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लव जिहाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त कदम उठाने के दिए निर्देश, विहिप भी चाहती है कड़ा कानून

मामले बढ़ता देख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं।

योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश(Image: Yogi Adityanath, Twitter)

By: विवेक त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश में इन दिनों लव जिहाद का मुद्दा उफान पर है। राज्य के कानपुर,लखीमपुर खीरी, बलरामपुर सहित अनेक जिलों से आ रही महिला उत्पीड़न और लव जिहाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। वहीं इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे विश्व हिन्दू परिषद चाहता है कि इसे रोकने के लिए कड़ा कानून बनाया जाए।


मामले बढ़ता देख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं।

हाल के कुछ दिनों में मेरठ, खीरी, कानपुर में लव जिहाद के मामले तूल पकड़ते जा रहे हैं। अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने महिला उत्पीड़न और लव जिहाद मामलों को तेज गति से और सख्त कार्रवाई करने को कहा है। मेरठ, कानपुर व लखीमपुर खीरी में पिछले दिनों लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाने की बातें सामने आयी हैं।

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कानपुर के विश्व हिन्दू परिषद के प्रांत संगठन मंत्री मधुराम मिश्रा का कहना है, लव जिहाद का मामला बहुत पुराना है। इसे लेकर एक गिरोह सक्रिय है। उन्होंने बताया कि कानपुर, फरूर्खाबाद, झांसी, इटावा, हमीरपुर, ललितपुर, फतेहपुर, हर जिले में कुछ न कुछ केस हैं। लोग हमारे संपर्क में है। इसे लेकर हम लोग जागरूकता कर रहे हैं।

बीते दिनों कानपुर के बर्रा-6 की युवती ने सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर धर्म परिवर्तन कर अपनी मर्जी से निकाह करने की बात कही थी। इसके बाद विश्व हिंदू परिषद के कार्यकतार्ओं ने युवक पर जबरन धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाते हुए किदवई नगर थाने के बाहर हंगामा किया। उन्होंने युवती को बरामद करने और आरोपी युवक को गिरफ्तार कर कार्रवाई की मांग की थी।

विश्व हिन्दू परिषद के क्षेत्र प्रसार प्रमुख भोलेन्द्र ने बताया कि लव जिहाद के मामले उत्तर प्रदेश के हर जिले में नेटवकिर्ंग के रूप में काम कर रहा है। इसके बाकायदे एजेंटे हैं। लखीमपुर और कानुपर की घटना उजागर हुई है। गरीब तपके और ग्रामीणों को इसमें टारगेट किया जाता है।

एडीजी कानून व्यवस्था प्रशान्त कुमार ने कहा, पुलिस महिला हिंसा मामले में संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। इन्टरफेथ बातों पर विषेश ध्यान दिया जा रहा है। जहां से र्पिोट आ रही है, उसे विशेष रूप से देखा जा रहा है। सभी जगह मेरिट के आधार पर काम होता है।

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ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनाव में इस मुद्दे को बड़ी तेजी के साथ उठाया गया था। 2014 के उपचुनाव के दौरान योगी आदित्यनाथ चुनावी रैलियों में कहते थे, ”अब जोधाबाई अकबर के साथ नहीं जाएगी और सिकंदर अपनी बेटी चंद्रगुप्त मौर्य को देने के लिए मजबूर होगा। योगी कई बार इसे अन्तर्राष्ट्रीय सजिश भी बता चुके हैं।(आईएएनएस)

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आईपीएल में रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) का एक मैच (wikimedia commons)

भारत के क्रिकेट टीम के कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने एक के बाद टीम से अपनी कप्तानी छोड़ने का जैसे ऐलान किया वैसे हि , उनके चाहने वाले , प्रशंसकों और साथी खिलाडियों ने अपनीं प्रतिक्रिया देना शुरू कर दी । इसी बीच दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज डेल स्टेन का कहना है कि आईपीएल की टीम का नेतृत्व करने का दबाव और युवा परिवार का होना रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) के कप्तान विराट कोहली के इस आईपीएल के बाद टीम की कप्तानी छोड़ने के फैसले का कारण हो सकता है। आरसीबी की टीम की और से रविवार की देर रात यह घोषणा की गई , कि विराट कोहली आईपीएल 2021 सीजन के बाद टीम की कप्तानी छोड़ देंगे । इस के पहले कोहली ने कुछ दिन पहले ही टी20 विश्व कप के बाद भारतीय टीम के टी20 प्रारूप की कप्तानी छोड़ने का भी फैसला किया था।


डेल स्टेन ने आगे कहा कि, " विराट कोहली आरसीबी टीम के साथ शुरू से जुड़े हैं। मुझे नहीं पता, जैसे-जैसे जीवन आगे बढ़ता है आप चीजों को प्राथमिकता देने लगते हैं। कोहली का नया यूवा परिवार है । उन्हें अपनी पर्शनल लाइफ भी देखना है ।
डेल ने यह भी कहा कि , "हो सकता है, उस जिम्मेदारी (कप्तानी) से थोड़ा सा त्याग करना और सिर्फ अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होना उनके करियर के लिए इस समय एक अच्छा निर्णय है।"

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दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन (wikimedia commons)

दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी में शुमार अमेजन को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है । द मॉर्निग कॉन्टेक्स्ट की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन ने भारत में अपने कानूनी प्रतिनिधियों के आचरण की जांच शुरू कर दी है। एक व्हिसलब्लोअर शिकायत के आधार पर यह जांच हुई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि अमेजन द्वारा कानूनी शुल्क में भुगतान किए गए कुछ पैसे को उसके एक या अधिक कानूनी प्रतिनिधियों द्वारा घूस में बदल दिया गया है।

काम करने वाले दो लोगों ने जो कि अमेजन की इन-हाउस कानूनी टीम के साथ है , उन्होंने मिलकर पुष्टि की कि अमेजन के वरिष्ठ कॉर्पोरेट वकील राहुल सुंदरम को छुट्टी पर भेजा गया है। एक संदेश में उन्होंने कहा, "क्षमा करें, मैं प्रेस से बात नहीं कर सकता।" हम स्वतंत्र रूप से यह पता नहीं लगा सके कि आंतरिक जांच पूरी हो चुकी है या प्रगति पर है।

कई सवालों के एक विस्तृत सेट के जवाब में, अमेजन के प्रवक्ता ने कहा, "भ्रष्टाचार के लिए हमारे पास शून्य सहनशीलता है। हम अनुचित कार्यो के आरोपों को गंभीरता से लेते हैं, उनकी पूरी जांच करते हैं, और उचित कार्रवाई करते हैं। हम विशिष्ट आरोपों या किसी की स्थिति पर इस समय जांच या टिप्पणी नहीं कर रहे हैं इस समय जांच।"

\u0911\u0928\u0932\u093e\u0907\u0928 \u0930\u093f\u091f\u0947\u0932\u0930 \u0905\u092e\u0947\u091c\u0928 दुनिया की सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन कंपनी का लोगो (wikimedia commons)

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भारतीय जनता पार्टी भाजपा का चुनावी चिन्ह (wikimedia commons)

अभी-अभी भारत के पंजाब राज्य में एक बड़ी राजनेतिक घटना घटी जब वंहा का मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और सत्ता दल पार्टी ने राज्य ने नया मुख्यमंत्री बनाया । पंजाब में एक दलित को मुख्यमंत्री बना कर कांग्रेस ने एक बड़ी सियासी चाल खेल दी है। अब कांग्रेस इसका फायदा अगले साल होने जा रहे राज्यों के विधानसभा चुनाव में उठाने की रणनीति पर भी काम करने जा रही है । उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सियासी पारे को गरम कर दिया है कांग्रेस की इस मंशा ने।

कांग्रेस नेता हरीश रावत जो कि पंजाब में दलित सीएम के नाम का ऐलान करने वाले वो उत्तराखंड से ही आते हैं, अतीत में प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और आगे भविष्य में भी सीएम पद के दावेदार हैं, इसलिए बात पहले इस पहाड़ी राज्य के सियासी तापमान की करते हैं। साढ़े चार साल के कार्यकाल में भाजपा राज्य में अपने दो मुख्यमंत्री को हटा चुकी है और अब तीसरे मुख्यमंत्री के सहारे राज्य में चुनाव जीतकर दोबारा सरकार बनाना चाहती है। इसलिए भाजपा इस बात को बखूबी समझती है कि हरीश रावत उत्तराखंड में तो इस मुद्दें को भुनाएंगे ही।

बात करे उत्तराखंड राज्य कि तो यहा पर आमतौर पर ठाकुर और ब्राह्मण जाति ही सत्ता के केंद्र में रहती है, लेकिन अब समय बदल रहा है राजनीतिक दल भी दलितों को लुभाने का विशेष प्रयास कर रहे हैं। दरअसल, उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है , जिसमें 13 सीट अनुसूचित जाति और 2 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। मसला सिर्फ 13 आरक्षित सीट भर का ही नहीं है। उत्तराखंड राज्य के 17 प्रतिशत से अधिक दलित मतदाता 22 विधानसभा सीटों पर जीत-हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इसके साथ ही कुल 36 सीटों पर जीत हासिल करने वाली पार्टी राज्य में सरकार बना लेती है।

brahmin in uttrakhand उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है (wikimedia commons)

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