एनटीआर की 30वीं पुण्यतिथि: बेटे बालकृष्ण और पोते नंदमुरी ने दी श्रद्धांजलि, नाती नारा लोकेश ने किया याद

साउथ के दिग्गज अभिनेता और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नंदमुरी तारक रामा राव की 30वीं पुण्यतिथि के मौके पर उनके परिवार के सदस्यों और प्रशंसकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
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एनटीआर की 30वीं पुण्यतिथि: बेटे बालकृष्ण और पोते नंदमुरी ने दी श्रद्धांजलि, नाती नारा लोकेश ने किया यादIANS
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साउथ के दिग्गज अभिनेता और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नंदमुरी तारक रामा राव (एनटीआर) की 30वीं पुण्यतिथि के मौके पर उनके परिवार के सदस्यों और प्रशंसकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

एनटीआर(NTR) घाट पर उनके बेटे और लोकप्रिय अभिनेता नंदमुरी बालकृष्ण श्रद्धांजलि देने पहुंचे। बालकृष्ण ने अपने पिता के स्मारक पर पुष्प अर्पित किए और उन्हें नमन किया। वहां मौजूद लोगों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इनके अलावा, एनटीआर के पोते नंदमुरी कल्याण राम भी घाट पहुंचे और उन्होंने भी अपने दादा को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कल्याण राम खुद भी तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और लोकप्रिय अभिनेता जूनियर एनटीआर के भाई हैं। उन्होंने इस मौके पर अपने दादा की यादों को ताजा किया और उनके जीवन की महानता को याद किया।

इसके अलावा, राजनीतिक (Political) दुनिया से भी उनके नाती-नारा लोकेश एनटीआर घाट पहुंचे। उन्होंने अपने नाना को नमन किया और उन्हें याद करते हुए भावुक हो गए।

एन.टी. रामा राव (N. T. Rama Rao) का जीवन हमेशा ही बहुआयामी रहा। उनका जन्म 28 मई 1923 को आंध्र प्रदेश के छोटे से गांव निम्माकारू में हुआ था। बचपन से ही उनके अंदर अभिनय की प्रति रुचि थी। फिल्मों में उन्होंने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि धार्मिक और सामाजिक कहानियों के जरिए जनता के बीच नैतिक संदेश भी पहुंचाए। उनकी ज्यादातर फिल्में हिंदू देवताओं के किरदारों पर आधारित थीं।

फिल्मों में नाम कमा लेने के बाद एनटीआर (NTR) ने राजनीति की दुनिया में कदम रखा। साल 1982 में उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की स्थापना की, और 1983 में पहली बार आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद उन्होंने 1985 और 1994 में भी मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। राजनीति में उनका व्यक्तित्व भी फिल्मों जैसा ही प्रभावशाली था। उन्होंने जनता के बीच जाकर उनके मुद्दों को समझा और कई सुधार किए। 18 जनवरी 1996 को 72 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली, लेकिन उनके योगदान आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।

[PY]

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