वंतारा पर सुप्रीम कोर्ट की जाँच, नियमों के पालन पर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने वंतारा की जाँच के लिए विशेष जाँच टीम एस आई टी बनाई है। आरोप है कि वंतारा में जानवरों की खरीद-फरोख्त और देखभाल पर क़ानून तोड़े गए हैं। अब यह सवाल है कि वंतारा सच में संरक्षण का मॉडल है या सिर्फ़ एक शाही दिखावा।
वंतारा पर सुप्रीम कोर्ट की जाँच
वंतारा पर सुप्रीम कोर्ट की जाँचSora AI
Published on
3 min read

सुप्रीम कोर्ट ने अनंत अंबानी (Anant Ambani) के विशाल निजी वन्यजीव केंद्र वंतारा (Vantara) पर गंभीर सवाल उठाते हुए विशेष जाँच टीम एसआईटी (SIT) बना दी है। यह टीम देखेगी कि वंतारा ने वन्यजीव संरक्षण कानून, सीआईटीईएस (CITES) संधि और चिड़ियाघर प्राधिकरण के नियमों का पालन किया या नहीं। अदालत ने टीम से 12 सितंबर तक रिपोर्ट मांगी है।

वंतारा (Vantara) को दुनिया का सबसे बड़ा बचाव और पुनर्वास केंद्र (Rescue and Rehabilitation Centre) बताया जाता है। इसमें 3,500 एकड़ ज़मीन पर 1,50,000 से ज़्यादा जानवर रखे गए हैं। यहाँ हाथियों के लिए 1,000 एकड़ का क्षेत्र, आधुनिक अस्पताल और यहाँ तक कि हाथियों के लिए जकूज़ी जैसी सुविधाएँ भी हैं। समर्थकों का कहना है कि वंतारा (Vantara) जानवरों के लिए स्वर्ग है, लेकिन आलोचक मानते हैं कि यह एक अमीर परिवार का शौक और दिखावा करने का तरीका है।

गुजरात (Gujarat) की जलवायु (Environment) को लेकर भी सवाल उठे हैं। रेगिस्तानी और सूखी ज़मीन पर गोरिल्ला, चिंपैंजी और सरीसृप जैसे जानवर कैसे रहेंगे? क्या इन जानवरों को कृत्रिम (Unnatural) माहौल में रखकर वास्तव में उनकी मदद हो रही है या यह उनकी ज़िंदगी को और कठिन बना रहा है? साथ ही, पानी की भारी खपत सूखे से जूझ रहे राज्य में चिंता का विषय है।

क़ानून और नियम भी इस विवाद का अहम हिस्सा हैं। क्रिटिक्स का कहना है कि वंतारा में हज़ारों जानवर विदेशों से लाए गए, लेकिन यह साफ नहीं है कि सब कुछ क़ानून के तहत हुआ या नहीं। अगर 39,000 जानवर आयात (Import) किए गए हैं, तो क्या हर बार ज़रूरी अनुमति ली गई? यह सवाल इसलिए और ज़रूरी हो जाता है क्योंकि आम नागरिक और एनजीओ (NGO) ऐसे काम नहीं कर सकते, लेकिन अमीर घराने आसानी से नियमों में रास्ता और लूपहोल (Loophole) निकाल लेते हैं।

क्या वंतारा सचमुच जानवरों की मदद कर रहा है या फिर यह सिर्फ़ ताक़त और दिखावे का नया प्रतीक है?
क्या वंतारा सचमुच जानवरों की मदद कर रहा है या फिर यह सिर्फ़ ताक़त और दिखावे का नया प्रतीक है?

वंतारा की सबसे बड़ी आलोचना उसकी बंदिश है। यह आम जनता के लिए नहीं खोला गया। सिर्फ़ चुनिंदा लोग और मेहमान ही इसमें जा सकते हैं। अगर वाकई इसका मकसद संरक्षण और जागरूकता है तो जनता को इससे दूर क्यों रखा जा रहा है? पारदर्शिता की कमी ने लोगों का शक और बढ़ा दिया हैं।

वंतारा रिलायंस के जामनगर (Jamnagar) रिफाइनरी के पास है। एक ओर यह रिफाइनरी दुनिया के सबसे ज़्यादा प्रदूषण फ़ैलाने वालो में से है, दूसरी ओर उसके बगल में हरियाली और संरक्षण का दावा किया जा रहा है। सवाल उठता है कि क्या उद्योगों से हुआ नुकसान केवल एक निजी प्रोजेक्ट से पूरा किया जा सकता है?

दुनिया भर में भी अमीर लोग ऐसे प्रोजेक्ट करते हैं। गल्फ देशों (Gulf Countries) में शेख ऊँट और शेर रखते हैं, अमेरिका (America) में बड़े उद्योगपति निजी संरक्षण केंद्र बनाते हैं। वंतारा भी उसी ग्लोबल ट्रेंड (Global Trend) का हिस्सा लगता है, जहाँ संरक्षण जानवरों को बचाने का का प्रयास नहीं, बल्कि अमीरों का निजी दिखावा बनकर रह जाता है।

सामाजिक असमानता का पहलू भी इससे जुड़ा है। अनंत अंबानी (Anant Ambani) की शाही शादी में रिहाना (Rihanna) और जस्टिन बीबर (Justin Bieber) जैसे कलाकारों ने गाया, वहीं वंतारा (Vantara) आम जनता के लिए बंद रहा। जब देश के आम लोग बाढ़ और जलवायु संकट से जूझते हैं, तब एक अमीर परिवार का निजी चिड़ियाघर असमानता की याद दिलाता है।

क्या जानवरों को ऐशो-आराम चाहिए या आज़ादी? क्या उन्हें प्राकृतिक जंगल चाहिए या इंसानी कंट्रोल में बनी हुई शानदार जगह?
क्या जानवरों को ऐशो-आराम चाहिए या आज़ादी? क्या उन्हें प्राकृतिक जंगल चाहिए या इंसानी कंट्रोल में बनी हुई शानदार जगह? Sora AI

पशु अधिकार कार्यकर्ता (Animal Right Activists) भी सवाल उठा रहे हैं। हाथियों के लिए जकूज़ी और स्पा जैसी सुविधाएँ दिखावटी महसूस होती हैं। असली सवाल यह है कि क्या जानवरों को ऐशो-आराम चाहिए या आज़ादी? क्या उन्हें प्राकृतिक जंगल चाहिए या इंसानी कंट्रोल में बनी हुई शानदार जगह?

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की जाँच ने साफ कर दिया है कि वंतारा सिर्फ़ एक निजी प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह भारत की पर्यावरणीय नीति और पशु संरक्षण के भविष्य की परीक्षा भी है। यह केस तय करेगा कि असली संरक्षण जनता और सरकार की नज़र में होगा या फिर अमीर घरानों की परिभाषा पर। असली सवाल यही है, क्या वंतारा सचमुच जानवरों की मदद कर रहा है या फिर यह सिर्फ़ ताक़त और दिखावे का नया प्रतीक है? (Rh/BA)

वंतारा पर सुप्रीम कोर्ट की जाँच
गरुड़ पुराण में मौत के बाद की सज़ा: क्या यह हकीकत है या सिर्फ कहानी?

Related Stories

No stories found.
logo
hindi.newsgram.com