Summary
BJP सरकार के 2022 के नए कानून से राम रहीम जैसे हार्डकोर कैदियों के लिए पैरोल का रास्ता आसान हुआ
नियम बदलने के बाद राम रहीम को बार-बार, खासकर चुनावी समय में, लंबी पैरोल मिलती रही
कानूनन प्रक्रिया सही दिखती है, लेकिन टाइमिंग और लाभार्थी पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं
साल 2013 में एक फिल्म आई थी और उसका नाम था, 'पुलिसगिरी।' इस फिल्म में संजय दत्त ने एक पुलिस वाले की भूमिका निभाई थी। सिनेमा में उनका एक डायलॉग भी है, "गलत तरीके से सही काम करना मुझे आता है।" लगता है इस डायलॉग को बीजेपी (BJP) ने गंभीरता से ले लिया है। कुछ ऐसा ही मामला हरियाणा (Haryana) से जुड़ा देखने को मिल रहा है जहाँ एक अपराधी को पैरोल देने के लिए बीजेपी की सरकार ने एक नया ही नियम बना दिया। नियम भी ऐसा, जिसे जानकर आप भी कहेंगे कि सच के पीछे के झूठ का पता लगाना बहुत मुश्किल है।
हरियाणा (Haryana) की बीजेपी (BJP) सरकार ने एक ऐसा एक्ट (Act) बनाया है, जिसके तहत राम रहीम (Ram Rahim) को पैरोल हर कीमत पर मिलेगा। ये वही राम रहीम है जिसके ऊपर रेप (Rape) का आरोप है और उसे हरियाणा की बीजेपी सरकार की कृपा से बार-बार पैरोल मिल रहा है। आइये समझते हैं, क्या है पूरा मामला?
5 जनवरी 2026 को यह खबर सामने आई कि राम रहीम (Ram Rahim) को पैरोल पर बाहर आया है। उसे पैरोल 40 दिन की मिली है। जब राम रहीम जेल से बाहर आया, तो सवाल उठने लगे कि आखिर कैसे एक कुख्यात अपराधी को प्रशासन जेल से बाहर आने की अनुमति देता है। इसे समझने के लिए इतिहास में थोड़ा पीछे चलना होगा।
साल 1998 में हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी और उन्होंने एक कानून बनाया था जिसे हम Haryana Good Conduct Prisoners (Temporary Release) Act, 1988 के नाम से जानते हैं। इसे इसलिए बनाया गया था ताकि जो कैदी अच्छा बर्ताव रखते हैं, उन्हें कुछ दिनों की छुट्टी (पैरोल या फरलो) दी जाए। इस कानून का मकसद था कि कैदियों को समाज और परिवार से जोड़े रखा जाए।
हालांकि, इसमें हार्डकोर कैदियों (Hardcore Prisoners) के लिए सख्त नियम बनाए गए थे, जैसे जो बलात्कार, डकैती, फिरौती या अपहरण के मामले में जेल में बंद हैं, उन्हें पैरोल या फरलो के लिए अयोग्य माना जाता था। उन्हें सिर्फ बड़ी इमरजेंसी जैसे परिवार में किसी का निधन हो या कोई करीबी बीमार हो, तो उन्हें महज कुछ घंटो के लिए जेल से बाहर आने की इजाजत मिलती थी।
आपको जानकर हैरानी होगी कि जब 2022 में हरियाणा में बीजेपी (BJP) की सरकार थी, और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर थे। उनकी सरकार ने 1998 वाले एक्ट को बदल दिया और Haryana Good Conduct Prisoners (Temporary Release) Act, 2022 लेकर आए। इस नियम ने हार्डकोर कैदियों के लिए शर्तें काफी आसान कर दी।
बीजेपी ने 'हार्डकोर कैदी' (Hardcore Prisoner) के नियम में बदलाव किये। पुराने कानून में जहाँ हार्डकोर कैदी को पैरोल बड़ी मुश्किल से मिलते थे, वहीं, 2022 के नियम के बाद इस श्रेणी में आने वाला खूंखार से खूंखार अपराधी को भी पैरोल मिल सकता है। बशर्ते सने अपनी सजा के 5 साल पूरे कर लिए हैं और जेल में उसका आचरण 'अच्छा' रहा है, तो उसे पैरोल दिया जा सकता है।
वहीं, राम रहीम (Ram Rahim) 2017 से जेल में हैं और उसे 5 साल से ज्यादा हो चुके हैं, इसलिए उसे 2022 के नियम के तहत पैरोल मिल रहा है। राम रहीम को साल में 70 दिन की पैरोल और 21 दिन की फरलो (कुल 91 दिन) मिलने का कानूनी प्रावधान है। वह इसी कोटे का इस्तेमाल करता है। इसके साथ ही इस एक्ट का नाम ही है, 'Good Conduct', ऐसे में पैरोल भी उसी स्थति में मिलती है, जब आपका आचरण अच्छा हो। ऐसे में जेल अधीक्षक (Jail Superintendent) अगर ये रिपोर्ट दे कि कैदी का बर्ताव अच्छा है, वो जेल के भीतर कोई अपराध नहीं करता है। इस आधार पर उसके पैरोल को मंजूरी मिलती है।
ऐसे में यहाँ ये साफतौर पर दिखता है कि 2022 में बीजेपी सरकार जो नियम लेकर आई थी, इसका फायदा राम रहीम को मिल रहा है।
एक बात यहाँ सोचने वाली है, कि आखिर राम रहीम (Ram Rahim) को पैरोल को चुनाव के समय ही पैरोल मिलता है। क्या वो खुद पैरोल के लिए चुनाव का समय चुनता है या प्रशासन उसे खुद कहता है कि 'आप पैरोल ले सकते हैं'?
सबसे पहले तो समझ लेना जरूरी है कि प्रशासन किसी कैदी को खुद नहीं कह सकता, कि जाओ आप बाहर 40 दिन घूमकर आओ। मतलब साफ़ है, प्रशासन कैदी को ये नहीं बोल सकता है। इसके लिए खुद कैदी को आवेदन करना होगा। आवेदन की प्रक्रिया पैरोल या फरलो की अर्जी से होती है। कैदी, उसके परिवार या वकील को इसके लिए लिखित आवेदन देना होगा। तारीख भी खुद कैदी भी चुनेगा।
अब अगर कोई ऐसा कैदी चुनाव के समय बाहर आ रहा है, जिससे प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं, तो उन्हें इसपर विचार करने की जरूरत है, क्योंकि 'हाँ' या 'ना' कहना प्रशासन के हाथ में होता है लेकिन प्रशासन अक्सर यह कहता है कि हर कैदी को साल में 70-90 दिन की छुट्टी का हक है। उसने अर्जी दी, उसका आचरण अच्छा था, इसलिए मंजूरी मिली। साथ ही चुनाव आयोग ने भी रोक नहीं लगाई। ऐसे में ये भी कह सकते हैं, साजिश और इत्तेफाक, दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। एक ऐसा पहलू जिसपर आप दावा भी नहीं ठोक सकते।
राम रहीम जेल से दो प्रक्रियाओं का पालन करते हुए बाहर आता है। पहला है पैरोल दूसरा है फरलो। पैरोल तब मिलता है, जब कोई खास कारण हो जैसे-शादी, बीमारी, घर की कोई समस्या। पैरोल की अवधि सजा में नहीं गिनी जाती। यानी कैदी जितने दिन बाहर रहेगा, उसकी रिहाई की तारीख उतने दिन आगे बढ़ जाएगी।
वहीं, फरलो किसी खास वजह के चलते नहीं, बल्कि केवल अच्छे व्यवहार के कारण मिलता है, ताकि कैदी समाज से जुड़ा रहे। फरलो के दिन सजा का हिस्सा माने जाते हैं। यानी बाहर रहने पर भी उसकी सजा कम होती रहती है।
राम रहीम (Ram Rahim) हरियाणा के रोहतक जिले की सुनारिया जेल (Sunaria Jail) में बंद है। उसे कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। राम रहीम पर साध्वियों से रेप और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के चलते उम्र कैद मिली है।
वहीं, उसे पैरोल या फरलो मिल चुकी है और इसके तहत वो 400 से ज्यादा दिन जेल के बाहर बिता चुका है। 2020 और 2021 में नियम सख्त थे, तो उसे सिर्फ अपनी बीमार माँ से मिलने के लिए एक-एक दिन की आपातकालीन रिहाई मिली थी। हालांकि, 2022 में जब नियम बदले, तो उसे 2022 में तीन बार (फरवरी, जून, अक्टूबर) मिलाकर कुल 91 दिन की राहत मिली। इसके बाद 2023 में भी उसे जनवरी, जुलाई और नवंबर में छोड़ा गया।
साल 2024 में भी उसे जनवरी, अगस्त और अक्टूबर (हरियाणा चुनाव से ठीक पहले) लंबी छुट्टियाँ मिलीं। फिर 2025 में उसे जनवरी, अप्रैल और अगस्त में रिहाई मिली और अब 2026 की शुरुआत में ही उसे फिर से 40 दिन की पैरोल मिल गई है। राम रहीम की अधिकतर रिहाइयाँ चुनाव के आसपास ही हुई है।