सिख गुरुओं का अपमान करने के मामले में आतिशी को नोटिस जारी।  Akshaymarathe, CC BY-SA 4.0, via Wikimedia Commons
राष्ट्रीय

सिख गुरुओं का अपमान करने के मामले में आतिशी को नोटिस जारी, क्या रद्द होगी विधानसभा की सदस्य्ता?

आतिशी मरलेना (Atishi Marlena) के कथित बयान पर विवाद खड़ा हो गया। भाजपा का आरोप है कि विधानसभा में आतिशी ने “असंवेदनशील” शब्द इस्तेमाल किए और इससे सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुईं।

Author : Preeti Ojha
  • आतिशी (AAP) के गुरु तेग बहादुर जी से जुड़े कथित बयान पर दिल्ली विधानसभा में बड़ा विवाद खड़ा हो गया।

  • BJP ने माफी/कड़ी कार्रवाई की मांग की, जबकि AAP ने वीडियो को एडिट/डॉक्टर्ड बताकर आरोपों को सिरे से खारिज किया।

  • मामला अब राजनीतिक टकराव + जांच/कार्रवाई की दिशा में बढ़ रहा है—सदन में सस्पेंशन जैसी कार्रवाई की चर्चा भी हुई।

आतिशी मरलेना (Atishi Marlena) कालकाजी से विधायक, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और इस वक्त विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। भारत का संविधान “धर्मनिरपेक्ष” देश की बात करता है—मतलब सरकार किसी एक धर्म की नहीं, सबके बराबरी की बात करेगी। किसी भी धर्म के खिलाफ नफरत या राजनीति करना गलत माना जाता है, क्योंकि नागरिकों के अधिकार और सम्मान सबसे ऊपर हैं।

इसी संवेदनशीलता के बीच गुरु तेग बहादुर जी को लेकर आतिशी (Atishi) के कथित बयान पर विवाद खड़ा हो गया। भाजपा का आरोप है कि विधानसभा में आतिशी ने “असंवेदनशील” शब्द इस्तेमाल किए और इससे सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुईं। इसी आधार पर भाजपा ने माफी, कार्रवाई और यहां तक कि सदस्यता पर भी सवाल उठाते हुए स्पीकर को पत्र तक लिखा। 

आप का अपने बचाव में तर्क 

आप (AAP) ने इसे पूरी तरह “एडिटिंग का खेल” बताया। आतिशी का कहना है कि जिस क्लिप को फैलाया गया, उसमें फर्ज़ी सबटाइटल/एडिट जोड़कर गुरु तेग बहादुर जी का नाम घसीटा गया, जबकि वो सदन में प्रदूषण और आवारा कुत्तों जैसे मुद्दों पर चर्चा कराने की बात कर रही थीं। AAP ने BJP पर धार्मिक भावनाओं को राजनीति का हथियार बनाने का आरोप लगाया।

अफ़वाह या सच 

मामला यहीं नहीं रुका। रिपोर्ट्स के मुताबिक जालंधर में इस “डॉक्टर्ड वीडियो” को लेकर FIR भी दर्ज हुई और पुलिस के दावे के अनुसार फॉरेंसिक जांच में सामने आई कि आतिशी ने “गुरु” शब्द बोला ही नहीं था—यानी विवादित वीडियो के साथ छेड़छाड़ की बात को बल मिला। 

विपक्ष और जनता की प्रतिक्रियाएं भी दो हिस्सों में बंटती दिखीं—एक तरफ “भावनाएं आहत” वाला एंगल लेकर सख्त कार्रवाई की मांग, दूसरी तरफ “वीडियो फर्ज़ी है तो असली दोषी कौन?” वाला सवाल खड़ा है। भाजपा (BJP - भारतीय जनता पार्टी) ने सड़क पर उतरकर विरोध तेज़ किया, वहीं AAP ने इसे बदनाम करने की कोशिश कहा।

आगे क्या हो सकता है? 

सदन के नियमों में स्पीकर के पास अधिकार होता है कि अनुशासनहीनता/हंगामे जैसी स्थिति में सदस्य को कुछ समय के लिए सस्पेंड (Suspend) कर सकता है। इस विवाद में भी “नियमों के मुताबिक कार्रवाई” और “सदस्यता रद्द” जैसी मांगें राजनीतिक बयानबाजी में सामने आईं। कुल मिलाकर, यह विवाद सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रह गया—यह “धर्म”, “वीडियो की सच्चाई”, और “राजनीति में नैरेटिव” की लड़ाई बन गया है। 

(PO)