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देश

माता सीता को अपशब्द कहने वाली हीर खान के विदेशी मुल्क से जुड़े हो सकते हैं तार

आईजी ने कहा कि जनवरी, 2020 में हीर खान उर्फ सना, उसके मामा और उनका बेटा राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ मंसूर अली पार्क में विरोध प्रदर्शन में शामिल हो चुके हैं।

माता सीता को गाली देने वाली यूट्यूबर हीर खान(Twitter)

हिंदू देवी-देवताओं पर भड़काऊ व अपमानजनक वीडियो बनाकर वायरल करने वाली यूट्यूबर हीर खान के बारे में इस बात की आशंका जताई जा रही है कि विदेशी मुल्क से उसके तार जुड़े हो सकते हैं। इंस्पेक्टर जनरल (आईजी) (प्रयागराज रेंज) के.पी. सिंह के मुताबिक, “पुलिस ने महिला से पूछताछ की है और अब हम देश व विदेश में उसके कनेक्शन होने की जांच कर रहे हैं। हमने पाया कि वारिस नाम का एक व्यक्ति इस वक्त यूएई में काम कर रहा है और हैदराबाद से दो लोग उसे पैसे भेजा करते हैं। दो पाकिस्तानी युवकों से भी उसके संपर्क में रहने की बात सामने आई है।”

22 वर्षीय हीर खान ने 23 अगस्त को यूट्यूब पर 3.58 मिनट का एक भड़काऊ वीडियो डाला था, जो काफी वायरल हुआ।


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पुलिस ने बताया कि आरोपी ने यूट्यूब पर 129 वीडियोज अपलोड किए हैं और वह व्हाट़्सअप कॉल के जरिए कई अन्य लोगों के संपर्क में रही है।

25 अगस्त को हीर खान की गिरफ्तारी के बाद उसके खिलाफ खुल्दाबाद पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 153ए व 505 और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 66 के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।

पुलिस ने बाद में एफआईआर में कई अन्य धारा भी जोड़े हैं जिनमें गलत विषयसामग्री के माध्यम से अशांति की स्थिति पैदा करना, राजद्रोह और आईटी अधिनियम की धारा 67 शामिल है।

पूछताछ के दौरान, हीर खान ने पुलिस को बताया कि उसके मामा जमात-ए-इस्लामी हिंद के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं और फिलहाल किसी अन्य संगठन के साथ जुड़े हैं। उसने बताया कि उसके मामा का बेटा छात्र इस्लामिक संगठन (एसआईओ) का सक्रिय सदस्य रहा है।

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आईजी ने कहा कि जनवरी, 2020 में हीर खान उर्फ सना, उसके मामा और उनका बेटा राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ मंसूर अली पार्क में विरोध प्रदर्शन में शामिल हो चुके हैं।

उसने पुलिस को बताया कि वीडियोज बनाने और उन्हें यूट्यूब पर अपलोड करने में एक आदमी उसकी मदद करता था।(आईएएनएस)

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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8 जनवरी को चुनाव आयोग(Election Commission of India) द्वारा जारी के गए 5 राज्यों के विधान सभा चुनावों(Vidhan Sabha Election 2022) के तारिखों के ऐलान से चुनावी गहमा-गहमी चरम पर है। आपको बता दें कि वर्ष 2022 में 5 अहम राज्यों में विधान सभा चुनाव आयोजित होने जा रहे हैं। यह राज्य हैं उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखण्ड, गोवा एवं मणिपुर। साथ ही उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) में होने जा रहे चुनाव को 7 चरणों में बांटा गया है, मणिपुर 2 चरणों में और गोवा, उत्तराखण्ड, पंजाब(Punjab) में चुनाव 1 चरण में आयोजित किया जाएगा। चुनाव तारीखों के घोषित होने बाद सभी राजनीतिक दल एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं और हर वह हथकंडा अपना रहे हैं जिससे मतदाता आकर्षित हों। साथ ही अब यह भी संभावना अधिक है कि इस बीच चुनावी जमाखोरी बढ़ जाएगी।

पिछले चुनाव में पार्टियों ने कितना खर्च किया था?

आपको जानकारी के लिए बता दें कि 2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में करीब 5,500 करोड़ रूपये बड़ी पार्टियों द्वारा चुनाव अभियान में खर्च किए गए थे। साथ ही एक मीडिया रेपोर्ट के अनुसार 1000 करोड़ से अधिक पैसा मतदाताओं को पैसे से या शराब से लुभाने में खर्च किए गए थे। आपको यह भी बता दें कि 2017 में ही हुए 5 राज्यों में विधान सभा चुनाव में 1.89 अरब रूपये खर्च किए गए थे, जिसमें बाहरी खर्च कितना था इसका कोई हिसाब-किताब नहीं है।

इसके साथ विधानसभा में चुनाव आयोग ने निर्धारित की खर्च सीमा प्रति उम्मीदवार 30 लाख तय किया है, किन्तु यह सभी जानते हैं कि इसका पालन नहीं होता है। बल्कि बाहरी खर्च और वोट के लिए नोट का इस्तेमाल कर बेहिसाब पैसा बहाया जाता है। सभी पार्टियां, पार्टी चंदे को भी चुनाव में होने वाले खर्च के लिए इस्तेमाल करती हैं। साथ ही टिकट बिक्री को भी चुनावी जमाखोरी में गिना जा सकता है। हालही में आम आदमी पार्टी के खुदके विधायक ने अरविन्द केजरीवाल पर करोड़ों रुपयों के बदले टिकट बेचने का आरोप लगाया है।
जैसा की आपको पता है कि इस साल होने वाले 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव सभी पार्टियों की नाक की बात बन गई है, जिस वजह से हर कोई अपने-अपने तरीके से लोगों को जुटाने में और चीजों को भुनाने में जुटा हुआ है। चाहे वह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा हो या 'मैं लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ', किन्तु आज भी हम यह कह सकते हैं कि किसी भी प्रदेश ने महिलाओं की सुरक्षा का ठोस आश्वासन नहीं दिया है। इसी तरह भ्रष्टाचार और पैसों की जमाखोरी पर किसी भी सरकार को निर्दोष करार दे देना समझदारी का काम नहीं होगा। आपको बता दें कि एक समय ऐसा भी था जब समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने यह स्वीकारा था कि समाजवादी पार्टी के सरकार में भ्रष्टाचार होता था।

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राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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