मिस दीवा सुपरनेशनल 2025 का ताज जीतने पर बोलीं अवनि गुप्ता, 'सपने मरते नहीं, बल्कि सही समय का इंतजार करते हैं'

मुंबई में मिस दीवा ब्यूटी क्वीन प्रतियोगिता में अवनि गुप्ता ने मिस दीवा सुपरनेशनल 2025 का ताज जीतते हुए अपनी मेहनत और सोच से लोगों का दिल भी जीता।
अवनि गुप्ता, मिस दीवा सुपरनेशनल 2025 की विजेता, तस्वीर में नजर आ रही हैं|
अवनि गुप्ता मिस दीवा सुपरनेशनल 2025 का ताज जीतती हुई, मुंबई प्रतियोगिता में अपने प्रदर्शन के दौरान।IANS
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अवनि गुप्ता (Avni Gupta) ने कहा, ''मेरा सफर आसान नहीं था। बचपन पढ़ाई, अनुशासन और मेहनत के बीच बीता। मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन मेरे भीतर एक और दुनिया भी थी, जो कला, संगीत, नृत्य और मंच से जुड़ी हुई थी। मैं हमेशा कुछ रचनात्मक करना चाहती थी, समय के साथ मुझे समझ आया कि इंसान को खुद को एक ही पहचान में सीमित नहीं रखना चाहिए।''

अवनि ने कहा, ''जब मैं पहली बार कैमरे के सामने खड़ी हुई, तब मुझे खुद से जुड़ाव महसूस हुआ। कैमरे के सामने मेरे अंदर कोई डर नहीं था, बल्कि एक अलग आत्मविश्वास महसूस कर रही थी। उसी पल मेरे दिल में एक सपना जन्मा। हालांकि पढ़ाई, नौकरी और जिम्मेदारियों के कारण मैं उस सपने को तुरंत पूरा नहीं कर सकी। लंबे समय तक आत्मविश्वास की कमी ने मुझे रोके रखा। लेकिन सपने कभी मरते नहीं, वे सही समय का इंतजार करते हैं।''

उन्होंने कहा, ''पेशेवर जिंदगी में मैं एक ऐसे मोड़ पर आई, जहां मुझे लगा कि अगर मैंने अपने सपनों की ओर कदम नहीं बढ़ाया, तो शायद फिर कभी हिम्मत नहीं कर पाऊंगी। यही सोच मेरे लिए बदलाव का कारण बनी। मैंने अपने काम और तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट करना शुरू किया। धीरे-धीरे मुझे मॉडलिंग (Modeling) के मौके मिलने लगे। यहीं से मेरा नया सफर शुरू हुआ। देश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन करने का सपना लेकर मैंने मिस सुपरनेशनल में भाग लेने का फैसला किया। पूरी मेहनत, ईमानदारी और विश्वास के साथ इसकी तैयारी की और आज मैं इस मुकाम पर हूं।''

अवनि ने कहा, ''इस पूरे सफर में मेरे परिवार का बहुत बड़ा योगदान रहा। मेरे पिता ने हमेशा मेरी मां को पढ़ने और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। आज मेरी मां एक सफल उद्यमी हैं। नारी सशक्तीकरण की परिभाषा मैंने किताबों में नहीं, बल्कि अपने घर से सीखी है। मेरी मां मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। मुश्किल हालातों में बच्चों को पढ़ाना, घर संभालना और परिवार का साथ देना, यह सब मैंने अपनी आंखों से देखा है।''

उन्होंने कहा, ''अनुशासन, समय का सही उपयोग और संतुलन, ये तीन बातें जीवन की नींव हैं। पढ़ाई, नौकरी और रचनात्मक काम के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था, लेकिन मैंने यह सीख लिया कि सही प्राथमिकता कैसे तय की जाती है। यही गुण आज भी मुझे आगे बढ़ने की ताकत देते हैं।''

सौंदर्य प्रतियोगिताओं को लेकर अवनि ने कहा, ''अब इस तरह की प्रतियोगिताएं सिर्फ सुंदरता तक सीमित नहीं रह गई हैं। अब यहां सोच, समझ, नेतृत्व, संस्कृति और उद्देश्य को महत्व दिया जाता है। यह मंच महिलाओं को अपनी पहचान, अपनी कला और अपने विचार रखने का अवसर देता है। मैं खुद को इस नए दौर का हिस्सा मानती हूं और इसके लिए आभारी हूं।''

[AK]

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