

दिल्ली शराब नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में केजरीवाल को मिली जमानत के खिलाफ ED की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में 8 मई को सुनवाई होगी।
कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड मंगाने का निर्देश दिया है और कहा है कि आगे की स्थिति सुनवाई व आदेश के बाद ही साफ होगी।
AAP इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताती है, जबकि BJP और जांच एजेंसियां इसे कथित अनियमितताओं/भ्रष्टाचार से जोड़कर देख रही हैं।
दिल्ली कथित शराब नीति मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को निचली अदालत से मिली जमानत के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में 8 मई को सुनवाई होगी। कोर्ट ने इस बीच संबंधित अधीनस्थ अदालत (Trial Court) का रिकॉर्ड मंगाने का निर्देश दिया है। अगली कार्रवाई/स्थिति कोर्ट की सुनवाई और आदेश के बाद ही साफ होगी। रिपोर्टों/आरोपों में इस मामले को 2,026 करोड़ से जोड़कर भी बताया जा रहा है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष कोर्ट की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
अरविंद केजरीवाल कौन हैं?
अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) दिल्ली की राजनीति का बड़ा नाम हैं। वे पहले भारतीय राजस्व सेवा (IRS- Indian Revenue Service) में अधिकारी रहे, फिर भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से पहचान बनी और इसके बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) बनाई। केजरीवाल 2013 में पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने, फिर 2015 और 2020 में भारी बहुमत से दोबारा सत्ता में आए और लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे।
“शराब घोटाला” क्या है?
दिल्ली की 2021-22 आबकारी नीति को लेकर आरोप हैं कि नीति में गड़बड़ी/अनियमितता हुई और इससे कुछ लोगों को फायदा मिला और बाद में सरकार ने यह नीति वापस ले ली।
ED बनाम केजरीवाल: जमानत का पूरा मुद्दा क्या है?
इस आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अरविंद केजरीवाल को 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया। इसके बाद उन्हें चुनाव प्रचार के लिए 10 मई से 1 जून 2024 तक अंतरिम जमानत मिली और 2 जून को उन्होंने वापस जेल में सरेंडर किया। फिर 20 जून 2024 को ट्रायल कोर्ट से उन्हें नियमित जमानत मिली, लेकिन अगले ही दिन दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा उस जमानत पर रोक लगा दी गई। इसी के बाद ED की तरफ से जमानत को चुनौती देने वाली याचिका/मामला हाई कोर्ट में चला। कोर्ट ने इस केस में आगे सुनवाई की तारीख तय करने जैसे प्रोसीजरल स्टेप्स (Procedural steps) भी किए हैं।
इतना ही नहीं, इसी मामले में CBI ने भी 26 जून 2024 को तिहाड़ जेल से केजरीवाल को गिरफ्तार किया था और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 13 सितंबर 2024 को CBI वाले केस में उन्हें जमानत दी। इस केस में केजरीवाल को निचली अदालत से जमानत मिली थी, जिसके खिलाफ ED हाईकोर्ट पहुंची। अब इसी पर हाईकोर्ट में सुनवाई तय है। सुनवाई के दौरान केजरीवाल के वकील ने अदालत को बताया कि इस वक्त वरिष्ठ वकील उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए कुछ समय बाद सुनवाई का अनुरोध किया गया। कोर्ट ने कहा कि अभी पासओवर संभव नहीं है, इसलिए इसे किसी और दिन सुना जाएगा और फिर 8 मई की तारीख तय कर दी गई।
दिल्ली की जनता से वादे बनाम आरोप—यहीं से बड़ा सवाल
आप की राजनीति का सबसे बड़ा दावा “भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई” और दिल्ली की जनता को राहत देने वाले फैसले रहे हैं। ऐसे में विपक्ष का कहना है कि जिन मुद्दों पर AAP ने दूसरों पर सवाल उठाए, वही सवाल अब खुद AAP और केजरीवाल पर शराब नीति को लेकर उठ रहे हैं। एक तरफ AAP इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताती है, दूसरी तरफ एजेंसियां इसे मनी लॉन्ड्रिंग/अनियमितताओं से जोड़कर देख रही हैं।
BJP बनाम AAP: आरोप-प्रत्यारोप का दौर
आप (AAP) लगातार भाजपा (BJP) पर आरोप लगाती रही है कि ED/CBI जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। वहीं BJP का कहना है कि जो पार्टी खुद को ईमानदारी और भ्रष्टाचार-विरोध की पहचान बताती है, वही पार्टी अब घोटाले के आरोपों में घिरी है। यानी एक तरफ AAP BJP को दोष देती है, दूसरी तरफ BJP AAP को—और बीच में असली सवाल जनता के सामने खड़ा है।
यह पहली दफा नहीं है जब आम आदमी पार्टी या उसके नेताओं पर भ्रष्टाचार/अनियमितताओं के आरोप लगे हों। पिछले कुछ सालों में AAP और उसकी सरकार से जुड़े कई मामले चर्चा में रहे हैं, जिनमें—दिल्ली आबकारी नीति/शराब नीति मामला (2021–22), सत्येंद्र जैन मनी लॉन्ड्रिंग/हवाला मामला (2015–16), दिल्ली वक्फ बोर्ड भर्ती/अनियमितता मामला – अमानतुल्लाह खान (2020), मोहल्ला क्लिनिक ‘फर्जी टेस्ट’ आरोप (2023), ‘शीश महल’/सीएम आवास रेनोवेशन विवाद (2023)। इन्हीं वजहों से विपक्ष लगातार AAP पर सवाल उठाता रहा है, जबकि AAP इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताती रही है।
8 मई की सुनवाई में यह साफ होने की उम्मीद है कि ED की चुनौती और केजरीवाल की जमानत पर कोर्ट का रुख क्या रहता है। क्या “भ्रष्टाचार विरोध” की राजनीति करने वाले नेता के लिए ये मामला सबसे बड़ा राजनीतिक टेस्ट बन जाएगा?
(PO)