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बुंदेलखंड में पानी की खातिर महिलाओं ने कड़ी मशक्कत कर पहाड़ी को काट दिया। महिलाओं की दिलेरी की यह घटना इन दिनों चर्चा में है। दावा किया जा रहा है कि 200 महिलाओं ने मिलकर पहाड़ी को काटा और अपने गांव को पानी की समस्या से निजात दिला दी। इस मुहिम के लिए महिलाओं को 19 साल की लड़की बबीता राजपूत ने प्रेरित किया और उनकी अगुवाई की। यह कहानी है छतरपुर जिले के बड़ा मलहरा क्षेत्र के अंगरौठा गांव की। यहां कभी पानी का संकट हुआ करता था। यहां एक तरफ पहाड़ है और दूसरी तरफ नदी व एक छोटा सा तालाब भी है। जब नदी का पानी सूख जाता था, तब तालाब से ही लोगों की जरूरत पूरी होती थी। मई-जून आते तक पानी का संकट बढ़ जाता था। यहां की लड़की बबीता राजपूत ने मगर हालात बदलने की ठान ली।


बीए की डिग्री हासिल कर चुकी बबीता राजपूत ने महिलाओं को पहाड़ी को काटकर नदी और तालाब के पानी का उपयोग करने की अपनी योजना समझाई। सभी महिलाएं इसके लिए तैयार हो गईं। योजना के मुताबिक, गांव की 200 महिलाओं की मदद से बबीता ने 107 मीटर लंबी खाई खोदकर पहाड़ को काट दिया। इससे गांव के लोग पानी के संकट से मुक्त हो गए। असंभव को संभव कर दिखाने वाली लड़की और मेहनती महिलाओं की गांव ही नहीं, समूचे इलाके के लोगों ने सराहना की।

गांव के किसान रामरतन राजपूत ने मीडिया से कहा कि साल 2020 में उनके गांव में केवल दो बार बारिश हुई, लेकिन इतनी कम बारिश के बावजूद, 10 कुएं और पांच बोरवेल सूखे नहीं। लगभग 12 एकड़ के खेत में भी पर्याप्त पानी है।

बबीता के मुताबिक, वर्ष 2018 तक यहां पानी का भारी संकट हुआ करता था। सालों से गांव के निवासी पानी के संकट से जूझ रहे थे। जबकि उनके आसपास के क्षेत्र में तालाब था जो सूख जाता था । इसके अलावा थोड़ा सा बारिश का पानी एक पहाड़ी के दूसरी तरफ बह जाता और बछेरी नदी में विलीन हो जाता था।

बारिश के पानी को रोकने और एक रास्ते से तालाब तक पानी लाने की योजना पर काम किया।(आईएएनएस)

बबीता ने बारिश के पानी को रोकने और एक रास्ते से तालाब तक पानी लाने की योजना पर काम किया। इसके लिए उसे वन विभाग से अनुमति हासिल करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। लोगों को इकट्ठा करने और पानी संरक्षण के लिए बबीता और अन्य लोगों को जागृत करने में परमार्थ समाजसेवी संस्थान ने बड़ी भूमिका निभाई। सामूहिक प्रयास हुए और पहाड़ी को काट दिया गया। एक खाई के जरिए नदी को तालाब से जोड़ दिया गया है।

यह भी पढ़ें: बुंदेलखंड में दफन होते जल स्रोत

गांव वाले बताते हैं कि तालाब के खाली हिस्से पर कुछ किसानों ने खेती में करना शुरू कर दिया था, और अपने लाभ के लिए सीमित जल संसाधन का उपयोग कर रहे थे। यदि बारिश का पानी झील में भर जाता, तो वे जमीन खो देते। इसलिए, उन्होंने इस संबंध में किसी भी संभावित विकास का विरोध किया। उसके बावजूद प्रयास किए गए और सफल रहे। बछेड़ी नदी का पानी तालाब तक एक खाई के माध्यम से आया।

महिलाओं द्वारा पहाड़ी को काटे जाने की इलाके में खूब चर्चा है, साथ ही सवाल भी उठे हैं। एक अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा कि पहाड़ी काटी गई है, बछेड़ी नदी का पानी तालाब तक लाने के प्रयास हुए हैं, मगर यह पूरी तरह सच नहीं है कि महिलाओं ने पहाड़ी को काटा। सच यह है कि पहाड़ी को जेसीबी मशीन और डायनामाइट के जरिए काटा गया था। महिलाओं ने मिट्टी खुदाई में मदद जरूर की।(आईएएनएस)

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रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल छोटी और लंबी दूरी के वायरलेस चाजिर्ंग उपकरणों पर काम कर रहा है। (Pixabay)

एप्पल (Apple) कथित तौर पर एक ऐसे चार्जर पर काम कर रहा है जो एक साथ कई डिवाइस, एक आईफोन, एयरपोड्स और वॉच को पावर दे सकता है।

मैकरियूमर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 'पावर ऑन' न्यूजलेटर के लेटेस्ट एडीशन में मार्क गुरमन ने कंपनी की भविष्य की वायरलेस चाजिर्ंग तकनीक के बारे में कुछ दिलचस्प जानकारी का खुलासा किया।

उन्होंने लिखा, "मेरा यह भी मानना है कि एप्पल (Apple) छोटी और लंबी दूरी के वायरलेस चाजिर्ंग उपकरणों पर काम कर रहा है और यह एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता है जहां एप्पल के सभी प्रमुख उपकरण एक-दूसरे को चार्ज कर सकते हैं। कल्पना कीजिए कि एक आईपैड एक आईफोन चार्ज कर रहा है और फिर वह आईफोन एयरपोड्स या एक एप्पल घड़ी चार्ज कर रहा है।"

apple , wireless charger, Iphone, iPod Chargers एप्पल कथित तौर पर एक ऐसे चार्जर पर काम कर रहा है जो एक साथ कई डिवाइस को पावर दे सकता है। [Wikimedia Commons]

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झारखंड के नोआमुंडी में खदान की कमान महिलाओं के हाथ में सौंपेगी टाटा स्टील कंपनी। [Wikimedia Commons]

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टाटा स्टील (Tata Steel) के आयरन ओर एंड क्वेरीज डिविजन के महाप्रबंधक ए. के. भटनागर ने पत्रकारों को बताया कि नोआमुंडी स्थित कंपनी की आयरन ओर माइन्स में सभी शिफ्टों के लिए 30 सदस्यों वाली महिलाओं की टीम की तैनाती की जा रही है। खदान को स्वतंत्र रूप से महिलाओं के हाथों संचालित करने का यह टास्क कंपनी ने महिला सशक्तीकरण की परियोजना तेजस्विनी-2.0 के तहत लिया था और अब इसे सफलतापूर्वक लागू करने की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं।

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