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युवाओं को कैसे प्रभावित कर रहा है नशा?

अपने खालीपन को दूर करने के लिए करते है लोग ड्रग्स का सेवन। जिससे उन्हें अन्य बीमारियां जकड़ लेती हैं।

ड्रग्स लेना बुरी आदत है (Wikimedia Commons)

आज के समय में प्रतिस्पर्धा की वजह से लोगों में तनाव इतना बढ़ गया है कि वह इससे भागना चाहते है। तनाव भरी ज़िन्दगी की वजह से लोग अंदर से खोखले हो गए हैं। और इसी खालीपन को दूर करने के लिए वह अलग-अलग तरीकों को अपनाते हैं। कुछ लोग ऐसे भी है जो ड्रग्स का सहारा लेने लगते हैं। यह तरीका उन्हें अपने खालीपन या अकेलेपन को दूर करने में सबसे कारगर लगता है। कई तो ऐसे भी है जो सिर्फ शौक के लिए ड्रग्स लेना शुरू करते है और उन्हें इसकी लत लग जाती है। युवाओं में ड्रग्स का सेवन करने वाले को मॉडर्न समझा जाता है। जिसकी वजह से बहुत से युवा इससे आकर्षित हो कर जाल में फंस जाते हैं।


यह मालूम होने के बावजूद भी की ड्रग्स के कितने दुष्प्रभाव है, भारत में भी भारी संख्या में लोग ड्रग्स का सेवन करते है। किसी भी देश के युवाओं को अगर ड्रग्स की लत लग जाती है तो वह उसमें धंसते चले जाते है। उसके बाद उनका जो हाल होता है उससे हम सब वाकिफ हैं। ड्रग्स से किसी भी व्यक्ति का शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता हैं। ड्रग्स के सेवन से हृदय की समस्याएं, फेफड़ों की बीमारी, वजन घटने, कैंसर और एड्स जैसी घातक बीमारी हो सकती है। ड्रग्स का व्यक्ति के मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता है, लोग इस लत की वजह से अपना आपा खो देते हैं। ऐसी ड्रग्स के बार-बार उपयोग से पैनिक अटैक, चिंता या मौत भी हो सकती है।



cocaine, addict, abuse एक भूल कर सकती है जिंदगी खराब (unsplash)


इन उत्तेजक पदार्थों में निकोटीन, कैफीन, कोकीन और एम्फ़ैटेमिन शामिल हैं, जो कि किसी को बहुत बीमार करने के लिए काफी है। एक व्यसनी नशा करने के बाद सोचता है कि स्थिति उसके नियंत्रण में है लेकिन ऐसा नहीं होता है। वह कब उस ड्रग के अधीन हो जाता है उसे पता ही नहीं लगता। ड्रग्स से मिलने वाला कुछ पलो का आनंद ज़िन्दगी भर के लिए सजा बन जाता है। ज्यादातर युवा इसलिए भी नशे के आदी हो जाते हैं क्योंकि यह तस्करों की बातों में आ जाते है। तस्करों के लिए युवाओं को निशाना बनाना बहुत आसान होता है जिसकी वजह से वह इनके झांसे में आ जाते है और अपने प्राणों को संकट में डाल लेते है।

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ड्रग्स के दुरूपयोग के बारे में जागरूकता फैलाने की जरूरत है क्योंकि लोगों में इस बारे में कम ज्ञान है। संयुक्त राष्ट्र 26 जुलाई को हर साल ड्रग्स के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाता है। ड्रग्स की समस्या के बारे में जागरूकता फैलाना और नशीली दवाओं के दुरुपयोग को खत्म करने के लिए इस दिन को मनाया जाता है। ऐसे ही कुछ जागरूकता के लिए अभियान सभी देशों में चलाने चाहिए और तस्करों को भी कड़ी सजा मिलनी चाहिए। ड्रग्स के चक्र को तोड़ने में थेरेपी, योगा, या इससे जुड़े कार्यक्रम मददगार साबित हो सकते है।

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मोबइल के कारण गर्दन में दर्द।

कोरोना की वजह से पिछले कुछ समय में लोगों की जीवन शैली में बहुत बदलाव आया है। बहुत से लोगों पर घर में रहने की वजह से सीधा प्रभाव पड़ा है खास तौर से बच्चों पर। कोविड-19 की वजह से ऑफलाइन से लगभग सब कुछ ऑनलाइन होता जा रहा है। वैसे ही बच्चों की पढ़ाई भी अब ऑनलाइन होने लगी है। जिसके कारण बच्चे देर तक मोबाइल में लगे रहते है। कोरोना की वजह से उतपन्न हुई मज़बूरी अब सभी के लिए मुसीबत बनती जा रही है। सिर्फ बच्चों को ही नहीं बल्कि बड़ों को भी काम के सिलसिले में कई घंटों तक लैपटॉप या मोबाइल के सामने बैठे रहना पड़ता है। लगातार मोबाइल का उपयोग करने से यह एक एडिक्शन बनता जा रहा है।

किसी भी चीज़ को अगर हम ज्यादा मात्रा में करने लग जाते हैं तो उस चीज़ की हमें लत लग जाती है। और लत किसी भी तरह की हो वह बुरी ही होती है। मोबाइल की लत भी बुरी है और साथ ही साथ खतरनाक भी। इस तरह की लत आज कल युवाओं में बहुत ज्यादा देखी जा सकती है। वह बिना खाना खाए तो रह सकते हैं लेकिन अपने मोबाइल के बग़ैर नहीं।

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माइग्रेन घर बैठे भी आपको अपनी चपेट में ले सकती है।(Pixabay)

आज कल भाग दोड़ भरी जिन्दगी में कई शारीरिक और मानसिक बीमारी उत्पन्न हो जाती है , जिसमे एक बीमारी भी है । अगर बात करे माइग्रेन की तो इसका दर्द काफी तेज उठता है, ऐसे में काम करना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार घर से काम करने वाले लोगों को माइग्रेन का दर्द उठ जाता है, जिससे समय पर काम नहीं हो पाता है। माइग्रेन एक कमजोर कर देने वाली न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो दुनिया भर में विकलांगता के साथ रहने वाले सालों के शीर्ष 10 प्रमुख कारणों में लगातार शुमार है। माइग्रेन के कुछ मुख्य लक्षण सिर के एक तरफ तेज दर्द या धड़कते हुए दर्द, रोशनी और ध्वनि के प्रति डर जैसे लक्षणों के साथ एक स्थायी सिरदर्द है। यह एक बहुत ही सामान्य सिरदर्द विमाइग्रेन से कार होने के बावजूद, जो दुनिया भर में लगभग 15 प्रतिशत वयस्क आबादी को प्रभावित करता है, यह अपर्याप्त रूप से समझा जाता है और सबसे अधिक उपेक्षित रहता है। देश की राजधानी दिल्ली में, लगभग 25 प्रतिशत आबादी हर साल माइग्रेन से पीड़ित हो जाती है ।

माइग्रेन यह व्यक्तिगत, पेशेवर और सामाजिक डोमेन में व्यक्तियों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है, इस प्रकार जीवन की समग्र गुणवत्ता और उत्पादकता को प्रभावित कर सकता है। आप को बता दे कि वर्क फ्रॉम होम, या 'न्यू नॉर्मल' ने माइग्रेन से पीड़ित लोगों के जीवन को काफी प्रभावित किया है । यह सुनिश्चित करना और भी जरूरी हो गया है कि अब व्यक्तियों के पास माइग्रेन को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए उपकरण हों।

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आप हरे-भरे इलाकों में रहते हैं तो आपको हृदय का रोग विकसित होने की संभावनाएं कम होती हैं।

अगर आप हरे-भरे इलाकों में रहते हैं तो आपको हृदय का रोग विकसित होने की संभावनाएं कम होती हैं। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है। ईएससी कांग्रेस 2021 में प्रस्तुत किए गए निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि पूरे अध्ययन के दौरान उच्च हरे भरे वाले ब्लॉकों के निवासियों में कम हरे भरे वाले ब्लॉकों की तुलना में किसी भी नई कार्डियोवैस्कुलर स्थितियों को विकसित करने की 16 प्रतिशत कम संभावनाएं थीं।

यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी, अमेरिका के विलियम ऐटकेन ने कहा, "जब कोई क्षेत्र उच्च हरापन बनाए रखता है और जब हरापन बढ़ता है, तो समय के साथ हरेपन के उच्च स्तर हृदय की स्थिति और स्ट्रोक की कम दरों से जुड़े होते हैं।"

एटकेन ने कहा, "यह उल्लेखनीय था कि ये संबंध केवल पांच वर्षों में दिखाई दिए, पॉजिटिव पर्यावरणीय प्रभाव के लिए अपेक्षाकृत कम समय में।" अध्ययन के लिए, टीम में 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के 2,43,558 यूएस मेडिकेयर लाभार्थी शामिल थे जो 2011 से 2016 तक मियामी के एक ही क्षेत्र में रहते थे।

पांच साल के अध्ययन के दौरान दिल का दौरा, आलिंद फिब्रिलेशन, दिल की विफलता, इस्केमिक हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और स्ट्रोक / क्षणिक इस्केमिक हमले सहित नई हृदय स्थितियों की घटनाओं को प्राप्त करने के लिए मेडिकेयर रिकॉर्ड का उपयोग किया गया था।

Heart टीम ने ब्लॉक-स्तरीय हरेपन के आधार पर किसी भी नए हृदय रोग के विकास की बाधाओं और नई हृदय स्थितियों की संख्या का विश्लेषण किया। Pixabay

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