128 साल बाद लौटी बलिदान की निशानी : मेडागास्कर को मिली उसके राजा और योद्धाओं की खोपड़ियां

128 साल बाद (128 Years) मेडागास्कर (Madagascar) को उसके राजा टोएरा (King Toera) और योद्धाओं की खोपड़ियां (Skulls) वापस मिलीं। यह सिर्फ हड्डियों की नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और सम्मान की घर वापसी है। औपनिवेशिक अन्याय के घाव पर यह बड़ा मरहम है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को न्याय और सुकून का संदेश मिलेगा।
मेडागास्कर (Madagascar) की जनता के लिए यह घटना एक आघात थी। उनके राजा की खोपड़ी उनके अपने देश में नहीं, बल्कि हज़ारों किलोमीटर दूर पेरिस में पड़ी थी।
मेडागास्कर (Madagascar) की जनता के लिए यह घटना एक आघात थी। उनके राजा की खोपड़ी उनके अपने देश में नहीं, बल्कि हज़ारों किलोमीटर दूर पेरिस में पड़ी थी। (AI)
Published on
5 min read

इतिहास में कुछ इस प्रकार के घाव भी हैं जो समय के साथ भरते कभी नहीं हैं, बल्कि पीढ़ियों तक दर्द देते रहते हैं। मेडागास्कर (Madagascar) के लोगों के लिए ऐसा ही घाव था उनके राजा टोएरा (Toera) और उनके साथ लड़े योद्धाओं की खोपड़ियां (Skulls), जिन्हें फ्रांसीसी (France) सैनिक 128 साल (128 Years) पहले काटकर पेरिस ले गए थे। आज, एक सदी से भी ज्यादा समय के बाद, आखिरकार वो खोपड़ियां वापस लौटा दी गई हैं। लेकिन यह केवल हड्डियों की वापसी नहीं है, बल्कि सम्मान, आत्मसम्मान और औपनिवेशिक अन्याय से मुक्ति की दिशा में एक बड़ा कदम है।

राजा टोएरा (King Toera) 19वीं सदी के मेडागास्कर के सकलावा (Sakalava) जनजातीय साम्राज्य के शासक थे। वो अपने साहस और स्वतंत्रता के लिए जाने जाते थे। जब फ्रांसीसी (France) सेनाएँ अफ्रीकी द्वीपों और खासकर हिंद महासागर के बड़े द्वीप मेडागास्कर (Madagascar) पर कब्ज़ा करने पहुँचीं, तो टोएरा और उनके योद्धाओं ने डटकर विरोध किया। लेकिन 1897 में स्थिति भयावह हो गई। फ्रांसीसी सैनिकों ने भारी सैन्य बल के दम पर विद्रोह को कुचल दिया। राजा टोएरा को गिरफ्तार किया गया, और अगस्त 1897 में उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। इतना ही नहीं, उनके शरीर का सिर अलग कर दिया गया और उनकी खोपड़ी को पेरिस ले जाया गया। यह केवल हत्या नहीं थी, बल्कि यह एक औपनिवेशिक मानसिकता का प्रतीक था किसी राजा की खोपड़ी (Skulls) को "जीत की ट्रॉफी" बनाना।

राजा टोएरा (King Toera) और उनके दो साथियों की खोपड़ियां फ्रांस ले जाई गईं। उन्हें पेरिस के नेशनल हिस्ट्री म्यूजियम में एक "नमूने" की तरह रखा गया। यह किसी ऐतिहासिक धरोहर की तरह नहीं थी, बल्कि मानो एक जीत का प्रतीक हो, जैसे शिकारी किसी शेर का सिर सजाकर रखते हैं। उसी प्रकार से राजा टोएरा और उनके दो साथियों की खोपड़ियों को पेरिस के नेशनल हिस्ट्री म्यूजियम में रखा गया। उस समय यूरोप में यह आम बात थी कि उपनिवेशों से लाए गए मानव अवशेषों को संग्रहालयों में प्रदर्शन के लिए रखा जाता था। इससे न केवल उपनिवेशों पर "सभ्यता का नियंत्रण" दिखाया जाता था, बल्कि स्थानीय लोगों के प्रति गहरी तिरस्कार भी झलकती थी।

मेडागास्कर (Madagascar) की जनता के लिए यह घटना एक आघात थी। उनके राजा की खोपड़ी उनके अपने देश में नहीं, बल्कि हज़ारों किलोमीटर दूर पेरिस में पड़ी थी। उनका न कोई अंतिम संस्कार हुआ, और न ही सम्मानजनक विदाई हुई। मेडागास्कर की संस्कृति मंत्री वोलामिरांती डोना मारा ने कहा की "हमारे देश के दिल में यह 128 सालों (128 Years) से एक खुला घाव था। अब जब खोपड़ियां वापस आ ही रही हैं, तो यह केवल अवशेष नहीं हैं, बल्कि हमारे पूर्वजों की आत्मा की वापसी है।"

राजा टोएरा (King Toera) 19वीं सदी के मेडागास्कर के सकलावा (Sakalava) जनजातीय साम्राज्य के शासक थे।
राजा टोएरा (King Toera) 19वीं सदी के मेडागास्कर के सकलावा (Sakalava) जनजातीय साम्राज्य के शासक थे।(AI)

फ्रांस का नया कानून और ऐतिहासिक वापसी

2023 में फ्रांस (France) ने एक नया कानून पास किया। इस कानून ने पहली बार यह अधिकार दिया कि किसी अन्य देश के पूर्वजों के अवशेष वापस लौटाए जा सकते हैं, ताकि उनका अंतिम संस्कार उनके अपने देश में किया जा सके। इसी कानून के तहत 26 अगस्त 2025 को फ्रांसीसी संस्कृति मंत्रालय में एक ऐतिहासिक समारोह हुआ। वहां मेडागास्कर को तीन खोपड़ियां (Skulls) सौंपी गईं। इनमें से एक राजा टोएरा की बताई जाती है और बाकी दो उनके योद्धाओं की। फ्रांस की संस्कृति मंत्री रचिदा दाती ने कहा की "ये खोपड़ियां हमारे संग्रहालयों में उन परिस्थितियों में आई थीं, जो स्पष्ट रूप से मानवीय गरिमा के खिलाफ थीं। यह औपनिवेशिक हिंसा का प्रतीक था।"

फ्रांस (France) के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 2017 से लगातार अफ्रीका में फ्रांस के उपनिवेशवादी अपराधों को स्वीकार करने की कोशिश कर रहे हैं। अप्रैल 2025 में जब वो मेडागास्कर गए, तो उन्होंने वहां खुले तौर पर कहा की "हम मेडागास्कर पर फ्रांस के खूनी और दुखद कब्जे के लिए माफी मांगते हैं।" मैक्रों का यह कदम केवल एक औपचारिक बयान नहीं था, बल्कि यह संकेत था कि फ्रांस अब अपने औपनिवेशिक अतीत का बोझ उतारना चाहता है।

2023 में फ्रांस (France) ने एक नया कानून पास किया। इस कानून ने पहली बार यह अधिकार दिया कि किसी अन्य देश के पूर्वजों के अवशेष वापस लौटाए जा सकते हैं, ताकि उनका अंतिम संस्कार उनके अपने देश में किया जा सके।
2023 में फ्रांस (France) ने एक नया कानून पास किया। इस कानून ने पहली बार यह अधिकार दिया कि किसी अन्य देश के पूर्वजों के अवशेष वापस लौटाए जा सकते हैं, ताकि उनका अंतिम संस्कार उनके अपने देश में किया जा सके।(AI)

क्या सचमुच यह खोपड़ी राजा टोएरा की है ?

वैज्ञानिक जांच में यह पुष्टि हो चुकी है कि यह खोपड़ियां सचमुच सकलावा समुदाय की हैं। लेकिन यह 100% कहना मुश्किल है कि इनमें से कौन-सी राजा टोएरा की है। इसके बावजूद मेडागास्कर (Madagascar) के लोग इसे सांकेतिक रूप से अपने राजा की खोपड़ी मानते हैं। उनके लिए यह सवाल ज़्यादा महत्वपूर्ण है कि उनके राजा को सम्मान के साथ दफनाया जाए, न की वैज्ञानिक बहस में समय गंवाया जाए।

उसके बाद राजा टोएरा और उनके योद्धाओं की खोपड़ियां तो लौटा दी गईं, लेकिन यह केवल शुरुआत है। फ्रांस के संग्रहालयों में अभी भी 30,000 से ज्यादा मानव खोपड़ियां और कंकाल रखे हैं। इनमें से अधिकांश अफ्रीकी और एशियाई देशों से लाए गए थे, जहां फ्रांस का उपनिवेशी शासन रहा है। मेडागास्कर की तरह अब अन्य देश भी अपने पूर्वजों के अवशेष मांगने लगे हैं। ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और कई अफ्रीकी देशों ने फ्रांस से आधिकारिक तौर पर ऐसी मांग की है।

यह कहानी हमें याद दिलाती है कि 19वीं और 20वीं सदी की शुरुआत में यूरोपीय शक्तियाँ किस तरह उपनिवेशों के लोगों को निम्न मानती थीं। उनके अवशेषों को संग्रहालयों में रखना या कभी-कभी प्रदर्शन में दिखाना मानो एक सामान्य बात थी। उदाहरण के लिए, दक्षिण अफ्रीका की महिला सारा बार्टमैन‘ को यूरोप में जीवित ही एक तमाशे की तरह प्रदर्शित किया गया था। उनकी मौत के बाद उनके अवशेष भी फ्रांस में रखे गए। 2002 में, बहुत संघर्ष के बाद, उन्हें दक्षिण अफ्रीका लौटाया गया।

वैज्ञानिक जांच में यह पुष्टि हो चुकी है कि यह खोपड़ियां सचमुच सकलावा समुदाय की हैं। लेकिन यह 100% कहना मुश्किल है कि इनमें से कौन-सी राजा टोएरा की है।
वैज्ञानिक जांच में यह पुष्टि हो चुकी है कि यह खोपड़ियां सचमुच सकलावा समुदाय की हैं। लेकिन यह 100% कहना मुश्किल है कि इनमें से कौन-सी राजा टोएरा की है। (AI)

मेडागास्कर की नई शुरुआत

अब जब राजा टोएरा (King Toera) और उनके योद्धाओं की खोपड़ियां (Skulls) लौटाई जा चुकी हैं, तो उन्हें अब हिंद महासागर के इस खूबसूरत द्वीप में दफनाया जाएगा। यह न केवल एक धार्मिक और सांस्कृतिक प्रक्रिया होगी, बल्कि यह एक राष्ट्रीय उत्सव भी होगा। लोग इसे 128 साल (128 Years) पुराने घाव पर मरहम मान रहे हैं। अब उनके राजा अपने देश की मिट्टी में आराम करेंगे, न कि किसी विदेशी संग्रहालय के अंधेरे कमरे में।

निष्कर्ष

फ्रांस (France) द्वारा मेडागास्कर (Madagascar) को खोपड़ियों की वापसी केवल इतिहास की एक घटना नहीं है। यह हमें बताता है कि उपनिवेशवाद के जख्म कितने गहरे होते हैं और कैसे सम्मान लौटाना पीढ़ियों तक मायने रखता है। यह कदम फ्रांस और मेडागास्कर के रिश्तों में एक नए युग की शुरुआत है। यह हमें यह भी सिखाता है कि चाहे कितनी भी देर हो जाए, न्याय और सम्मान लौटाने का समय कभी खत्म नहीं होता है। यह पूरी कहानी हमें यही बताती है की कैसे औपनिवेशिक ताकतें लोगों का शरीर छीन सकती हैं, लेकिन उनकी आत्मा नहीं। और जब आत्मा लौटती है, तो एक पूरे राष्ट्र को सुकून मिलता है। [Rh/PS]

Related Stories

No stories found.
logo
hindi.newsgram.com