2024 लोकसभा चुनाव से पहले टाटा ने बीजेपी को दिया इतने करोड़ रुपए का चंदा, रिपोर्ट्स में हुआ खुलासा

हाल के रिपोर्ट्स में यही टाइमलाइन टाटा ग्रुप और बीजेपी के मामले में सामने आई है—जहाँ सरकार की सेमीकंडक्टर सब्सिडी मंज़ूरी के कुछ हफ्तों बाद BJP को ₹758 करोड़ का चंदा (electoral trust route से) मिलने की बात कही गई।
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टाटा ने बीजेपी को दिया इतने करोड़ रुपए का चंदा, रिपोर्ट्स में हुआ खुलासा। Prime Minister's Office (India) (GODL-India), GODL-India, via Wikimedia Commons
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  • सब्सिडी की मंज़ूरी (29 Feb 2024) के कुछ ही हफ्तों बाद टाटा-लिंक्ड electoral trust से BJP को ₹758 करोड़—यही टाइमिंग सबसे बड़ा सवाल बन रही है।

  • PIB के मुताबिक धोलेरा (Gujarat) fab + Assam OSAT को कैबिनेट मंज़ूरी मिली, और रिपोर्ट्स में टाटा-लिंक्ड दो यूनिट्स के लिए ₹44,000+ करोड़ सपोर्ट का दावा है।

  • Electoral Bonds हटने के बाद electoral trusts का रोल बढ़ा, और PET डेटा में भी लगभग 83% हिस्सा BJP को दिखता है—इसलिए बहस “दान” नहीं, लोकतंत्र में पारदर्शिता की

देश में कॉरपोरेट–पॉलिटिक्स का रिश्ता कोई नई कहानी नहीं है। लेकिन जब सरकारी मंज़ूरी, हजारों करोड़ की सब्सिडी और उसके ठीक बाद राजनीतिक चंदा—ये सब एक ही लाइन में आ जाए, तो मामला “दान” नहीं, डेमोक्रेसी की नीयत बन जाता है।

हाल के रिपोर्ट्स में यही टाइमलाइन टाटा ग्रुप और BJP के मामले में सामने आई है—जहाँ सरकार की सेमीकंडक्टर सब्सिडी मंज़ूरी के कुछ हफ्तों बाद BJP को ₹758 करोड़ का चंदा (electoral trust route से) मिलने की बात कही गई। 

29 फरवरी 2024 को कैबिनेट की मंज़ूरी

29 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली यूनियन कैबिनेट ने तीन semiconductor units को मंज़ूरी दी। PIB की आधिकारिक प्रेस रिलीज़ के मुताबिक, इनमें टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का गुजरात के धोलेरा में एक बड़ा semiconductor fab (टेक्नोलॉजी पार्टनर PSMC) और असम में OSAT/assembly-test यूनिट शामिल है। 

रिपोर्ट्स का दावा: टाटा- लिंक्ड दो यूनिट्स को ₹44,000+ करोड़ का सपोर्ट

Scroll की रिपोर्टिंग के आधार पर यह कहा गया कि सरकार ने टाटा-लिंक्ड दो यूनिट्स के लिए ₹44,000 करोड़ से अधिक (लगभग ₹44,023 करोड़) की सब्सिडी/सपोर्ट को मंज़ूरी दी।

अप्रैल 2024: भाजपा को ₹758 करोड़ का चंदा (electoral trust route)

इसके बाद रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल 2024 में टाटा ग्रुप से जुड़े electoral trust route के जरिए BJP को ₹758 करोड़ दिए गए—और ये चंदा लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आया।

असली मुद्दा “डोनेशन” नहीं टाइमिंग है!

यहाँ कोई अदालत-स्तरीय फायदे के बदले फायदा  “(quid pro quo)” साबित करने वाला दस्तावेज़ सार्वजनिक रूप से सामने नहीं रखा गया है। लेकिन फैक्ट्स की टाइमलाइन खुद एक सवाल बन जाती है: पहले केंद्र से बड़ी मंज़ूरी/सपोर्ट, फिर उसी इकोसिस्टम से BJP को बड़ा चंदा,

और वो भी चुनाव से ठीक पहले। यही वो जगह है जहाँ लोकतंत्र में “लीगल” के साथ “एथिकल” सवाल उठते हैं कि क्या नीतियाँ सिर्फ public interest में बन रहीं, या donor ecosystem भी साथ-साथ चल रहा है?

Electoral Bonds हटे… “Electoral Trusts” का रोल बढ़ा

सुप्रीम कोर्ट के electoral bonds scrapped होने (फरवरी 2024) के बाद यह उम्मीद थी कि corporate political funding पर असर पड़ेगा। लेकिन 2024–25 में ट्रेंड यह दिखा कि electoral trusts के जरिए राजनीतिक दलों को बड़े पैमाने पर चंदा जाता रहा—और इस चैनल में BJP का हिस्सा बहुत बड़ा बताया गया। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, electoral bonds के बाद वाले साल में BJP की donations ₹6,000 करोड़ से ऊपर तक पहुँचीं और कुल political donations में BJP का हिस्सा बहुत अधिक रहा।

“टाटा-लिंक्ड ट्रस्ट” का डेटा: 83% भाजपा को

NDTV और Times of India की रिपोर्टिंग के मुताबिक Tata group-backed/controlled Progressive Electoral Trust (PET) ने FY 2024–25 में कुल लगभग ₹914–₹915 करोड़ विभिन्न पार्टियों को दिए, जिनमें से BJP को करीब ₹757–₹758 करोड़ (लगभग 83%) मिला। 

यानी ₹758 करोड़ वाला नंबर “एक अलग-थलग घटना” नहीं दिखता—वो उसी बड़े पैटर्न का हिस्सा लगता है जहाँ ट्रस्ट रुट से सबसे बड़ा हिस्सा भाजपा को गया।

(PO)

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