तेहरान के उत्तरी हिस्से में बनी एविन जेल (Evin prison) कोई साधारण जेल नहीं है। यह पिछले 50 सालों से राजनीतिक विरोधियों की क़ैदगाह रही है।  (AI)
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एविन जेल पर इसराइली मिसाइल हमला : 80 मौतें, इंसानियत का सबसे काला अध्याय

तेहरान की एविन जेल (Evin prison) पर इसराइली (Israel) मिसाइल हमला (Attack) सिर्फ़ दीवारें नहीं ढहाता, बल्कि इंसानियत की बुनियाद हिला देता है। 80 मौतें, सैकड़ों जख़्मी और कैदियों-गार्ड्स के बीच उभरी इंसानियत ने इस तबाही को युद्ध अपराध और मानवता की सबसे बड़ी चेतावनी बना दिया।

न्यूज़ग्राम डेस्क

मोताहरेह गूनेई ईरान (Iran) की राजधानी तेहरान की कुख्यात एविन जेल में मोताहरेह गूनेई बंद थीं जो की एक राजनीतिक कार्यकर्ता थीं उनका एक शब्द था “चारों तरफ़ लाशें ही लाशें थीं, मुझे लगा मैं मरने वाली हूं।”। 23 जून को जब इसराइल (Israel) ने इस हाई-सिक्योरिटी जेल पर अचानक हमला (Attack) कर दिया था। यह दिन उनकी ज़िंदगी का सबसे डरावना दिन बन गया था, इस हमले ने न सिर्फ़ ईरान बल्कि पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। 80 लोगों की मौत, सैकड़ों घायल, टूटे हुए परिवार और ढहते मानवाधिकारों की यह कहानी आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध अपराध की बहस छेड़ चुकी है।

तेहरान के उत्तरी हिस्से में बनी एविन जेल (Evin prison) कोई साधारण जेल नहीं है। यह पिछले 50 सालों से राजनीतिक विरोधियों की क़ैदगाह रही है। यहाँ पत्रकार, लेखक, छात्र, महिला अधिकार कार्यकर्ता और वो सभी लोग कैद किए जाते हैं जो ईरानी सरकार के खिलाफ़ आवाज़ उठाते हैं। दुनिया में इसे “ईरान की ब्लैक जेल” कहा जाता है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पहले ही इस जेल में होने वाले मानवाधिकार उल्लंघनों पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी। यानी, यह जेल लंबे समय से दमन और डर का प्रतीक रही है। और शायद यही वजह है कि इसराइल ने इसे निशाने पर ले लिया है।

हमले (Attack) के दौरान जेल प्रशासन ने दरवाज़े खोलने से इंकार कर दिया। कई कैदी धुएँ और आग में फँस गए। लेकिन इन भयावह लम्हों में इंसानियत की झलक भी दिखी।

यह हमला कैसे हुआ ?

23 जून की सुबह एविन जेल के ऊपर आसमान गड़गड़ाहट और धमाकों से भर गया था, और इसराइल (Israel) ने इस जेल पर कम से कम छह मिसाइलें दागी थी। इन मिसाइलों ने जेल परिसर की करीब 28 इमारतों को तहस नहस कर दिया था, इस धमाकों के बाद आग लग गई, और धुआँ भर गया फिर अंदर मौजूद हज़ारों कैदी मौत और ज़िंदगी के बीच जूझने लगे।

क़ैदी मोताहरेह गूनेई ने बताया की “जब तीसरा धमाका हुआ, तो मुझे यक़ीन हो गया कि अब बचने का कोई रास्ता नहीं है। मैंने पूरी ताक़त से दरवाज़ा पीटना शुरू किया, लेकिन वह नहीं खुला। तब मुझे लगा कि यही मेरी आख़िरी घड़ी है।” इस हमले में 80 लोग मारे गए, जिनमें 42 जेल कर्मचारी थे, और 5 कैदी थे, उसके बाद मुलाकात के लिए जो आए थे वो उसी 80 मरने वाले लोगों में शामिल थे, कुछ मेडिकल स्टाफ़ और कुछ सुरक्षाकर्मी भी मारे गए थे। यहाँ तक कि आसपास रहने वाले आम नागरिक भी इस धमाके में मारे गए। उसके बाद मारे गए लोगों में कुछ और लोग भी शामिल थे वो हैं - मशहूर कलाकार मेहरंगिज़ ईमानपूर, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक, एक माँ और उसका पाँच साल का बच्चा, ईरानी-अमेरिकी कैदी मसूद बेहबहानी, यह केवल सैन्य टारगेट नहीं था, बल्कि आम लोगों का कत्लेआम बन गया।

हमले (Attack) के दौरान जेल प्रशासन ने दरवाज़े खोलने से इंकार कर दिया। कई कैदी धुएँ और आग में फँस गए। लेकिन इन भयावह लम्हों में इंसानियत की झलक भी दिखी। कुछ क़ैदियों ने घायल गार्ड्स को उठाकर बाहर निकाला। एक महिला क़ैदी ने रो रहे पुलिस अधिकारी के घावों पर पट्टी बांधी। जेल की क्लिनिक में फंसे डॉक्टरों और नर्सों को क़ैदियों ने बचाया। डॉ.सईदाह माकरम, जो गंभीर रूप से घायल हो गई थीं, उन्होंने बाद में लिखा था “जिन क़ैदियों का मैंने इलाज किया था, वही मेरी जान बचाने दौड़े।” यानी, जिस जेल में बंद लोगों को दुश्मन माना जाता था, वही इंसानियत का सबसे बड़ा चेहरा बन गए।

हमले के बाद एविन जेल (Evin prison) में बंद ट्रांसजेंडर क़ैदियों की स्थिति अब तक रहस्य बनी हुई है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि 100 ट्रांसजेंडर कैदी मारे गए।

इसराइल का दावा और विवाद

इसराइल (Israel) ने इस हमले (Attack) को सही ठहराते हुए कहा की एविन जेल का इस्तेमाल हमारे खिलाफ़ ख़ुफ़िया अभियानों के लिए हो रहा था। हमने कोशिश की कि नागरिकों को कम से कम नुकसान पहुंचे। लेकिन हकीकत कुछ और ही था। ह्यूमन राइट्स वॉच ने इसे अंधाधुंध हमला बताया। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा, की यह हमला अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का उल्लंघन है और साफ़ तौर पर युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है। संयुक्त राष्ट्र ने भी स्पष्ट किया कि एविन कोई सैन्य ठिकाना नहीं था।

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हमले के बाद एविन जेल (Evin prison) में बंद ट्रांसजेंडर क़ैदियों की स्थिति अब तक रहस्य बनी हुई है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि 100 ट्रांसजेंडर कैदी मारे गए। लेकिन जांच में यह दावा ग़लत पाया गया। फिर भी आज तक यह साफ़ नहीं है कि वो कैदी कहाँ हैं, उनकी हालत क्या है। यह पहलू इस घटना को और भी जटिल और डरावना बना देता है। हमले के बाद अफ़रातफ़री में 75 कैदी जेल से निकल भागे। कुछ कैदी तो बाद में पकड़े भी गए और कुछ खुद वापस लौट आए, लेकिन कई कैदी अब तक लापता हैं, यह स्थिति ईरान (Iran) सरकार के लिए बड़ी सुरक्षा चुनौती बन गई।

खौफ़ और तबाही की इस दास्तान में एक अलग मोड़ भी है। जब आग लगी, धमाके हुए और मौत सामने थी, तब कैदियों और सुरक्षाकर्मियों ने एक-दूसरे की मदद की। यह दृश्य हमें दिखाता है कि राजनीति, युद्ध और नफ़रत से ऊपर इंसानियत हमेशा ज़िंदा रहती है। जेल की चारदीवारी, हथकड़ियाँ और कैदी-गार्ड की पहचान उस वक़्त बेकार हो गई थी। वहां सिर्फ़ इंसान थे, जो एक-दूसरे को बचाने की कोशिश कर रहे थे।

खौफ़ और तबाही की इस दास्तान में एक अलग मोड़ भी है। जब आग लगी, धमाके हुए और मौत सामने थी, तब कैदियों और सुरक्षाकर्मियों ने एक-दूसरे की मदद की।

निष्कर्ष

एविन जेल (Evin prison) पर इसराइल (Israel) का हमला (Attack) केवल एक देश पर हमला नहीं था, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है। यह हमें बताता है कि जब राजनीति और सत्ता की लड़ाई चरम पर पहुँचती है, तो सबसे पहले आम लोग कुचले जाते हैं। मासूम ज़िंदगियाँ, कलाकार, सामाजिक कार्यकर्ता, बच्चे यह सभी युद्ध की कीमत चुकाते हैं। और सबसे डरावनी बात तो यह है कि आज भी कोई नहीं जानता कि उस जेल के कई कैदी जिंदा हैं या मर चुके हैं। एविन जेल की यह कहानी हमें याद दिलाती है कि युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता, बल्कि जब लोग एक-दूसरे को इंसान के तौर पर नहीं देखते, बल्कि घृणा, द्वेष या स्वार्थ से प्रेरित होते हैं, तो यह मानवता के खिलाफ़ एक लड़ाई होती है। मानवता की हार का मतलब एक ऐसे समाज का उदय है जहाँ लोग एक-दूसरे के प्रति असंवेदनशील हो जाते हैं, और यह पूरी मानवता के लिए एक बड़ी हार होती है, और जब इंसानियत हारती है, तो पूरी दुनिया हारती है। [Rh/PS]

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