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व्यक्ति विशेष

जानिए! कौन हैं नंबी नारायण।

नंबी नारायण एक भारतीय वैज्ञानिक व एयरोस्पेस इंजीनियर हैं। नारायण इसरो में एक क्रायोजेनिक्स विभाग के प्रभारी के रूप में कार्य करते थे।

नंबी नारायण एक भारतीय वैज्ञानिक व एयरोस्पेस इंजीनियर हैं। (Wikimedia Commons)

नंबी नारायण (Nambi Narayan) एक भारतीय वैज्ञानिक व एयरोस्पेस इंजीनियर हैं। नारायण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के भी रह चुके हैं। इसरो में काम करते हुए, नारायण पर भारतीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से जुड़े महत्वपूर्ण रहस्यों को पाकिस्तान को बेचने का आरोप लगाया गया था। उनका मानना रहा है कि, 1994 में केरल पुलिस की साजिश के कारण उन्हें फंसाया गया था। जिस कारण झूठे आरोपों के चलते उन्हें गिरफ्तार किया गया था। जिस वजह से नारायण जी मानसिक क्रूरता का शिकार बन गए। उनका पूरा जीवन ही एक झूठे आरोप के चलते बर्बाद हो गया। 

नारायण इसरो (ISRO) में एक क्रायोजेनिक्स विभाग के प्रभारी के रूप में कार्य करते थे। नारायण ने इसरो के अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए तरल ईंधन वाले इंजनों की आवश्यकता को खोजा उसका अनुमान लगाया और 1970 के दशक में एक नई प्रौद्योगिकी की शुरुआत की थी। 


1992 में इसरो ने क्रायोजेनिक आधारित ईंधन विकसित करने के लिए, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए रूस के साथ एक समझौता किया था। जिसे बाद में अमेरिका और फ्रांस के दबाव के चलते रोक दिया गया था। लेकिन इसके बाद ही भारत (India) के इसरो ने रूस के साथ चार क्रायोजेनिक इंजन बनाने के लिए एक नए समझौते पर हस्ताक्षर किया था। जिस समय नारायण अपने जीवन में एक नई कहानी बुन रहे थे। नई उपलब्धियों को हासिल कर रहे थे। तभी उन्हें एक झूठे मामले में गिरफ्तार के लिए गया था। विदेशी ताकतों के लिए जासूसी करने के आरोप लगा, नारायण जी को देशद्रोही भी बता दिया गया था। 

नारायण इसरो (ISRO) में एक क्रायोजेनिक्स विभाग के प्रभारी के रूप में कार्य करते थे। (Wikimedia Commons)

इतने वर्षों की लड़ाई के पश्चात एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने 1994 में हुए इस मामले में CBI जांच के आदेश दिए हैं। नारायण जी ने 27 साल से केरल पुलिस अधिकारियों के अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। इससे पहले 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने जासूसी कांड में अपराधी ठहराए गए वैज्ञानिक नारायण जी को बरी कर दिया था। एक पैनल की नियुक्ति कर, जिसमें न्यायमूर्ति ए.एम.खानविल्कर ने शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश डी.के जैन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था और केरल राज्य को नारायण जी को 50 लाख रुपए मुआवजा देने को भी कहा था। 

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नारायण ने कहा की “मैं खुश हूं।” CBI जांच का आदेश एक बड़ी सफलता है। लेकिन अभी मैं इस विषय पर ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता। 

इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायण के जीवन पर आधारित एक फिल्म भी बनी है “रॉकेट-द-नंबी-इफेक्ट।” इस फिल्म में उनका किरदार अभिनेता आर.माधवन निभा रहे हैं। उनका मानना है कि, महान वैज्ञानिक नंबी नारायण के बारे में नहीं जानना अपराध है। 

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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