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संस्कृति

क्यों भगवान राम और कृष्ण को नीले रंग में वर्णित किया गया है?

जो कुछ भी विशाल है और हमारी धारणा से परे है, वह आमतौर पर नीला माना जाता है। जानिए आखिर क्यों भगवान राम और कृष्ण को नीले रंग में वर्णित किया गया है|

हिन्दू धर्म ग्रंथों और शास्त्रों के अनुसार भगवान राम और भगवान कृष्ण दोनों ही भगवान विष्णु के अवतार हैं। (NewsGramHindi, साभार: Wikimedia Commons)

ऐसा माना जाता है कि, जहां कहीं भी पवित्रता और गहराई का मिलन होता है, वहां नीला रंग दिखाई पड़ता है। नीले रंग को समग्रता का रंग माना जाता है। आप पाएंगे कि जो कुछ भी विशाल है और हमारी धारणा से परे है, वह आमतौर पर नीला माना जाता है। इसलिए भारत में इतने सारे देवी – देवताओं को नीले रंग में वर्णित किया गया है। भगवान शिव का नीला रंग, भगवान कृष्ण का नीला रंग, भगवान राम का नीला रंग। लेकिन यह भी मत है कि, पूर्ण रूप से जरूरी नहीं, उनकी त्वचा का रंग नीला हो। उन्हें नीले रंग के रूप में देखा जाता है क्योंकि उनके पास नीली आभा है। आभा यानी हर पदार्थ के चारों ओर पाया जाने वाला एक ऊर्जा क्षेत्र होता है। 

हिन्दू धर्म ग्रंथों और शास्त्रों के अनुसार भगवान राम (Bhagwan Ram) और भगवान कृष्ण (Bhagwan Krishna) दोनों ही भगवान विष्णु के अवतार हैं। इसलिए उन्हें मेघवर्णम, शुभांगम और केकी कंथाभलीलम भी कहा जाता है। पुराणों में भगवान विष्णु का रंग नीला बताया गया है। नीला रंग जो उनकी सर्वव्यापी प्रकृति को इंगित करता है। नीला, अनंत आकाश का रंग और साथ ही अनंत महासागर का रंग जिस पर भगवान विष्णु विराजमान रहते हैं। श्री विष्णु सहस्त्रनाम के ध्यनाम में भी भगवान विष्णु का वर्णन इस प्रकार किया गया है। 


शांताकारं भुजगशनं पद्माभंसूरम्विश्वाधारम् गगन सदृशं मेघवर्णं शुभांगम|

अर्थात: हम विष्णु का ध्यान करते हैं, जो हमेशा शांत रहते हैं, जो महान सर्प-शय्या पर स्थित हैं, जिनकी नाभि से रचनात्मक शक्ति का कमल निकलता है, जो देवताओं के नियंत्रक हैं, जिनका रूप संपूर्ण ब्रह्मांड है, और जो आकाश के रूप में, बादल के रंग के, आकर्षक सौंदर्य के रूप में व्याप्त हैं।

पुराणों में भगवान विष्णु का रंग नीला बताया गया है। (Wikimedia Commons)

इस प्रकार भगवान राम और भगवान कृष्ण को पूर्ण रूप से लाल या काले रंग के नही हैं। श्याम रंग पूर्णतः काला रंग नहीं अपितु गहरा नीला रंग होता है और भगवान विष्णु के अवतार होने के कारण उन्हें भी नीले रंग का माना जाता है।

बुध कौशिक मुनि द्वारा लिखित रामरक्षा स्तोत्रम एक लोकप्रिय स्तुति है। बुध कौशिक मुनि ने भगवान राम की स्तुति करते हुए कहा है कि,

ध्यात्वा नीलोतपलश्यामं रामरपीलोचनम्। जानकीलक्ष्मनोपेटं जटामुकुट मंडिटम् ||

अर्थात: राम का ध्यान करते हैं जो नीले कमल के फूल की तरह काले हैं, जिनके नेत्र कमल के समान हैं, जो हमारे भगवान हैं, जिनके साथ सीता और लक्ष्मण हैं, जिनका सिर गुच्छेदार बालों से घिरा हुआ है।

जब सीता स्वयं अग्नि में प्रवेश करती हैं, तब सभी देवता लंका पहुंचते हैं और ब्रह्म वर्णन करते हैं कि वास्तव में राम कौन हैं और उनकी दिव्यता स्मरण करते हैं। 

सीता लक्ष्मीरभवानी विष्णुर्देवः कृष्णः प्रजापतिः||

वधार्थं रंकस्येह प्रविष्टो मानुषिंग तनुम्|

अर्थात: सीता देवी लक्ष्मी (भगवान विष्णु की दिव्य पत्नी) के अलावा और कोई नहीं हैं, जबकि आप भगवान विष्णु हैं। आपके पास एक चमकदार गहरा-नीला रंग है। आप सृजित प्राणियों के स्वामी हैं। रावण के संहार के लिए आपने यहां, इस धरती पर मानव शरीर में प्रवेश किया है।

भगवान कृष्ण श्रीमन्नारायण के आठवें अवतार माने जाते हैं। महाभारत में भगवान कृष्ण अर्जुन से कहते हैं “क्योंकि मेरा रंग गहरा नीला है, मुझे कृष्ण कहा जाता है। 

नीला, अनंत आकाश का रंग और साथ ही अनंत महासागर का रंग जिस पर भगवान विष्णु विराजमान रहते हैं। (Wikimedia Commons)

वैदिक साहित्य के अनुसार कृष्ण का दिव्य रूप ब्रह्म माया या निराकार ब्रह्म का है। नीला अनंत का रंग है जो अथाह है। आकाश और समुद्र की तरह जो कुछ भी अथाह है, वह नश्वर आंखों को नीले रंग के रूप में दिखाई देता है। इसलिए कृष्ण की आभा नीले रंग की बनी है और इसलिए उन्हें नीला कृष्णा भी कहा जाता है। श्रुति शास्त्र में भी कहा गया है कि “वह हमेशा के लिए श्याम रंग प्रकट करता है, जिसके भीतर सभी रंग निहित है।” उनका रंग भौतिक काला नहीं है। कृष्ण को श्यामसुंदर भी कहा जाता है, श्याम का अर्थ है काला और गहरा नीला और सुंदर का अर्थ है मोहक। 

यह भी पढ़ें :- राम एवं रामचरितमानस से क्यों डरते हैं लिब्रलधारी?

भगवान कृष्ण को नीलोत्पल दल श्यामां भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि, भगवान का रूप गहरे नीले रंग की कमल की पंखुड़ियों के रंग के सामान खूबसूरती से प्रकट होता है। भगवान ब्रह्मा ने अपनी ब्रह्म समिति में कहा है, “ईश्वरः परमः कृष्णः सैक सीद आनंद विग्रहः अनादिर अदिर गोविंदः सर्व करण करनाम”

अर्थात: भगवान कृष्ण गोविंदा या सर्वोच्च देवत्व हैं। कृष्ण के पास एक शाश्वत आनंदमय आध्यात्मिक शरीर है। वह सबका मूल है। वह सभी कारणों का प्रमुख कारण है।

इस प्रकार, सनातन धर्म में चरित्र की गहराई और बुराई से लड़ने की क्षमता वाले लोगों को नीले रंग के रूप में चित्रित किया गया है। जिस देवता में वीरता, संकल्प, कठिन परिस्थितियों से निपटने की क्षमता हो, स्थिर दिमाग हो, उन्हें नीले रंग के रूप में दर्शाया गया है। श्री कृष्ण ने अपना जीवन मानवता की रक्षा और बुराई को नष्ट करने में बिताया, इसलिए उनका रंग नीला माना जाता है। श्री राम सद्गुण, शील – स्नेह और शांत स्वभाव के माने जाते हैं। कमजोर और निर्दोष को बुराई से बचाना और एक सभ्य समाज की स्थापना करने वाले माने गए हैं| इसलिए भगवान राम का चित्रण भी नीले रंग के रूप में किया गया है। 

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