया है: मारिया वर्थ

यह आर्टिक्ल मारिया वर्थ के ब्लॉग पर छपे अंग्रेज़ी लेख के मुख्य अंशों का हिन्दी अनुवाद है।

विज्ञापनों पर पानी की तरह पैसे बहा रही केजरीवाल सरकार, कपिल मिश्रा ने लगाया आरोप

पिछले 3 महीनों से भारत, कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है। इन बीते तीन महीनों में, हम लगातार राज्य सरकारों की...

भारत का इमरान को करारा जवाब, दिखाया आईना

भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए भाषण पर आईना दिखाते हुए करारा जवाब दिया...

गाय के चमड़े को रक्षाबंधन से जोड़ने कि कोशिश में था PETA इंडिया, विरोध होने पर साँप से की लेखक शेफाली वैद्य कि तुलना

आज ट्वीटर पर मचे एक बवाल में PETA इंडिया का हिन्दू घृणा खुल कर सबके सामने आ गया है। ये बात...

जब इन्दिरा गांधी ने प्रोटोकॉल तोड़ मुग़ल आक्रमणकारी बाबर को दी थी श्रद्धांजलि

ये बात तब की है जब इन्दिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री हुआ करती थी। वर्ष 1969 में इन्दिरा गांधी काबुल, अफ़ग़ानिस्तान के...

दिल्ली की कोशिश पूरे 40 ओवर शानदार खेल खेलने की : कैरी

 दिल्ली कैपिटल्स के विकेटकीपर एलेक्स कैरी ने कहा है कि टीम के लिए यह समय है टूर्नामेंट में दोबारा शुरुआत करने का।...

क्या अमनातुल्लाह खान द्वारा लिया गया ‘दान’, दंगों में खर्च हुए पैसों की रिकवरी थी? बड़ा सवाल!

फरवरी महीने में हुए दिल दहला देने वाले हिन्दू विरोधी दंगों को लेकर दिल्ली पुलिस आक्रमक रूप से लगातार कार्यवाही कर रही...

दिल्ली दंगा करवाने में ‘आप’ पार्षद ताहिर हुसैन ने खर्च किए 1.3 करोड़ रूपए: चार्जशीट

इस साल फरवरी में हुए हिन्दू विरोधी दिल्ली दंगों को लेकर आज दिल्ली पुलिस ने कड़कड़डूमा कोर्ट में चार्ज शीट दाखिल किया।...

हाल की टिप्पणी