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देश

आईआईटी ने तकनीक की मदद से साफ पानी उपलब्ध कराने की पहल की!

देश में जिन स्थानों पर जनता को पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं था, वहां देश के कुछ आईआईटी ने तकनीक की मदद से साफ पानी उपलब्ध कराने की पहल की है।

देश में जिन स्थानों पर जनता को पीने (Water) का साफ पानी उपलब्ध नहीं था, वहां देश के कुछ आईआईटी (IIT) ने तकनीक (Technology) की मदद से साफ पानी उपलब्ध कराने की पहल की है। यह कोशिश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की प्रेरणा से हुई है। दरअसल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आआईटी) खड़गपुर (Kharagpur) स्थित तकनीकी उत्कृष्टता केंद्र इन दिनों जल शुद्धिकरण पर फोकस कर रहा है। केंद्र ने देश के कई राज्यों में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की दिशा में कार्य किया है।


आईआईटी (IIT) खड़गपुर (Kharagpur) स्थित जल शुद्धिकरण तकनीकी उत्कृष्टता केंद्र ने एक कम लागत वाली नैनो फिल्टरेशन (Filtration) आधारित तकनीक विकसित की है, जिसने तेलंगाना (Telangana) और आंध्र प्रदेश (Andra pardesh) में तीन अलग-अलग स्थानों पर 25 हजार लोगों की स्वच्छ पेयजल तक पहुंच सुनिश्चित की है। यह पानी भारी धातुओं से मुक्त है, जो स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक माने जाते हैं।

आईआईटी गुवाहाटी ने स्कूल में जलशोधन संयंत्र स्थापित किया है। (Pexel)

असम (Aasam) में गुवाहाटी (Guwahati) आईआईटी (IIT) ने भी इस तरह की पहल की है। दरअसल असम (Aasam) के उत्तर गुवाहाटी (North Guwahati) के एक प्राथमिक स्कूल में बच्चे ऐसा पानी पीते थे। जिसमें अत्यधिक आयरन (Iron) और सीओडी पाया गया था। पानी में बदबू भी आती थी मगर अब आईआईटी गुवाहाटी ने स्कूल में जलशोधन संयंत्र स्थापित किया है। इससे लठियाबागीछा प्राइमरी स्कूल के बच्चों को पानी की समस्या से छुटकारा मिल गया है।

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इस संयंत्र को डीएसटी के सहयोग से रसायन मुक्त इलेक्ट्रोकोएग्यूलेशन तकनीक (Electrocution techniqueके आधार पर विकसित किया गया है और यह पानी में मौजूद आयरन और ऑर्सेनिक की मात्रा कम करने, उसमें कुल घुलित सॉल्वेंट, रासायनिक ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी) (COD) , जैविक ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) (BOD) को बीआईएस की निर्धारित सीमा से नीचे लाने में सक्षम है। (आईएएनएस-SM) 

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जो लोग हो चुके है कोविड संक्रमित उनके लिए काल है ओमिक्रॉन! [File Photo]

सीएनएन(CNN) की एक रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका में शोधकर्ताओं के एक दल ने शोध किया है। उन्होने कहा है कि उन्हें कुछ सबूत मिले हैं कि जो लोग एक बार कोविड(Covid 19) से संक्रमित हो गए थे, उनकी बीटा(Beta) या डेल्टा वैरिएंट (delta variant)की तुलना में ओमिक्रॉन वैरिएंट(Omicron Variant) से दोबारा संक्रमित होने की संभावना अधिक है। साथ ही साथ यह भी कहा गया है कि अभी इतनी जल्दी निश्चित रूप से इस बारे में कुछ कहना तो जल्दबाजी होगी, मगर हाल ही में दूसरी बार के संक्रमण में वृद्धि ने उन्हें संकेत दिया है कि ओमिक्रॉन में लोगों को फिर से संक्रमित करने की अधिक संभावना है। दक्षिण अफ्रीका में शोधकर्ताओं के एक दल ने कहा कि

अपको बता दें, ओमिक्रॉन(Omicron Variant) की पहचान हाल ही में नवंबर महीने में की गई थी, लेकिन इसने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य वैश्विक स्वास्थ्य अधिकारियों को चिंतित कर दिया है, जिन्होंने इसके कई म्यूटेंट बनने के कारण इसे खतरनाक बताया है। इसके बारे में बताया जा रहा है कि यह अन्य वैरिएंट की तुलना में अधिक संक्रामक तो है ही, साथ ही इसमें प्रतिरक्षा प्रणाली से बचने की क्षमता भी है।

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पराग अग्रवाल, ट्विटर सीईओ (Twitter)

नए ट्विटर सीईओ (Twitter CEO) पराग अग्रवाल (Parag Agrawal) ने कंपनी का पुनर्गठन शुरू कर दिया है और दो वरिष्ठ अधिकारी पहले ही पुनर्गठन योजना के हिस्से के रूप में पद छोड़ चुके हैं। द वाशिंगटन पोस्ट की एक ईमेल का हवाला देते हुए एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्विटर के मुख्य डिजाइन अधिकारी डैंटली डेविस और इंजीनियरिंग के प्रमुख माइकल मोंटानो दोनों ने पद छोड़ दिया है। डेविस 2019 में तो मोंटानो 2011 में कंपनी में शामिल हुए थे।

शुक्रवार देर रात मीडिया रिपोर्ट्स में ट्विटर (Twitter) के एक प्रवक्ता के हवाले से कहा गया, "डैंटली का जाना हमारे संगठनात्मक मॉडल को एक ऐसे ढांचे के इर्द-गिर्द शिफ्ट करने पर केंद्रित है, जो कंपनी के एक प्रमुख उद्देश्य का समर्थन करता है।"

प्रवक्ता ने कहा, "इसमें शामिल व्यक्तियों के सम्मान में इन परिवर्तनों पर साझा करने के लिए हमारे पास और विवरण नहीं है।"

एक ईमेल में अग्रवाल (Parag Agrawal) ने लिखा था कि कंपनी ने हाल ही में महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अपनी रणनीति को अपडेट किया है, और मुझे विश्वास है कि रणनीति साहसिक और सही होनी चाहिए।

इसमें कहा गया, "लेकिन हमारी महत्वपूर्ण चुनौती यह है कि हम इसके खिलाफ कैसे काम करते हैं और परिणाम देते हैं। इसी तरह हम ट्विटर को अपने ग्राहकों, शेयरधारकों और आप में से प्रत्येक के लिए सर्वश्रेष्ठ बना सकते हैं।" jn

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यूट्यूब ऐप ने सभी वीडियो के लिए शुरू की 'लिसनिंग कंट्रोल' सुविधा। (Wikimedia Commons)

यूट्यूब (Youtube) ने कथित तौर पर एंड्रॉइड और आईओएस यूजर्स के लिए एक 'सुनने का कंट्रोल' (Listening Control) सुविधा शुरू की है। इस नई सुविधा का फायदा केवल यूट्यूब प्रीमियम ग्राहक उठा सकते हैं।

9टु5गूगल (9to5 google) की रिपोर्ट के अनुसार, लिसनिंग कंट्रोल वीडियो विंडो के नीचे की हर चीज को एक विरल शीट से बदल देता है। प्ले/पाउस, नेक्स्ट/पिछला और 10-सेकंड रिवाइंड/फॉरवर्ड मुख्य बटन हैं।

लिसनिंग कंट्रोल का उपयोग कर के, यूट्यूब ऐप उपयोगकर्ता चाहें तो नए गीतों को प्लेलिस्ट में भी सहेज सकते हैं।

यह सुविधा अब यूट्यूब (Youtube) एंड्रॉइड और आईओएस यूजर्स के लिए व्यापक रूप से उपलब्ध है और यह केवल यूट्यूब प्रीमियम यूजर्स के लिए उपलब्ध है।

Google Play Store, यूट्यूब ऐप पहले ही गूगल प्ले स्टोर पर 10 बिलियन डाउनलोड को पार कर चुकी है। [Pixabay]

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