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थोड़ा हट के

खुद मिले दान से गरीबों की मदद कर रहा युवा बौद्ध भिक्षु

युवा भिक्षु अपने सहयोगियों के साथ गया जिले के गांवों में पहुंचकर जरूरतमंदों राशन उपलब्ध करा रहे हैं। युवा बौद्ध भिक्षु गांव जाकर मानव कल्याण का उदाहरण पेश कर रहे हैं।

एक युवा बौद्ध भिक्षु गांव-गांव जाकर मानव कल्याण का उदाहरण पेश कर रहे हैं।(Pexel)

By: मनोज पाठक

देश और दुनिया में ज्ञानस्थली के रूप में चर्चित बिहार के गया जिले का बोधगया देश और विदेश को मानव कल्याण का संदेश देता आया है। इस बीच, इस कोरोना काल में यहां के एक युवा बौद्ध भिक्षु गांव-गांव जाकर मानव कल्याण का उदाहरण पेश कर रहे हैं। युवा बौद्ध भिक्षु अपने सहयोगियों के साथ गया जिले के गांवों में पहुंचकर जरूरतमंदों राशन उपलब्ध करा रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर में जब काम धंघे बंद हो गए और प्रवासी मजदूर भी गांवों में पहुंच गए और खेतों में काम बंद हो गए तब बौद्ध भिक्षु भंता विशाल इनके लिए मसीहा बनकर गांवों में पहुंचे और उनके लिए राशन की व्यवस्था की।


भंता विशाल आईएएनरएस को बताते हैं कि वे अब तक बांसडीह, टीकाबिगहा, खजवती, बतसपुर, सेराजपुर, गौरबिगहा, सेवाबिगहा सहित कई गांवों में तथा विष्णुपद मंदिर और मां मंगलागौरी मंदिर में जरूरतमंदों को राशन बांट चुके है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि संस्था नमो बुद्धा टेंपल के बैनर तले अब तक कई जरूरतमंद परिवारों के घरों में राशन पहुंचा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि इसके लिए वे जिला प्रशासन से अनुमति भी लेते हैं। भंता विशाल बताते हैं कि 15 अप्रैल से प्रारंभ सिलसिला अब तक अनवरत जारी है। रात में पॉकेट तैयार किया जाता है और सुबह निर्धारित गांवों में पहुंचकर घूम-घूमकर जरूरतमंदों को पॉकेट दिया जाता है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि प्रतिदिन 100 पॉकेट राशन बांटे जा रहे हैं।

बिहार के बुद्ध भिक्षु इस महामारी के समय नई मिसाल पेश कर रहे हैं।(आईएएनएस)

उन्होंने कहा कि प्रत्येक पॉकेट में पांच किलोग्राम चावल, पांच किलोग्राम आंटा, दो किलोग्राम आलू, दो किलो चीनी, दो किलो दाल, सरसों तेल और एक साबुन होता है। उन्होंने कहा कि सडकों और फुटपाथों पर मिले जरूरमंदों को भी यह पॉकेट उपलब्ध कराया जा रहा है।

भंता बताते हैं कि बचपन से ही गरीबों, लाचारों की सेवा करने में प्रसन्नता का अनुभव होता है । यहीं कारण है कि बचपन में ही घर का त्यागकर वे बोधगया महाबोधि मंदिर पहुंच गए और दीक्षा लेकर भिक्षु बन गए।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जब कोरोना की पहली लहर आई थी और देश में लॉकडाउन में दैनिक मजदूरों, रिक्शा चालाकों के घरों में चूल्हे नहीं जल रहे थे, तब वे और उनके साथियों ने गांव-गांव में खाना बनवाकर गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन करवाने का कार्य किया था।

यह भी पढ़ें: मौत से जूझने के बाद जरूरतमंदों की मदद के लिए फिर कोलकाता की सड़कों पर उतरे नितई मुखर्जी

वे बताते हैं कि मिले दान के पैसे और लोगों के सहयोग से यह कार्य चल रहा है। वे कहते हैं, ” दान के पैसों का इससे अच्छा उपयोग नहीं हो सकता है। कोई भी व्यक्ति दान अपनी तथा लोगों की खुशी के लिए करता है और इस कार्य से कई घरों में खुाशी पहुंच रही है।”

भंता विशाल एक-दो दिनों में पटना के कुछ इलाकों तथा झारखंड के सीमावर्ती गांवों में भी जरूरतमंदों को राशन पहुंचाने की योजना बना चुके हैं। उन्होंने कहा कि मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाने की भी योजना बनाई गई है।

उन्होंने कहा कि जरूरमंदों की सेवा करना ही उनका मकसद है। उन्होंने कहा कि भविष्य में वे एक विद्यालय और अस्पताल खोलने की योजना पर काम कर रहे हैं, जिसमें गरीब के बच्चे निशुल्क पढ सके और गरीबों का अस्पताल में मुफ्त में इलाज हो सके।(आईएएनएस-SHM)

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देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटें। (IANS)

राम भक्तों द्वारा दी गई और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) (Vishwa Hindu Parishad) द्वारा तीन दशक लंबे मंदिर आंदोलन के दौरान देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटों का इस्तेमाल अब राम जन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण के लिए किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, "1989 के 'शिलान्यास' के दौरान कारसेवकों द्वारा राम जन्मभूमि पर एक लाख पत्थर रखे गए थे। कम से कम, 2 लाख पुरानी कार्यशाला में रह गए हैं, जिन्हें अब निर्माण स्थल पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ईंटों पर भगवान राम का नाम लिखा है और यह करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रमाण है।

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कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। (wikimedia commons)

हिंदू संगठनों की ओर से आलोचना झेल रही कर्नाटक की भाजपा सरकार नें कर्नाटक में मंदिर विध्वंस के मुद्दे पर फिलहाल राज्य विधानसभा में एक कानून पारित कर पुरे कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। सत्ताधारी पार्टी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस इन दोनों के बीच मंगलवार को तीखी बहस के बीच प्रस्तावित कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक 2021 को पारित कर दिया गया।

यह प्रस्तावित अधिनियम जिसका नाम 'कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक-2021' है, इसका मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य में धार्मिक संरचनाओं के विध्वंस को रोकना है।

यह अधिनियम में कहा गया है कि 'कर्नाटक धार्मिक संरचना संरक्षण अधिनियम -2021' के लागू होने की तारीख से, कानूनों के कानूनी प्रावधान और अदालतों, न्यायशास्त्र और अधिकारियों के आदेशों या दिशानिदेशरें के बावजूद, सरकार धार्मिक केंद्रों की रक्षा करेगी।

सार्वजनिक संपत्तियों पर बने धार्मिक केंद्रों को खाली करने, स्थानांतरित करने और ध्वस्त करने की प्रक्रिया को रोक दिया जाएगा। इस अधिनियम के लागू होने और विधान परिषद में पारित होने के बाद से ही ।

इसी बीच विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया कि हिंदू जागरण वेदिक और हिंदू महासभा की आलोचना का सामना करने के बाद भाजपा यह कानून लाई है। मैसूर में मंदिर तोड़े जाने के बाद बीजेपी पुनर्निर्माण के लिए नया कानून ला रही है, यह भी आरोप लगायें हैं उन्होंने भाजपा पार्टी के खिलाफ । इसके बाद कांग्रेस के एक और विधायक और पूर्व मंत्री औरयू.टी. खादर ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि छात्र पाठ्यपुस्तकों में पढ़ने जा रहे हैं कि भाजपा ने भारत में आक्रमणकारियों की तरह मंदिरों को ध्वस्त कर दिया।

\u0915\u0930\u094d\u0928\u093e\u091f\u0915 \u0930\u093e\u091c\u094d\u092f कर्नाटक राज्य का नक्शा सांकेतिक इमेज (wikimedia commons)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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