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भारत में ग्रामीण महिलाओं को सशक्त  बना सकती है नवोन्मेषी तकनीक

ये महिलाएं नवीन और टिकाऊ प्रौद्योगिकियों की मदद से अपने परिवार के लिए आय उत्पन्न कर सकती हैं

भारत का रास्ट्रीय ध्वज (pixabay )

भारत देश की जनसंख्या लगभग 135 करोड़ हैं जिसमें से भारत में ग्रामीण लगभग 35 करोड़ महिलाएं हैं। जैसे ही गांवों से पुरुष नौकरी की तलाश में शहरों की ओर रुख करते हैं, तो अपने और अपने परिवार की देखभाल करने के लिए यह महिलाएं पीछे रह जाती हैं। कैसे ये महिलाएं नवीन और टिकाऊ प्रौद्योगिकियों की मदद से अपने परिवार के लिए आय उत्पन्न कर सकती हैं अब, यह सामाजिक वैज्ञानिकों की एक टीम ने एक पेपर लिखा है । सामाजिक वैज्ञानिक चोको वल्लियप्पा और डॉ निर्मलेश के संपत कुमार ने स्प्रिंगर नेचर स्विटजरलैंड एजी द्वारा 'स्मार्ट विलेज-ब्रिजिंग द ग्लोबल अर्बन-रूरल' पर 511 पन्नों के खंड में 'ग्रामीण भारतीय गांवों में मूल्य संवर्धन के लिए उपयुक्त विभाजित तकनीक' शीर्षक से एक पेपर लिखा है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, एक बार समस्याओं की पहचान ग्रामीण समुदायों में हो जाने के बाद, उन पर नवीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी (एसएंडटी) विधियों को लागू किया जा सकता है।अपने समुदायों के भीतर रहकर ग्रामीण महिलाओं को आय उत्पन्न करने में मदद मिलती है।
लेखकों ने बताया कि 1990 के दशक के बाद से महिला कर्मचारियों की संख्या में 10 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिसमें आज केवल 20 प्रतिशत महिलाएं ही लाभकारी रूप से कार्यरत हैं।

\u0917\u094d\u0930\u093e\u092e\u0940\u0923 \u092e\u0939\u093f\u0932\u093e अपने समुदायों के भीतर रहकर ग्रामीण महिलाओं को आय उत्पन्न करने में मदद मिलती है।(pixabay)




"इन महिलाओं में अपने और अपने परिवार के लिए एक स्थायी तरीके से आय उत्पन्न करने के अलावा, अर्थव्यवस्था में योगदान करने की क्षमता है।" यह बात वल्लियप्पा ने कही ।

स्मार्ट गांव मॉडल के तहत लैटेस्ट तकनीकों को अपनाने का प्रस्ताव लेखकों ने गांवों की आर्थिक संभावनाओं को सुधारने और उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए दिया है।
आप को बता दे की तमिलनाडु में सलेम के महिला प्रौद्योगिकी पार्क (डब्ल्यूटीपी) में सोना कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा पहले ही एक शुरुआत की जा चुकी है, जहां यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रायोजित पांच परियोजनाएं चला रहा है।लगभग 800 महिलाओं को इसके तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है और स्थायी योजनाओं के माध्यम से उद्यमियों में उन्हें सफलतापूर्वक बदलाव में ढाला जायेगा ।

नवाचारों के एक मेजबान में एक सौर ऊर्जा ड्रायर है, जो कुछ ही घंटों में टमाटर, नींबू के छिलके, पालक, केले और ड्रमस्टिक आदि जैसी सब्जियों को निर्जलित करने में मदद करता है।
वल्लियप्पा ने कहा, " सब्जियों और फलों को संसाधित करने और उन्हें सड़ने से रोकने के लिए ग्रामीण महिलाओं को खेतों के पास कुटीर उद्योग स्थापित करने में मदद करना है। खाद्य श्रृंखला में और अधिक मूल्यवर्धन है, सूखे उत्पादों से कैंडी बनाना या सूप में उपयोग के लिए बस पाउडर बनाना है।"

फुटपाथ में उपयोग के लिए कंक्रीट स्लैब बनाने के लिए एक टाइल बनाने वाली इकाई है। विभिन्न रंगों और विभिन्न ज्यामितीय डिजाइनों में टाइलें स्टील स्लैग (स्थानीय स्टील प्लांट से एकत्रित) के साथ कंक्रीट को मिलाकर तैयार की जाती हैं और मोल्डों में डाली जाती हैं।

यह भी पढ़ें : लेह में फहराया गया सबसे बड़ा स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज


डॉ कुमार ने कहा जो कि सोना कॉलेज में नॉलेज ट्रांसफर एंड वेल्यूराइजेशन के निदेशक हैं उन्होंने कहा कि, "विज्ञान और प्रौद्योगिकी के हस्तक्षेप में महिलाओं को सशक्त बनाने और आर्थिक विकास करने की क्षमता है और यह महत्वपूर्ण है कि हम इसका उपयोग सभी संभावित स्तरों पर प्रभाव पैदा करने के लिए करें।"(आईएएनएस-PS )

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