Summary
दूषित पानी से मौतों पर सवाल पूछने पर कैलाश विजयवर्गीय का पत्रकार से अभद्र व्यवहार।
वीडियो वायरल होने के बाद मंत्री ने बयान जारी कर माफ़ी मांगी।
इंदौर जल संकट में मौतों को लेकर सरकार बनाम विपक्ष आमने-सामने।
कहते हैं ना कि इंसान जब सत्ता के नशे में चूर हो जाता है, तो उसे न सही दिखता है न गलत, वह अपने फैसलों को ही सच मानने लगता है, जनता की आवाज़ दब जाती है और लोकतंत्र धीरे-धीरे सिर्फ़ नाम का रह जाता है। सत्ता चीज ही ऐसी है कि हर कोई शिखर पर काबिज ही रहना चाहता है। अब कांग्रेस को ही देख लीजिये। आज़ादी के बाद करीब 54 साल तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस आज सत्ता से ऐसे बेदखल हुई है कि वापसी के लिए तिलमिला रही है।
हालांकि, हम यहाँ सत्ता की बात इसलिए कर रहे हैं कि क्योंकि वर्तमान में बीजेपी इस सिंहासन पर बैठी है और इस पार्टी के एक मंत्री रौब दिखाते नज़र आए हैं। हम बात कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) की कर रहे हैं। उनका एक वीडियो सामने आया है जहाँ वो एक पत्रकार के साथ बदतमीजी करते दिखे हैं। क्या है पूरा मामला? आइये समझते हैं।
मामला मध्यप्रदेश का है जहाँ नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से नामचीन मीडिया कंपनी NDTV के एक पत्रकार अनुराग द्वारी ने कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) से एक छोटा सा सवाल किया। बुधवार को जब मीडिया कर्मी ने उनसे सवाल किया, तो वो कैमरे पर रौब झड़ते नज़र आए।
दरअसल, हुआ ये कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हो गई। इसी पर मध्यप्रदेश के मंत्री से सवाल हुआ था, जिसके बाद वो गरमा गए।
पत्रकार अनुराग द्वारी ने सवाल किया कि भागीरथपुरा क्षेत्र के कई मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जमा किए गए बिलों की राशि अब तक वापस नहीं मिली है, वहीं इस इलाके के नागरिकों के लिए पीने के साफ पानी की समुचित व्यवस्था भी नहीं की गई है।
इस सवाल पर कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) भड़क गए। उन्होंने कहा कि फोकट के सवाल मत करो। इसके बाद वो पत्रकार को कहने लगे कि "घंटा" तुम जगह से होकर आए हो। मंत्री और पत्रकार के बीच इस मामले को लेकर काफी बहस भी हुई। अपशब्द कहने के बाद मंत्री बिना जवाब दिए वहां से चले गए।
इस बर्ताव के बाद कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) की काफी किरकिरी भी हुई और काफी देर तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा और हंगामा भी हुआ।
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जब इस घटना की कड़ी निंदा शुरू हुई और मामला सोशल मीडिया पर आग की तरह फैला, तो कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) को झुकना पड़ा और उन्हें माफ़ी भी मांगनी पड़ी।
अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मध्यप्रदेश के मंत्री लिखते हैं कि मैं और मेरी टीम पिछले दो दिनों से बिना सोए प्रभावित क्षेत्र में लगातार स्थिति सुधारने में जुटी हुई है। दूषित पानी से मेरे लोग पीड़ित हैं और कुछ हमें छोड़कर चले गए, इस गहरे दु:ख की अवस्था में मीडिया के एक प्रश्न पर मेरे शब्द गलत निकल गए। इसके लिए मैं खेद प्रकट करता हूँ, लेकिन जब तक मेरे लोग पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ नहीं हो जाते, मैं शांत नहीं बैठूँगा।
गौरतलब है कि जब ये मामला सामने आया तो विपक्षी पार्टियों के नेता ने भी कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) के हरकत की घोर निंदा की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिये अपनी बात रखी।
जीतू पटवारी कहते हैं, ''गंदे पानी पीने के कारण इंदौर में 13 लोगों की मौत हो गई है, लेकिन फिर भी पूरी भाजपा सरकार सत्ता के नशे में मदहोश है। ना संवेदना, ना सुरक्षा।"
उन्होंने आगे कहा, ''भाजपा के नेताओं में सत्ता का अहंकार रावण से भी बड़ा हो गया है, तभी वे पत्रकारों को गालियां दे रहे हैं। मोहन यादव जी को अपनी रीढ़ की हड्डी दिखाते हुए 13 मौतों के जिम्मेदार लोगों से इस्तीफा लेना चाहिए और उनके खिलाफ हत्या के मुकदमे चलने चाहिए।"
बता दें कि पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से साफ़ कर दिया है कि वो तुरंत कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) से इस्तीफा लें।
अब आपको थोड़ा पूरा मामला समझा देते हैं। हुआ दरअसल ये है कि मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में कुछ दिनों से पेयजल में गंदगी और संदिग्ध प्रदूषण को लेकर गंभीर समस्या सामने आई है। स्थानीय निवासियों के मुताबिक नर्मदा जल योजना की लाइनों में सीवेज या गंदा पानी मिलने से लोगों को उल्टी, दस्त और पेट में दर्द जैसे लक्षण पाए गए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक करीब 13 लोगों की मृत्यु हो चुकी है जबकि करीब 200 लोग अस्पताल में भर्ती बताए जा रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में मृतकों की संख्या पर भिन्न अनुमानों का जिक्र भी है। फिलहाल ये आंकड़ा 7 से 13 के बीच चल रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि दूषित पानी पीने से बीमार पड़े लोगों में डायरिया, उल्टी, निर्जलीकरण जैसे लक्षण अधिक देखे गए हैं, और शहर के कई अस्पतालों में इन लोगों का इलाज चल रहा है। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में पानी की सप्लाई रोक दी है तथा टैंकर से साफ़ पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जांच जारी रखने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने, और प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा देने का आश्वासन दिया है जबकि हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लेते हुए, साफ़ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।