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दुनिया

World AIDS Vaccine Day 2021: HIV से भी लड़े थे, कोरोना से भी जीतेंगे।

HIV- AIDS को लेकर जागरूकता बहुत कम है और इसके टीकाकरण के लिए लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिवर्ष 18 मई को विश्व AIDS टीकाकरण दिवस मनाया जाता है|

आज पूरा विश्व कोरोना (Corona) जैसी भयानक और जानलेवा बीमारी से जूझ रहा है। विश्व भर में वैज्ञानिक, शोधकर्ता, कोरोना वायरस को मात देने के लिए दिन – रात प्रयास कर रहे हैं। अपने शोध के माध्यम से प्रभावशाली वैक्सीन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इस बीच हमें यह भी याद रखना चाहिए कि, इससे पहले भी ऐसे कई घातक बीमारियां रह चुकी है, जिसने पूरे विश्व को हिलाकर रख दिया था। लेकिन उन सभी बीमारियों से आज बड़े हद तक लड़ा जा चुका है। 

ऐसे ही इतिहास में बहुत समय पहले एक जानलेवा बीमारी HIV- AIDS फैली थी। यह असुरक्षित यौन संबंधों से होने वाली एक खतरनाक बीमारी है। उस वक्त AIDS ने बड़े स्तर पर लोगों को प्रभावित किया था। जिसके बाद लंबे समय तक चले वैज्ञानिकों के शोध के बाद इस बीमारी के खिलाफ वैक्सीन बनाने में कामयाबी मिली थी और इसलिए HIV- AIDS के टीकाकरण के लिए लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिवर्ष 18 मई को विश्व AIDS टीकाकरण दिवस मनाया जाता है। यह दिन इसलिए भी मनाया जाता है, ताकि उन सभी वैज्ञानिकों को धन्यवाद किया जा सके, जिन्होंने इस बीमारी के खिलाफ वैक्सीन की एक सफल खोज की थी। इस वर्ष विश्व AIDS दिवस की थीम “वैश्विक एकजुटता” है। 


अभी तक भी HIV को पूरी तरीके से खत्म करने के लिए कोई दवा नहीं है, लेकिन टीके के माध्यम से इससे बचाव किया जाता है। (Pixabay)

भारत में AIDS का इतिहास काफी पुराना हो चुका है। लेकिन आज भी लोगों में AIDS को लेकर जागरूकता बहुत कम है। लोग इसके लक्षणों को नजरअंदाज करते है। कई लोग अब भी इस बीमारी को बताने से डरते हैं। आज भले ही विज्ञापनों, समाचार पत्रों और टीवी आदि के माध्यम से इसके बारे में जागरूकता फैलाई जाती है। लेकिन लोग अब भी इस बीमारी से डरते हैं और इसे छुपाते हैं। AIDS एक बीमारी जरूर है, लेकिन अब यह उतनी जानलेवा नहीं है, अगर समय पर इसका इलाज कराया जाए। इस बीमारी का इलाज अब संभव है और यही बात लोगों को समझाने के लिए इस दिन विभिन्न संस्थाएं मिलकर यह काम करती हैं। हालांकि अभी तक भी HIV को पूरी तरीके से खत्म करने के लिए कोई दवा नहीं है, लेकिन टीके के माध्यम से इससे बचाव किया जाता है। 

यह भी पढ़ें :- एचआईवी पीड़ित को कोरोना से ज्यादा खतरा : रिपोर्ट

इतिहास क्या है?

विश्व AIDS टीकाकरण दिवस पहली बार 18 मई 1998 में मनाया गया था। अमेरिकी (America) राष्ट्रपति बिल क्लिंटन (Bill Clinton) ने आज ही के दिन 1998 में  मॉर्गन स्टेट यूनिवर्सिटी में एक संदेश दिया था। इसी संदेश के आधार स्वरूप विश्व AIDS टीकाकरण (Vaccination) दिवस को मनाने का निर्णय लिया गया था। बिल क्लिंटन ने कहा था “हम एक दशक में AIDS को टीके के माध्यम से खत्म करने का सफल प्रयास करेंगे।” क्लिंटन ने अपने संदेश के माध्यम से लोगों में इस बीमारी को लेकर को जो भय था उसे दूर करने का प्रयास किया था। उन्होंने उस समय पूरे विश्व को विश्वास दिलाया था कि, हम इस बीमारी को हरा सकते हैं। 

इसलिए तभी से टीके की निरंतर आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए, हर साल इस दिन को यानी 18 मई को HIV वैक्सीन जागरूकता दिवस या विश्व AIDS टीकाकरण दिवस के रूप में मनाया जाता है और यह दिन हमें इसलिए भी याद करना चाहिए की ऐसी कोई बीमारी नहीं है, जिसका इलाज संभव न हो। HIV से भी लड़े थे, कोरोना से भी जीतेंगे। कोरोना वायरस के खिलाफ चल रही इस जंग में भी सम्पूर्ण विश्व को सफलता जरूर मिलेगी। 

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आईपीएल में रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) का एक मैच (wikimedia commons)

भारत के क्रिकेट टीम के कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने एक के बाद टीम से अपनी कप्तानी छोड़ने का जैसे ऐलान किया वैसे हि , उनके चाहने वाले , प्रशंसकों और साथी खिलाडियों ने अपनीं प्रतिक्रिया देना शुरू कर दी । इसी बीच दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज डेल स्टेन का कहना है कि आईपीएल की टीम का नेतृत्व करने का दबाव और युवा परिवार का होना रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) के कप्तान विराट कोहली के इस आईपीएल के बाद टीम की कप्तानी छोड़ने के फैसले का कारण हो सकता है। आरसीबी की टीम की और से रविवार की देर रात यह घोषणा की गई , कि विराट कोहली आईपीएल 2021 सीजन के बाद टीम की कप्तानी छोड़ देंगे । इस के पहले कोहली ने कुछ दिन पहले ही टी20 विश्व कप के बाद भारतीय टीम के टी20 प्रारूप की कप्तानी छोड़ने का भी फैसला किया था।


डेल स्टेन ने आगे कहा कि, " विराट कोहली आरसीबी टीम के साथ शुरू से जुड़े हैं। मुझे नहीं पता, जैसे-जैसे जीवन आगे बढ़ता है आप चीजों को प्राथमिकता देने लगते हैं। कोहली का नया यूवा परिवार है । उन्हें अपनी पर्शनल लाइफ भी देखना है ।
डेल ने यह भी कहा कि , "हो सकता है, उस जिम्मेदारी (कप्तानी) से थोड़ा सा त्याग करना और सिर्फ अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होना उनके करियर के लिए इस समय एक अच्छा निर्णय है।"

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दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन (wikimedia commons)

दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी में शुमार अमेजन को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है । द मॉर्निग कॉन्टेक्स्ट की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन ने भारत में अपने कानूनी प्रतिनिधियों के आचरण की जांच शुरू कर दी है। एक व्हिसलब्लोअर शिकायत के आधार पर यह जांच हुई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि अमेजन द्वारा कानूनी शुल्क में भुगतान किए गए कुछ पैसे को उसके एक या अधिक कानूनी प्रतिनिधियों द्वारा घूस में बदल दिया गया है।

काम करने वाले दो लोगों ने जो कि अमेजन की इन-हाउस कानूनी टीम के साथ है , उन्होंने मिलकर पुष्टि की कि अमेजन के वरिष्ठ कॉर्पोरेट वकील राहुल सुंदरम को छुट्टी पर भेजा गया है। एक संदेश में उन्होंने कहा, "क्षमा करें, मैं प्रेस से बात नहीं कर सकता।" हम स्वतंत्र रूप से यह पता नहीं लगा सके कि आंतरिक जांच पूरी हो चुकी है या प्रगति पर है।

कई सवालों के एक विस्तृत सेट के जवाब में, अमेजन के प्रवक्ता ने कहा, "भ्रष्टाचार के लिए हमारे पास शून्य सहनशीलता है। हम अनुचित कार्यो के आरोपों को गंभीरता से लेते हैं, उनकी पूरी जांच करते हैं, और उचित कार्रवाई करते हैं। हम विशिष्ट आरोपों या किसी की स्थिति पर इस समय जांच या टिप्पणी नहीं कर रहे हैं इस समय जांच।"

\u0911\u0928\u0932\u093e\u0907\u0928 \u0930\u093f\u091f\u0947\u0932\u0930 \u0905\u092e\u0947\u091c\u0928 दुनिया की सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन कंपनी का लोगो (wikimedia commons)

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भारतीय जनता पार्टी भाजपा का चुनावी चिन्ह (wikimedia commons)

अभी-अभी भारत के पंजाब राज्य में एक बड़ी राजनेतिक घटना घटी जब वंहा का मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और सत्ता दल पार्टी ने राज्य ने नया मुख्यमंत्री बनाया । पंजाब में एक दलित को मुख्यमंत्री बना कर कांग्रेस ने एक बड़ी सियासी चाल खेल दी है। अब कांग्रेस इसका फायदा अगले साल होने जा रहे राज्यों के विधानसभा चुनाव में उठाने की रणनीति पर भी काम करने जा रही है । उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सियासी पारे को गरम कर दिया है कांग्रेस की इस मंशा ने।

कांग्रेस नेता हरीश रावत जो कि पंजाब में दलित सीएम के नाम का ऐलान करने वाले वो उत्तराखंड से ही आते हैं, अतीत में प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और आगे भविष्य में भी सीएम पद के दावेदार हैं, इसलिए बात पहले इस पहाड़ी राज्य के सियासी तापमान की करते हैं। साढ़े चार साल के कार्यकाल में भाजपा राज्य में अपने दो मुख्यमंत्री को हटा चुकी है और अब तीसरे मुख्यमंत्री के सहारे राज्य में चुनाव जीतकर दोबारा सरकार बनाना चाहती है। इसलिए भाजपा इस बात को बखूबी समझती है कि हरीश रावत उत्तराखंड में तो इस मुद्दें को भुनाएंगे ही।

बात करे उत्तराखंड राज्य कि तो यहा पर आमतौर पर ठाकुर और ब्राह्मण जाति ही सत्ता के केंद्र में रहती है, लेकिन अब समय बदल रहा है राजनीतिक दल भी दलितों को लुभाने का विशेष प्रयास कर रहे हैं। दरअसल, उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है , जिसमें 13 सीट अनुसूचित जाति और 2 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। मसला सिर्फ 13 आरक्षित सीट भर का ही नहीं है। उत्तराखंड राज्य के 17 प्रतिशत से अधिक दलित मतदाता 22 विधानसभा सीटों पर जीत-हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इसके साथ ही कुल 36 सीटों पर जीत हासिल करने वाली पार्टी राज्य में सरकार बना लेती है।

brahmin in uttrakhand उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है (wikimedia commons)

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