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देश के 7 राज्यों में छात्रों की पहुंच डिजिटल उपकरणों तक सबसे कम।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा बनाई गई एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के 7 बड़े राज्यों में 40 फीसदी स्कूली छात्रों के पास ऑनलाइन शिक्षा हासिल करने हेतु डिजिटल डिवाइस की उपलब्धता नहीं है।

देश के 7 बड़े राज्यों में 40 फीसदी स्कूली छात्रों के पास ऑनलाइन शिक्षा हासिल करने हेतु डिजिटल डिवाइस की उपलब्धता नहीं है। (Pexels)

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल डिवाइड को पाटने के लिए विशेष प्रयास कर रहा है। इसको लेकर स्वयं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही के दिनों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस बीच शिक्षा मंत्रालय द्वारा बनाई गई एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के 7 बड़े राज्यों में 40 फीसदी स्कूली छात्रों के पास ऑनलाइन शिक्षा हासिल करने हेतु डिजिटल डिवाइस की उपलब्धता नहीं है।

शिक्षा मंत्रालय की इस रिपोर्ट से पता चलता है कि देश के कई राज्यों ने ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने के साथ ही डिजिटल डिवाइस को पाटने में भी सफलता हासिल की है, जबकि कई राज्य ऐसे हैं जहां ऑनलाइन शिक्षा में छात्रों के बीच डिजिटल डिवाइस अभी भी मौजूद है। डिजिटल डिवाइस का खुलासा करने वाली यह रिपोर्ट अधिकांश राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा उपलब्ध कराए गए ब्यावर के आधार पर तैयार की गई है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा तैयार इस रिपोर्ट के अनुसार, सात बड़े राज्यों असम, आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में 40 प्रतिशत से 70 प्रतिशत स्कूली छात्रों की डिजिटल उपकरणों तक पहुंच नहीं है। गौरतलब है कि देश में कोरोना महामारी और उसके बाद लगाए गए लॉकडाउन के उपरांत ऑनलाइन शिक्षा को काफी महत्व दिया गया है। ऑनलाइन शिक्षा हासिल करने के लिए छात्रों को डिजिटल उपकरणों पर निर्भर होना पड़ा है।

केरल में 1.63 और तमिलनाडु 14.51 फीसदी के पास डिजिटल डिवाइस नहीं है। (Pexels)



केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक मध्य प्रदेश में 70 प्रतिशत बिहार में 58, आंध्र प्रदेश 57 असम 44, झारखंड 43 उत्तराखंड 41 और गुजरात 40 प्रतिशत छात्रों की पहुंच डिजिटल उपकरणों तक नहीं है। वहीं दिल्ली, केरल, तमिलनाडु की स्थिति इस मामले में काफी बेहतर है। दिल्ली में केवल 4 प्रतिशत छात्रों के पास स्मार्टफोन नहीं है। केरल और तमिलनाडु की भी बेहतर स्थिति है। केरल में 1.63 और तमिलनाडु 14.51 फीसदी के पास डिजिटल डिवाइस नहीं है।

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देश की शिक्षा प्रणाली को डिजिटल मोड के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास हो रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय शिक्षा में डिजिटलीकरण के लिए कई नई योजना बना रहा है। इससे अब शिक्षण संस्थानों में न केवल पंजीकरण और प्रवेश प्रक्रिया बल्कि शिक्षण एवं अध्यापन से जुड़े अन्य कार्य भी डिजिटल मोड में संचालित किए जा सकेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक कई ऐसे उपाय किए जा रहे हैं जिनका मकसद कौशल-आधारित शिक्षा को प्रोत्साहन देना, नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करना, डिजिटल विभाजन को पाटने के लिए कदम उठाना है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार हमारी युवाशक्ति की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कई रास्ते बना रही है। (आईएएनएस-SM)

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देश के जवानों की शहादत रोकने के लिए एमआईआईटी मेरठ की तरफ से एक बड़ा प्रयास किया गया है। (Wikimedia commons)

देश की सीमाओं की सुरक्षा करते वक्त हमारे देश के वीर सैनिक अक्सर शहीद हो जाते हैं इसलिए कभी ना कभी भारतीयों के मन में यह आता है कि हम अपने वीर जवानों की शहादत को कैसे रोक सकते? लेकिन इस क्षेत्र में अब हमें उम्मीद की किरण मिल गई है। दरअसल, हमारे जवानों की सुरक्षा के लिए मेरठ इंस्टीट्यूट आफ इंजनियरिंग टेक्नोलॉजी (एमआईईटी) इंजीनियरिंग कॉलेज, मेरठ के सहयोग से एक मानव रहित बॉर्डर सिक्योरिटी सिस्टम तैयार किया गया है। इस डिवाइस को मानव रहित सोलर मशीन गन नाम दिया गया है। यह सिस्टम बॉर्डर पर तैनात जवानों की सुरक्षा और सुरक्षित रहते हुए आतंकियों का सामना करने के लिए बनाया गया है। इसे तैयार करने वाले युवा वैज्ञानिक श्याम चौरसिया ने बताया कि यह अभी प्रोटोटाईप बनाया गया है। इसकी मारक क्षमता तकरीबन 500 मीटर तक होगी, जिसे और बढ़ाया भी जा सकता है।

यह मशीन गन इलेट्रॉनिक है। इसे संचालित करने के लिए किसी इंसान की जरुरत नहीं होगी। इसका इस्तेमाल अति दुर्गम बॉर्डर एरिया में आतंकियों का सामना करने के लिए किया जा सकेगा। इसमें लगे सेंसर कैमरे दुश्मनों पर दूर से नजर रख सकतें हैं। आस-पास किसी तरह की आहट होने पर यह मानव रहित गन जवानों को चौकन्ना करने के साथ खुद निर्णय लेकर दुश्मनों पर गोलियों की बौछार भी करने में सक्षम होगा। इस मानव रहित गन को ऑटोमेटिक और मैनुअल भी कर सकते हैं।

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काउंटरप्वाइंट की रिसर्च में कहा गया है कि भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाला बाजार बन गया है।(Wikimedia commons)

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बॉलीवुड की सुपरस्टार जोड़ी दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह(wikimedia commons)

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का 2022 सीजन 10 टीमों का होगा और बॉलीवुड की सुपरस्टार जोड़ी दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह अन्य कई दिग्गजों के साथ दो नई टीमों के लिए बोली लगाने की जंग में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। आईपीएल की संचालन संस्था ने अगले साल खिलाड़ियों की मेगा नीलामी से पहले दो नई टीमों के अधिकार हासिल करने के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं। जैसे-जैसे घोषणा की तारीख नजदीक आती जा रही है, आईपीएल की दो नई टीमों को खरीदने की होड़ वाकई तेज होती जा रही है।

कुछ दिन पहले, अदानी समूह और आरपी-संजीव गोयनका समूह की ओर से नई टीमों के लिए बोली में शामिल होने की खबरें थीं, मगर अब ऐसा लगता है कि बोली लगाने वालों में अन्य कई दिग्गज शामिल हो सकते हैं।

आउटलुक इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, बॉलीवुड जोड़ी दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह एक टीम के मालिक होने की दौड़ में हो सकते हैं, जिससे पता चलता है कि टीमों के मालिक होने की दौड़ अब पहले से कहीं ज्यादा बड़ी हो चुकी है।

पूर्व ऑल-इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियन प्रकाश पादुकोण की बेटी दीपिका के जीन में खेल है। दूसरी ओर, रणवीर इंग्लिश प्रीमियर लीग से जुड़े रहे हैं और वर्तमान में भारत के लिए एनबीए के ब्रांड एंबेसडर हैं।

IPL इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का 2022 सीजन 10 टीमों का होगा(wikimedia commons)

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