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दुनिया

World Environment Day: प्रकृति के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाएं।

विश्व पर्यावरण दिवस, हमारे पर्यावरण की रक्षा के लिए दुनिया भर में जागरूकता और उचित कार्रवाई को प्रेरित करने के लिए मनाया जाता है।

विश्व पर्यावरण दिवस 2021 थीम : पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली| (NewsGramHindi, साभार: Pixabay)

विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day 2021), हमारे पर्यावरण की रक्षा के लिए दुनिया भर में जागरूकता और उचित कार्रवाई को प्रेरित करने के लिए मनाया जाता है। 1972 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 5 जून को “विश्व पर्यावरण दिवस” के रूप में नामित किया था। और पहली बार “केवल एक पृथ्वी” के नारे के साथ सन 1974 में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया था। विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) पर्यावरण के सामने आने वाली समस्याएं, जैसे वायु प्रदूषण, प्लास्टिक प्रदूषण, पेड़ों की लगातार कटाई जैसे इन सभी कारणों को रोकने के लिए और जागरूकता बढ़ाने के इस मंच को तैयार किया गया था। 

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, वैश्विक आधिकारिक समारोह 4-5 जून को एक वर्चुअल लॉन्च गाला कार्यक्रम के माध्यम से आयोजित किया जाएगा। इस वर्ष इस कार्यक्रम की मेजबानी पाकिस्तान (Pakistan) कर रहा है। इस कार्यक्रम में विश्व भर के नेताओं, हस्तियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रेरक संदेशों को भी शामिल किया जाएगा। 


COVID-19 का हमारे पर्यावरण पर प्रभाव।

हम सभी जानते हैं कि, हमारी दुनिया एक अभूतपूर्व महामारी से जूझ रही है। कोरोना वायरस (Corona Virus) की महामारी ने एक बात की तो पुष्टि कर दी है कि, मनुष्यों ने पारिस्थितिकी तंत्र को बहुत नुकसान पहुंचाया है। इसलिए कोरोना वायरस के वैश्विक संकट ने हमें प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र और बदलती जैव विविधता पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

पहली बार “केवल एक पृथ्वी” के नारे के साथ सन 1974 में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया था। (Pixabay)

विश्व पर्यावरण दिवस 2021 थीम : पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली

पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) की बहाली का अर्थ होता है, प्रकृति के साथ हो रही क्षति को रोकना। ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना, अपने शहर को हरा – भरा करना, नदियों – तटों को साफ रखना उसकी सफाई करना। इस विश्व पर्यावरण दिवस पर पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के साथ – साथ संयुक्त राष्ट्र अपने दशक की भी शुरुआत करेगा। 

संयुक्त राष्ट्र दशक 2021 से 2030 तक चलेगा। जो की सतत विकास लक्ष्यों की समय सीमा भी है और वैज्ञानिकों ने भी विनाशकारी जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए इसे अंतिम अवसर के रूप में पहचान की है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र दशक एक मजबूत वैश्विक आंदोलन का निर्माण कर रहा है। इसके अतिरिक्त पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता के बारे में युवाओं के दृष्टिकोण और भावनाओं को भी ध्यान में रखा जाएगा। यह विशेष रूप से 13 से 18 वर्ष के आयु के यूरोपीय और मध्य एशियाई लोगों के लिए होगा। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि, उनके देश और क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के संबंध में उनका ज्ञान और अपेक्षाएं क्या हैं? वो इस बारे में क्या सोचते हैं? 

यह भी पढ़ें :- “विश्व पर्यावरण दिवस” के लिए राजधानी में अभियान शुरू!

जंगलों से लेकर खेतों तक, पहाड़ की चोटी से लेकर समुद्र की गहराइयों तक सभी को पुनर्जीवित करने का यह एक वैश्विक मिशन है। केवल एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से ही हम सभी लोगों, पशु पक्षियों और जानवरों की जिंदगियों को बचा सकते हैं। इस विश्व पर्यावरण दिवस हम यह सोचें और इस दिशा में कारगर कदम उठाए। हमें प्रकृति के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना बेहद आवश्यक है। हमारे ग्रह के स्वस्थ के लिए तत्काल कार्रवाई कर, जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का प्रतिकार कर। हम जैव विविधता के पतन को रोक सकते हैं। 

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झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, एक श्रेष्ठ वीरांगना को यह देश कोटी – कोटी नमन करता है। (Wikimedia Commons)

भारतीय मध्ययुगीन इतिहास जहां अनेक वीर पुरुषों के वीरतापूर्ण कार्यों से भरा पड़ा है। वहीं स्त्री जाति के वीरतापूर्ण कार्यकलापों से यह अक्सर अछूता रहा है। सर्वत्र नारी को दयनीय, लाचार और मानसिक रूप से दास प्रवृति को ही दिखाया गया है। उस काल में यह गौरव से कम नहीं की रानी लक्ष्मीबाई ने भारतीय नारियों की इस दासतापूर्ण मानसिकता को ध्वस्त कर दिखाया था। इसलिए आज भी रानी लक्ष्मीबाई का नाम गर्व से लिया जाता है। एक ऐसी महिला स्वतंत्रता सेनानी जिन्होंने अंग्रजों से लोहा लिया था| आज उनके द्वारा किए गए संघर्ष सभी भारतीयों के हृदय में एक नवीन उत्साह का संचार कर देता है।

आइए आज उनके द्वारा देश की आन-बान-शान को बचाने के लिए किए गए संघर्ष को याद करें। उस युद्ध की बात करें जब उनकी तलवार ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे और अंग्रजों के रक्त से अपने अस्तित्व को पूरा किया था।

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चंदा बंद सत्याग्रह जिसे No List No Donation के नाम से भी जाना जाता है। (File Photo)

सत्याग्रह का सामन्य अर्थ होता है "सत्य का आग्रह।" सर्वप्रथम इसका प्रयोग महात्मा गांधी द्वारा किया गया था। उन्होंने भारत में कई आंदोलन चलाए, जिनमें चंपारण, बारदोली, खेड़ा सत्याग्रह आदि प्रमुख। हैं। सत्याग्रह स्वराज प्राप्त करने और सामाजिक संघर्षों को मिटाने का एक नैतिक और राजनीतिक अस्त्र है। आज हम ऐसे ही एक सत्याग्रह की बात करेंगे जिसे गांधी जी से प्रेणा लेकर शुरू किया गया था।

"चंदा बंद सत्याग्रह" जिसे No List No Donation के नाम से भी जाना जाता है। यह आम आदमी पार्टी के विरुद्ध एक अमरीकी डॉक्टर वह NRI सेल के सह-संयोजक डॉ. मुनीश रायजादा द्वारा साल 2016 में शुरू किया गया था। डॉ. मुनीश जब आम आदमी पार्टी से जुड़े थे, तब उन्हें पार्टी के NRI सेल का सह-संयोजक नियुक्त किया गया था।

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आपको बता दें कि मालाबार (केरल में स्थित है) हिन्दू नरसंहार को इतिहास से पूरी तरह मिटा दिया गया।

मोपला हिंदु नरसंहार या मालाबार विद्रोह 100 साल पहले 20 अगस्त 1921 को शुरू हुई एक ऐसी घटना थी, जिसमें निर्दयतापूर्वक सैकड़ों हिन्दू महिला, पुरुष और बच्चों की हत्या कर दी गई थी। महिलाओं का बलात्कार किया गया था। बड़े पैमाने पर हिन्दुओं को जबरन इस्लाम धर्म में परिवर्तित करा दिया गया था।

आपको बता दें कि मालाबार (केरल में स्थित है) हिन्दू नरसंहार को इतिहास से पूरी तरह मिटा दिया गया। आज हम मोपला हिन्दू नरसंहार, 1921 में हिन्दुओं के साथ हुई उसी दर्दनाक घटना की बात करेंगे। आपको बताएंगे की कैसे मोपला हिन्दू नरसंहार (Mopla Hindu Genocide) के खलनायकों को अंग्रेजों से लोहा लेने वाले नायकों के रूप में चिन्हित कर दिया गया।

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