![History Of 30th August [Sora Ai]](http://media.assettype.com/newsgram-hindi%2F2025-08-29%2Flin4f329%2Fassetstask01k3t6hmcje1h83w55pmwkkc221756447277img1.webp?w=480&auto=format%2Ccompress&fit=max)
30 अगस्त विश्व इतिहास में कई अहम घटनाओं का दिन है, जो विज्ञान और खोज, युद्ध और स्वतंत्रता, नौरतिक सुधार और दिल को छू लेने वाले रचनात्मक सफ़र से भरा है। इस दिन 1916 में अंटार्कटिका में साहसी अन्वेषक अर्नेस्ट शेकलटन ने अपने जहाज़ एंड्योरेंस के बचे हुए चालक दल को चार महीने से अधिक समय तक बचाए रखने के बाद सुरक्षित वापस लाया था। यह तारीख हमें इतिहास की विविधता और मानवता की सफलताओं व चुनौतियों की याद दिलाती है।आइए जानते हैं 30 अगस्त (History Of 30th August) के दिन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं, उपलब्धियों और व्यक्तित्वों के बारे में।
30 अगस्त 1574 को गुरु राम दास (Guru Ram Das) ने चौथे सिख गुरु के रूप में पद संभाला। उन्होंने “लावा” नामक विवाह रस्मों का महत्वपूर्ण योगदान किया और सिख विवाहों में रीडिंग के लिए चार श्लोक (हिम) लिखे, जिन्हें आज भी विवाह अनुष्ठानों में पढ़ा जाता है। उनके योगदान से सिख धर्म (Sikha Religion) की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में स्थायित्व आया और उनका शिक्षण वर्तमान समय में भी गहरा प्रभाव रखता है।
30 अगस्त 1659 को मुगल शासक शाहजहाँ के पुत्र दारा शिकोह (Dara Shikoh, son of Shah Jahan) को उनके भाई और बाद में बादशाह बनकर उभरे औरंगज़ेब (Aurangzeb) द्वारा मरवाया गया था। दारा शिकोह (Dara Shikoh) को सूफ़ी और हिंदू धार्मिक विचारों के प्रति सहिष्णु दृष्टिकोण के लिए जाना जाता था। उनकी मृत्यु ने मुगल साम्राज्य की दिशा को पूरी तरह बदल दिया और धार्मिक कट्टरता की ओर झुकाव को तेज किया।
30 अगस्त 1922 को तुर्की ने दुम्लुपिनर की लड़ाई (Battle of Dumlupınar) में निर्णायक सफलता हासिल की, जिसने ग्रीको-तुर्क युद्ध (Greco-Ottoman War) का अंत सुनिश्चित किया और अनातोलिया में ग्रीक सैन्य उपस्थिति को समाप्त कर दिया। इस विजय के उपलक्ष्य में विक्ट्री डे या तुर्क सैनिक दिवस (Turk Soldier Day) की स्थापना की गई, जो 1926 से हर साल 30 अगस्त को बड़े जश्न के साथ मनाया जाता है। इस दिन पर सैन्य परेड, हवाई प्रदर्शन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और राष्ट्रवादी आयोजन होते हैं, जो तुर्की की सैन्य शक्ति और स्वतंत्रता के प्रति समर्पण का प्रतीक हैं।
30 अगस्त 1928 को भारत में इंडिया अज़ादी लीग (IndiaAzadi League) की स्थापना हुई थी, जिसका उद्देश्य स्वतंत्रता आंदोलन को संगठित और प्रभावी बनाना था। यह संगठन भारतीयों में राष्ट्रवादी भावना को बढ़ावा देने और ब्रिटिश शासन का विरोध करने के लिए बनाया गया था। युवाओं, छात्र संघों और राजनीतिक संगठनों ने मिलकर इस लीग को एक मंच माना जिससे स्वतंत्रता संघर्ष में नए जोश का संचार हुआ। इसने आने वाले वर्षों में स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शीत युद्ध के तनावपूर्ण दौर में 30 अगस्त 1963 को अमेरिका और सोवियत संघ के बीच तत्काल संचार की सुविधा के लिए हॉटलाइन (Hotline) स्थापित की गई। यह डायरेक्ट फोन लाइन दोनों देशों के नेताओं को परमाणु संकट या अन्य संकटों के समय तुरंत संवाद करने में सक्षम बनाती थी, जैसे कि क्यूबा मिसाइल संकट (Cuban Missile Crisis) के बाद के हाल में। इस कदम ने गलती से परमाणु युद्ध की संभावना को काफी हद तक कम करने में मदद की।
30 अगस्त 1967 को अमेरिकी सीनेट ने थरगूड मार्शल (Thurgood Marshall) को संयुक्त राज्य अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of the United States) का पहला अश्वेत न्यायाधीश नियुक्त किया। यह कदम अमेरिकी न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार का प्रतीक था| नस्लीय समानता और न्याय की दिशा में एक बड़ा विकास। मार्शल, जो पहले Solicitor General भी रह चुके थे, ने नागरिक अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण मुकदमों में वकालत की थी, और उनका उच्चतम न्यायालय में प्रवेश अमेरिका की सामाजिक प्रगति का एक महत्त्वपूर्ण संकेत था।
30 अगस्त 1984 को नासा ने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक ऐतिहासिक कदम उठाया, जब स्पेस शटल डिस्कवरी (Space Shuttle Discovery) (STS-41-D) ने अपनी पहली उड़ान भरी। यह अमेरिका का तीसरा ऑपरेशनल शटल था, जिसने केनेडी स्पेस सेंटर (Kennedy Space Center) से प्रक्षेपण किया। इस मिशन में छह अंतरिक्ष यात्री शामिल थे और इसके तहत तीन संचार उपग्रह सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किए गए। डिस्कवरी ने आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। बाद में इसी शटल ने हबल स्पेस टेलीस्कोप को कक्षा में स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण मिशन पूरे किए। यह उड़ान नासा के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बनी।
30 अगस्त 2009 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने पहले चंद्र अभियान चंद्रयान-1 (Chandrayaan-1) को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया। अक्टूबर 2008 में लॉन्च हुआ यह मिशन भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों का मील का पत्थर था। 10 महीने तक संचालन के दौरान इसने चंद्रमा की सतह पर पानी के अणुओं की खोज सहित कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आंकड़े उपलब्ध कराए। हालांकि, निर्धारित दो वर्ष की बजाय मिशन समय से पहले खत्म हो गया, लेकिन इसकी सफलता ने भारत को वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में उच्च स्थान दिलाया। चंद्रयान-1 ने आगे आने वाले चंद्र अभियानों की मजबूत नींव रखी।