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देश

धान खरीद में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा योगी सरकार ने

धान खरीद को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की देखरेख में तैयार हुई योजना असरदार साबित हुई है। इस योजना के चलते ही राज्य में अब तक 6,95,819 किसानों से 3729751.124 मीट्रिक टन धान खरीदा गया।

धान की फसल । (Wikimedia Commons)

उत्तर प्रदेश में धान खरीद को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की देख-रेख में तैयार हुई योजना असरदार साबित हुई है। इस योजना के चलते ही राज्य में अब तक 6,95,819 किसानों से 3729751.124 मीट्रिक टन धान खरीदा गया। जबकि बीते साल 16 दिसंबर तक 3,15,866 किसानों से धान की खरीदा गया था। इस प्रकार बीते साल के मुकाबले अब तक दोगुने से अधिक किसानों से सरकार ने धान खरीद कर अपना ही रिकार्ड तोड़ा है। खरीद की प्रक्रिया अब भी जारी है। यही नहीं योगी सरकार ने प्रदेश के धान किसानों को सबसे अधिक भुगतान का रिकार्ड बनाया है। राज्य सरकार ने पिछले चार साल में प्रदेश के धान किसानों को 31904.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। प्रदेश में धान किसानों को सबसे अधिक भुगतान का यह एक रिकार्ड है।

राज्य में अबतक हुई धान खरीद के आंकड़े इसकी गवाही भी देते हैं। राज्य में धान खरीद से जुड़े अफसरों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य में किसानों को उनकी फसल की लागत से दो गुना दाम दिलाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसके तहत ही प्रदेश सरकार ने सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,868 रुपए प्रति क्विंटल जबकि ग्रेड ए धान का 1,888 रुपए प्रति क्विंटल रखते हुए इस वर्ष धान खरीद का कुल लक्ष्य 55 लाख मीट्रिक टन रखा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान खरीद के लिए प्रदेश में कुल 4,150 क्रय केंद्र खोले गए हैं। कुल 12 एजेंसियां धान की खरीद कर रही हैं। अब तक 3729751.124 मीट्रिक टन धान किसानों से खरीदा जा चुका है। धान खरीद का प्रति किसान औसत 53.60 क्विंटल है।


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कितने मीट्रिक टन धान खरीदा गया ?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य के कई जिलों में बीते वर्ष के मुकाबले आठ से नौ गुना अधिक धान की खरीद हुई है। ऐसे जिलों में वाराणसी का भी नाम शामिल है। वाराणसी में 2490 किसानों से 15551.609 मीट्रिक टन धान खरीदा गया है, बीते वर्ष के मुकाबले यह खरीद 9.25 प्रतिशत अधिक है। इसी प्रकार मुजफ्फरनगर में 11622 किसानों से 131507.2863 मीट्रिक टन धान खरीदा गया। इसके अलावा शामली, सहारनपुर और रामपुर में भी धान की रिकॉर्ड खरीद हुई है। कहा जा रहा है कि राज्य में धान खरीद में इजाफा सरकार की सख्ती के चलते ही हुआ है। सरकार ने किसानों से धान खरीद में किसी तरह की गड़बड़ी ना होने पाए, इसके स्पष्ट निर्देश दिए थे। और किसानों से धान खरीद में शिकायतें मिलने पर अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की, जिसके चलते मंडियों में किसानों से धान खरीद में इजाफा हुआ। (आईएएनएस)

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बांके बिहारी मंदिर में होली

कहा जाता है कि अगर किसी इंसान को सुकून चाहिए होता है तो उसे वृंदावन या मथुरा की गलियों में जाना चाहिए, क्योंकि इन्ही गलियों में खेलते हुए कृष्ण जी का बचपन बीता हैं। वृंदावन हो या मथुरा यहां हर दूसरा व्यक्ति कृष्ण भक्ति में लीन नज़र आता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की वह हिंदुस्तानी है या कहीं और से आया है। हर कोई कृष्ण की महिमा में डूबा हुआ होता है। वैसे तो वृंदावन में कई मंदिर है जहां हर रोज हज़ारों की संख्या में भक्त आते हैं और अपनी हाजिरी लगवाते हैं, लेकिन बांके बिहारी मंदिर की बात अलग है। यहां भी भक्तों का मेला लगा रहता है, पर हर किसी को कुछ बातें मालूम नहीं है। ऐसे ही कुछ तथ्यों के बारे में इस आर्टिकल में बताया गया है।

1) बांके बिहारी मंदिर की स्थापना स्वामी श्री हरिदास जी ने की थी। वह श्री कृष्ण के भक्त थे और महान गायक तानसेन के गुरु थे। वह अपने गीत से श्री कृष्ण को प्रसन्न करने की कोशिश किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि श्री हरिदास जी की भक्ति से प्रसन्न हो श्री कृष्ण ने दर्शन दिए थे।

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(instagram , virat kohali)

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और अनुष्का

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और उनके फाउंडेशन ने यहां मड, मलाड में आवारा पशुओं के लिए एक ट्रॉमा और रिहेब सेंटर का उद्घाटन किया है। इसके पहले इस साल की शुरूआत में, भारतीय कप्तान कोहली ने कहा था कि वह मुंबई में दो पशु देखभाल सुविधाएं स्थापित कर रहे हैं।
कोहली ने अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा को शहर में आवारा जानवरों के सामने आने वाली कठिनाइयों को देखने का श्रेय दिया।

अभिनेत्री अनुष्का ने कई मौकों पर जानवरों के कल्याण और उनके अधिकारों के प्रति अपना समर्थन दिया है। अनुष्का के जानवरों के प्रति दीवानगी से प्रेरित होकर कोहली अपने फाउंडेशन के जरिए आवारा जानवरों की मदद करने के मौके तलाश रहे हैं।

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भीड़ में चलते लोग।

मौजूदा समय में विश्व की जनसंख्या 7 अरब से भी ज्यादा है। इस जनसंख्या को यहां तक पहुंचने में कई सदियां लग गई है। समस्त विश्व को 1 अरब से 2 अरब तक की आबादी होने में 100 सालों का समय लगा था। लेकिन 2 अरब से 3 अरब होने में मात्र 30 साल लगे, वहीं 3 से 4 अरब होने में 15 साल लगे थे। उसके बाद से यह अंतर और कम हो गया। औद्योगिक क्रांति के बाद अठारहवीं शताब्दी में विश्व जनसंख्या में विस्फोट हुआ था। तकनिकी प्रगति की वजह से मृत्यु दर में गिरावट आई जो कि जनसंख्या विस्फोट का एक बहुत बड़ा कारण बना। भारत में भी जनसंख्या विस्फोट देखा गया था।

1951 में भारत की जनसंख्या मात्र 36.1 करोड़ थी जो 2011 की जनगणना में 121.02 करोड़ हो गई। और अब यह लगभग 135 करोड़ के ऊपर है। अगर किसी क्षेत्र की जनसंख्या बढ़ती है तो उसका मतलब है कि वहाँ का मृत्यु दर कम है और जन्म दर ज्यादा। यह दर्शाता है कि उस जगह पर चिकित्सकीय सुविधाएं अच्छी है। लेकिन बढ़ती जनसंख्या देश के लिए मुसीबत का सबब भी बन सकती है, क्योंकि जनसंख्या में वृद्धि हुई है किन्तु साधनों में नहीं। भारत के साथ भी यही समस्या है। लगातार जनसंख्या बढ़ने से कई जगहों पर साधनों की कमी महसूस होने लगी है।

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