Saturday, January 23, 2021
Home ओपिनियन सैफई महोत्सव की जगह भव्य दीपोत्सव, क्यों समय लग गया अपनी संस्कृति...

सैफई महोत्सव की जगह भव्य दीपोत्सव, क्यों समय लग गया अपनी संस्कृति को समझने में?

जहाँ कभी सैफई महोत्सव पर बवाल हो उठता था आज वहां भव्य दीपोत्सव का आयोजन होता है। इतना समय क्यों लग गया अपनी संस्कृति को वापस एकत्र करने में?

चंद साल पहले उत्तरप्रदेश में सैफई महोत्सव हुआ करता था, जिसकी गूंज और चमक-धमक चारों ओर नज़र आती थी। यहाँ तक कि 2014 में केवल सैफई महोत्सव में ही 334 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे, जिस पर बहुत हंगामा भी हुआ था। उस समय सरकार में थे अखिलेश यादव जिनको उत्तर प्रदेश के लिए सबसे अच्छा नेता बताया गया। किन्तु अब उसी उत्तरप्रदेश में दीपावली के पर्व पर भव्य दीपोत्सव का आयोजन और नवरात्रों में भव्य रामलीला का आयोजन किया जाता है। जिसके उत्साह और भव्यता को देखने के लिए लोग विदेशों से भी आते हैं।

कभी सोचा था कि हरियाणा के कुरुक्षेत्र में गीता महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसमे लाखों विद्यार्थी अपने प्रतिभा को दिखाने के लिए एक मंच पर आएंगे। भारतीय संस्कृति और उसको बढ़ावा देने में इतना समय क्यों लग गया? इसके कारण कई हैं किन्तु जवाब देने वाले धर्मनिरपेक्ष होने का ढोंग रच देते हैं। भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना इन सबको एक मानसिकता को थोपने जैसा समझ आता है। गीता का ज्ञान अगर कोई विद्यार्थी पढ़ ले तो उसे हिन्दू मानसिकता से लिप्त बता दिया जाता है। जो कि गलत है क्योंकि ऐसे कई अन्य धर्म, सम्प्रदाय के भी लोग हैं जिन्हे गीता और वेद-पुराणों को पढ़ने और सीखने में मन लगता है। लेकिन केवल एक धर्म पर निशाना साधना उस धर्मनिरपेक्ष तबके के लिए बहुत आसान है।

कुछ समय पहले श्री राम मंदिर के निर्माण का उद्घोष हुआ है। जिस वजह से देश एवं विदेश में रह रहे भारतीय खासा उत्साहित हैं और लगभग सभी ने निर्माण पूर्ण होने के पश्चात रामलला के दर्शन का मन भी बना लिया है। किन्तु आश्चर्य इस बात का है कि अभी भी राम मंदिर के विषय पर लोगों में मतभेद है, जिसको और बढ़ावा नेताओं के भड़काऊ बयान भी दे रहें हैं। किन्तु उनका जवाब भी दोनों मोर्चों पर जागरुक जनता दे रही है। एक तो टीवी या कहीं भी इंटरव्यू में और सोशल मीडिया पर। आज देश में युवा क्या सोचता है वह सोशल मीडिया से ही पता चल जाता है। जिसका प्रमाण स्वयं राम जन्मभूमि के फैसले का समय था, जिसमे हर वक्त #ramjanmabhoomi यह हैश-टैग ट्रैंडिंग सूचि में शीर्ष पर रहता था।

यह भी पढ़ें: क्या आज हिंदुत्व की बात करना मतलब घृणा फैलाना है?

आज युवा भी आवाज़ उठाने में पीछे नहीं हैं और कई ‘तथाकथित असहिष्णुता’ के माहौल में साहस कर के आवाज़ भी उठा रहे हैं। अगर कोई भारत या भारतीय संस्कृति के खिलाफ कहता भी है, तो तुरंत उसे जवाब दे दिया जाता है। या तो ट्रोल के रूप में या फिर ट्रैंडिंग के रूप में।

किन्तु ट्विटर भी हमारी बर्दाश्त की सीमा मापने में लगा हुआ है? कभी भारत के शीर्ष नेताओं का अकॉउंट बंद करके या कभी लद्दाख को चीन की सीमा बताकर। खैर, इस विषय पर भी चर्चा करेंगे। मगर आज के लिए हमे कुछ असरदार कदम उठाने की जरूरत है। जिस से भड़काने वालों पर लगाम लगाई जा सके और भारतीय संस्कृति का विश्वभर में बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार हो सके।

POST AUTHOR

Shantanoo Mishra
Poet, Writer, Hindi Sahitya Lover, Story Teller

जुड़े रहें

6,018FansLike
0FollowersFollow
177FollowersFollow

सबसे लोकप्रिय

धर्म निरपेक्षता के नाम पर हिन्दुओ को सालों से बेवकूफ़ बनाया गया है: मारिया वर्थ

यह आर्टिक्ल मारिया वर्थ के ब्लॉग पर छपे अंग्रेज़ी लेख के मुख्य अंशों का हिन्दी अनुवाद है।

विज्ञापनों पर पानी की तरह पैसे बहा रही केजरीवाल सरकार, कपिल मिश्रा ने लगाया आरोप

पिछले 3 महीनों से भारत, कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है। इन बीते तीन महीनों में, हम लगातार राज्य सरकारों की...

भारत का इमरान को करारा जवाब, दिखाया आईना

भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए भाषण पर आईना दिखाते हुए करारा जवाब दिया...

गाय के चमड़े को रक्षाबंधन से जोड़ने कि कोशिश में था PETA इंडिया, विरोध होने पर साँप से की लेखक शेफाली वैद्य कि तुलना

आज ट्वीटर पर मचे एक बवाल में PETA इंडिया का हिन्दू घृणा खुल कर सबके सामने आ गया है। ये बात...

जब इन्दिरा गांधी ने प्रोटोकॉल तोड़ मुग़ल आक्रमणकारी बाबर को दी थी श्रद्धांजलि

ये बात तब की है जब इन्दिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री हुआ करती थी। वर्ष 1969 में इन्दिरा गांधी काबुल, अफ़ग़ानिस्तान के...

क्या अमनातुल्लाह खान द्वारा लिया गया ‘दान’, दंगों में खर्च हुए पैसों की रिकवरी थी? बड़ा सवाल!

फरवरी महीने में हुए दिल दहला देने वाले हिन्दू विरोधी दंगों को लेकर दिल्ली पुलिस आक्रमक रूप से लगातार कार्यवाही कर रही...

दिल्ली दंगा करवाने में ‘आप’ पार्षद ताहिर हुसैन ने खर्च किए 1.3 करोड़ रूपए: चार्जशीट

इस साल फरवरी में हुए हिन्दू विरोधी दिल्ली दंगों को लेकर आज दिल्ली पुलिस ने कड़कड़डूमा कोर्ट में चार्ज शीट दाखिल किया।...

रियाज़ नाइकू को ‘शिक्षक’ बताने वाले मीडिया संस्थानो के ‘आतंकी सोच’ का पूरा सच

कौन है रियाज़ नायकू? कश्मीर के आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन का आतंकी कमांडर बुरहान वाणी 2016 में ...

हाल की टिप्पणी