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थोड़ा हट के

धर्म और विज्ञान का सत्ता संघर्ष है ‘प्रमेय’

बेस्ट सेलर किताबों को लिख चुके युवा लेखक भगवंत अनमोल अपनी नई किताब प्रमेय के साथ हाजिर हैं। किताब एक ऐसे युवा की कहानी है जो धर्म और अध्यात्म के बीच में वैज्ञानिक सोच के साथ खड़ा है।

बेस्ट सेलर किताबों को लिख चुके युवा लेखक भगवंत अनमोल अपनी नई किताब प्रमेय (Pramey) के साथ हाजिर हैं। (सांकेतिक चित्र, Pixabay)

बेस्ट सेलर किताबों को लिख चुके युवा लेखक भगवंत अनमोल (Author Bhagwant Anmol) अपनी नई किताब प्रमेय (Pramey) के साथ हाजिर हैं। किताब एक ऐसे युवा की कहानी है जो धर्म और अध्यात्म के बीच में वैज्ञानिक सोच के साथ खड़ा है। कहानी में जहां दर्शनशास्त्र का पुट मिलेगा, वहीं आज के समाज से इसे जोड़ने के लिए प्रेम कहानी को भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रमेय में धर्म और विज्ञान का सत्ता संघर्ष देखने को मिलेगा। भगवंत अनमोल ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में बताया, “प्रमेय में अध्यात्म और दर्शन के तर्कों का मिश्रण है। साथ ही साथ जो इसकी खास बात यह है कि धर्म और विज्ञान का सत्ता संघर्ष। इसे साइंस फिक्शन भी कहा जा सकता है। यह उपन्यास साइंस फिक्शन, दर्शन और वैचारिकता का एक अद्भुत मिश्रण है। यह एक ऐसे युवा की कहानी है, जिसकी परवरिश धार्मिक माहौल में हुई है और वह प्रौद्योगिकी की पढ़ाई कर रहा है। जहां एक तरफ तकनीकी यह बताती है कि इस ब्रह्मांड में ईश्वर है ही नहीं तो दूसरी तरफ उसके परिवार ने बचपन से यह सिखाया है कि दुनिया की हर एक वस्तु सिर्फ ईश्वर की देन है। उसका मन इस द्वंद्व में फंसकर रह जाता है। इसी द्वन्द से निकलने की छटपटाहट है प्रमेय।”

उन्होंने कहा, “पढ़ाई के दौरान सूर्यांश का दूसरे मजहब की लड़की से प्रेम हो जाता है। इसी कथानक के आधार पर मैंने विज्ञान, अध्यात्म और धर्म के तर्कों के सहारे ब्रह्मांड और ईश्वर की परिकल्पना को समझने का प्रयास किया है। जहां तक रही बात यह विषय चुनने की तो चूंकि मेरे घर का धार्मिक माहौल है और मैं विज्ञान का छात्र हूं तो मुझे हमेशा यह प्रश्न परेशान करता रहा है कि वे वैज्ञानिक जिन्होंने ढंग से अब तक सौरमंडल के बाहर कदम भी नहीं रखा है। उन्होंने ईश्वर को नकार दिया है। ये कैसी जल्दबाजी है। वहीं दूसरी तरफ हर धर्म, मजहब, रिलीजन के ठेकेदारों ने अब तक ढंग से सृष्टि को समझा ही नहीं है, आखिर यह सृष्टि है क्या।”


अनमोल ने कहा, “आप भले नए-नए विषयों पर लिख डालें लेकिन जीवन, दर्शन और विचार अगर गंभीरता से शामिल किए जाए तो उस किताब को साहित्य से अलग कर पाना मुश्किल होता है। (IANS)

उन्होंने कहा कि किसी भी नए विषय पर पुस्तक लिखने पर मेहनत और शोध तो करना ही पड़ता है। मैं एक साइंस फिक्शन लिखने की सोच रहा था। लेकिन हिंदी साहित्य का नयापन स्वीकार करने के मामले में हाजमा दुरुस्त नहीं है। इसलिए साइंस फिक्शन किताब लिखने से पहले यह भय था, कहीं मैं गांव की टोली में शहर के किसी अबूझ लड़के की तरह अलग थलग तो नहीं पड़ जाऊंगा।

अनमोल ने कहा, “आप भले नए-नए विषयों पर लिख डालें लेकिन जीवन, दर्शन और विचार अगर गंभीरता से शामिल किए जाए तो उस किताब को साहित्य से अलग कर पाना मुश्किल होता है। अपने विचार और दर्शन को समृद्ध करने के लिए मैंने ओशो और सद्गुरु को सुना, गीता पढ़ा और थोड़ा बहुत बाइबिल और कुरआन भी पढ़े। कई विदेशी लेखकों की साइंस फिक्शन किताबें पढ़ी। उसके बाद मैंने इस किताब में वैचारिकता देने की कोशिश की है।”

यह भी पढ़ें :- अपने खुद के न्यूजपेपर पर लिखता है यह पत्रकार

उन्होंने कहा कि देखिये, धर्म और विज्ञान में सत्ता संघर्ष हिंदी में शायद ही किसी किताब में दिखाया गया हो। अत: यह अपने तरह की अनूठी किताब है। लेकिन नया विषय होने के बावजूद यह हिंदी साहित्य की ही किताब लगती है। पाठक को कतई ऐसा नही लगेगा कि वह हिंदी साहित्य के बाहर की कोई किताब पढ़ रहा है। मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि गंभीर से गंभीर पाठक को भी यह किताब सोंचने पर मजबूर कर देगी।

भगवंत अनमोल लोकप्रिय युवा लेखक हैं। इनकी किताब ‘जिन्दगी 50-50’ और ‘बाली उमर’ बेस्टसेलर किताबें हैं। भगवंत अनमोल सबसे कम उम्र के लेखक हैं, जिनका उपन्यास जिन्दगी 50-50 कर्नाटक विश्वविद्यालय के परास्नातक के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। (आईएएनएस-SM)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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