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थोड़ा हट के

बड चिप विधि से गन्ने का पौध तैयार कर आत्मनिर्भर बन रही ग्रामीण महिलाएं

उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गन्ना विभाग बड चिप विधि से गन्ने का पौध बनाने का प्रशिक्षण दे रहा है। अब तक करीब 36 जिलों में इस बाबत 812 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है। इनमें 9,117 महिला उद्यमियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। राज्य

उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गन्ना विभाग बड चिप विधि से गन्ने का पौध बनाने का प्रशिक्षण दे रहा है। अब तक करीब 36 जिलों में इस बाबत 812 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है। इनमें 9,117 महिला उद्यमियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। राज्य सरकार द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, महिला समूहों द्वारा अब तक 3.51 करोड़ सीडलिंग की स्थापना की गई है। इनकी बिक्री से इन समूहों को 10.53 करोड़ रुपए की आय होगी। अब तक 9.33 करोड़ की आय हो भी चुकी है।

मालूम हो कि योगी सरकार ने हाल में दो महत्वपूर्ण मिशनों की शुरुआत की है। शारदीय नवरात्रि से शुरू होकर चैत्र नवरात्रि तक चलने वाला मिशन शक्ति। इसमें महिलाओं के सम्मान और आत्मनिर्भरता पर जोर है। 6 जनवरी को सरकार ने इसी तरह खेतीबाड़ी के समग्र विकास, किसानों की आय बढ़ाकर उनको खुशहाल बनाने के लिए मिशन किसान कल्याण की शुरुआत की है। इसमें भी सरकार का स्पष्ट आदेश है कि मिशन शक्ति अभियान को मजबूती देने, खेतीबाड़ी में महिलाओं के श्रम को पहचान दिलाने के लिए महिला किसानों को खास महत्व दिया जाए। गन्ने की बडचिप विधा का भी यही मकसद है।

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यह कल्याण और मिशन शक्ति में भी मददगार बन रहा है। इन अभियानों के क्रम में इस विधा से भी घर के लॉन या किचन गार्डन में भी गन्ने की नर्सरी तैयार की जा सकेगी। वह भी कम बीज में। इस विधा से तैयार पौधे का जमाव 95 फीसद से अधिक होता है। गेहूं, धान की कटाई के बाद सीधे खेत में पौधरोपण करने समय और लागत भी बचती है। उपज करीब सवाया हो जाती है। कोई पौध खराब हो तो उसकी जगह नई पौध भी लगाई जा सकती है। (आईएएनएस)

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बांके बिहारी मंदिर में होली

कहा जाता है कि अगर किसी इंसान को सुकून चाहिए होता है तो उसे वृंदावन या मथुरा की गलियों में जाना चाहिए, क्योंकि इन्ही गलियों में खेलते हुए कृष्ण जी का बचपन बीता हैं। वृंदावन हो या मथुरा यहां हर दूसरा व्यक्ति कृष्ण भक्ति में लीन नज़र आता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की वह हिंदुस्तानी है या कहीं और से आया है। हर कोई कृष्ण की महिमा में डूबा हुआ होता है। वैसे तो वृंदावन में कई मंदिर है जहां हर रोज हज़ारों की संख्या में भक्त आते हैं और अपनी हाजिरी लगवाते हैं, लेकिन बांके बिहारी मंदिर की बात अलग है। यहां भी भक्तों का मेला लगा रहता है, पर हर किसी को कुछ बातें मालूम नहीं है। ऐसे ही कुछ तथ्यों के बारे में इस आर्टिकल में बताया गया है।

1) बांके बिहारी मंदिर की स्थापना स्वामी श्री हरिदास जी ने की थी। वह श्री कृष्ण के भक्त थे और महान गायक तानसेन के गुरु थे। वह अपने गीत से श्री कृष्ण को प्रसन्न करने की कोशिश किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि श्री हरिदास जी की भक्ति से प्रसन्न हो श्री कृष्ण ने दर्शन दिए थे।

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(instagram , virat kohali)

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और अनुष्का

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और उनके फाउंडेशन ने यहां मड, मलाड में आवारा पशुओं के लिए एक ट्रॉमा और रिहेब सेंटर का उद्घाटन किया है। इसके पहले इस साल की शुरूआत में, भारतीय कप्तान कोहली ने कहा था कि वह मुंबई में दो पशु देखभाल सुविधाएं स्थापित कर रहे हैं।
कोहली ने अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा को शहर में आवारा जानवरों के सामने आने वाली कठिनाइयों को देखने का श्रेय दिया।

अभिनेत्री अनुष्का ने कई मौकों पर जानवरों के कल्याण और उनके अधिकारों के प्रति अपना समर्थन दिया है। अनुष्का के जानवरों के प्रति दीवानगी से प्रेरित होकर कोहली अपने फाउंडेशन के जरिए आवारा जानवरों की मदद करने के मौके तलाश रहे हैं।

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भीड़ में चलते लोग।

मौजूदा समय में विश्व की जनसंख्या 7 अरब से भी ज्यादा है। इस जनसंख्या को यहां तक पहुंचने में कई सदियां लग गई है। समस्त विश्व को 1 अरब से 2 अरब तक की आबादी होने में 100 सालों का समय लगा था। लेकिन 2 अरब से 3 अरब होने में मात्र 30 साल लगे, वहीं 3 से 4 अरब होने में 15 साल लगे थे। उसके बाद से यह अंतर और कम हो गया। औद्योगिक क्रांति के बाद अठारहवीं शताब्दी में विश्व जनसंख्या में विस्फोट हुआ था। तकनिकी प्रगति की वजह से मृत्यु दर में गिरावट आई जो कि जनसंख्या विस्फोट का एक बहुत बड़ा कारण बना। भारत में भी जनसंख्या विस्फोट देखा गया था।

1951 में भारत की जनसंख्या मात्र 36.1 करोड़ थी जो 2011 की जनगणना में 121.02 करोड़ हो गई। और अब यह लगभग 135 करोड़ के ऊपर है। अगर किसी क्षेत्र की जनसंख्या बढ़ती है तो उसका मतलब है कि वहाँ का मृत्यु दर कम है और जन्म दर ज्यादा। यह दर्शाता है कि उस जगह पर चिकित्सकीय सुविधाएं अच्छी है। लेकिन बढ़ती जनसंख्या देश के लिए मुसीबत का सबब भी बन सकती है, क्योंकि जनसंख्या में वृद्धि हुई है किन्तु साधनों में नहीं। भारत के साथ भी यही समस्या है। लगातार जनसंख्या बढ़ने से कई जगहों पर साधनों की कमी महसूस होने लगी है।

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