

पश्चिम बंगाल चुनाव(West Bengal) होने में अभी कुछ महीने शेष बचे हुए हैं और राजनीतिक दलों के बीच आपस में ज़ुबानी जंग जारी है। इसी बीच ख़बर आ रही है कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को जान से मारने की धमकी मिली है। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस को गुरूवार की रात को एक ई-मेल के जरिये से जान से मारने की धमकी मिली है। आरोपी ने ई-मेल में अपना मोबाइल नंबर भी दिया है।
लोक भवन के अधिकारी ने बताया कि डीजीपी (DGP) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी(Mamata Banerjee) को इसकी सूचना दे दी गयी है, साथ में गृह मंत्रालय को भी इसकी पूर्ण सूचना दे दी गयी है। बता दें कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस (C. V. Ananda Bose) को Z प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है ,परन्तु इस तरीके से धमकी भरा सन्देश संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को मिलना, प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर देता है। मामले की गंभीरता को संज्ञान में लेते हुए राज्यपाल के कार्यालय की सुरक्षा को बढ़ा दी गई है।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को धमकी मिलना कानून व्यस्था पर सवाल खड़े करता है। यह पहली बार नहीं है कि संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति को धमकी मिली है। इसके पहले भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Aditya Nath) को भी धमकी मिल चुकी है। यह दिखाता है कि, आपराधिक सोच आज भी समाज में भय का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहें हैं और इससे सूबे की कानून व्यवस्था पर बड़ा प्रश्न खड़ा हो रहा है। बीजेपी (BJP) के नेताओं की तरफ से आरोप लगाया गया है कि ममता बनर्जी अपने फाइलों को बचाने में व्यस्त हैं, कानून व्यवस्था पर उनका ध्यान बिल्कुल भी नहीं है।
राज्यपाल को धमकी मिलना यह दिखाता है कि ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर कितनी गंभीर हैं। बीते दिनों की घटना है कि ममता बनर्जी I-PAC के प्रमुख प्रतीक जैन के बचाव में तब उतर आईं, जब ई डी (ED) के अधिकारियों ने प्रतीक जैन के ऑफिस पर छापा मारा था। ममता बनर्जी ने बीजेपी और अमित शाह पर आरोप भी लगाए कि वो डरा धमाकाकर अनैतिक तरीके से चुनाव जीतना चाहते हैं।
पश्चिम बंगाल में यह पहली बार नहीं है, जब कानून व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हुए हैं ,विगत पांच वर्षों के समय में बहुत सी घटनाएं घटित हुईं हैं जिससे ममता बनर्जी पर सवाल खड़े हुए हैं। 9 अगस्त 2024 को कोलकाता के RG Kar Medical College & Hospital में एक 31 वर्षीय महिला डॉक्टर (प्रशिक्षु डॉक्टर) के साथ बलात्कार और हत्या की घटना हुई थी। लोगों के मन में काफ़ी असंतोष था। हालाँकि, ममता बनर्जी ने घटना को संज्ञान में लेते हुए राज्य विधान सभा में अपराजिता महिला एवं बाल विधेयक 2024 को पेश किया, जिससे रेप जैसे मामलें में त्वरित कार्रवाई की जा सके और कड़ी से कड़ी सजा दी जा सके।
बता दें कि जैसे -जैसे राज्य में चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, विपक्ष ममता बनर्जी पर हमलावर होता जा रहा है। ममता बनर्जी भी बीजेपी के ख़िलाफ़ अपनी बयानबाज़ी को तेज़ करती जा रहीं हैं। देखना यह है कि वार-प्रतिवार का यह सिलसिला कहाँ तक जाता है और सत्ता के सिंहासन के लिए ये ज़ुबानी जंग सीमा में रहेगा, या फिर इसकी धार और तेज होगी।
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